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मंगल पर बनेगी ऑक्सीजन, जानिए NASA कैसे करेगा यह काम

मंगल पर बनेगी ऑक्सीजन, जानिए NASA कैसे करेगा यह काम

मंगल की सतह पर जीवन के अनुकूल हालात नहीं हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मंगल की सतह पर जीवन के अनुकूल हालात नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) मंगल (MARS) पर इंसान भेजने के लिए शिद्दत से तैयारी कर रहा है. इसके लिए वह मंगल पर ही ऑक्सीजन (Oxygen) बनाने की तैयारी भी कर रहा है.

नई दिल्ली:  नासा (NASA) मंगल पर इंसान भेजने के लिए जोरों से तैयारी कर रहा है. उसने यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के साथ मिलकर मंगल से मिट्टी के नमूने लाने की योजना भी बना ली है और इसी के साथ वह मंगल पर आदमी भेजने की तैयारी कर रहा है. वह इस बात की योजना बना रहा है कि मंगल पर गए उसके खगोलविदों को ऑक्सीजन कैसे मिलेगी.

फिलहाल यह योजना है नासा की
नासा की योजनाओं की बात की जाए तो नासा इसी साल जुलाई में अपना एक रोवर मंगल के लिए प्रक्षेपित करेगा. पर्सिवियरेंस नाम का यह रोवल अगले साल 18 फरवरी को मंगल पर उतरेगा और वहां कई वैज्ञानिक प्रयोग करेगा जिसमें से कुछ इंसान के वहां पहुंचने की भूमिका भी तैयार करेंगे.

मंगल पर ही बनेगी ऑक्सीजन
 नासा की योजना अपना ही एक ऑक्सीजनेटर बनाने की है जो मंगल ग्रह पर ही सोने के बक्से का उपयोग कर वहीं ऑक्सीजन बनाने में सक्षम हो. इस बॉक्स को मोक्जी नाम दिया गया है. मोक्जी यानि मार्स ऑक्सीजन इसरु एक्सपेरिमेंट (MOXIE)

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नासा मंगल पर मानव भेजने की तैयारी कर रहा है.


क्या है यह प्रयोग
मोक्जी नासा का मार्स 2020 मिशन का एक ही हिस्सा है. इसी मिशन के तहत मंगल के जेजीरो कार्टर पर पर्सिवियरेंस रोवर उतरेगा. यह रोवर नासा की जेट प्रपल्शन लैब में प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रहा है. इसका एक काम मोक्जी के तहत मंगल की ही कार्बन डाइऑक्साइड से एक सोने के बक्से का उपयोग कर ऑक्सीजन बनाने का भी का होगा.

इस तकनीक का होगा इस्तेमाल
मंगल के वायुमंडल में 95 प्रतिशत कार्बन डाइ ऑक्साइड है, दो प्रतिशत नाइट्रोजन और दो प्रतिशत ऑर्गोन है. प्रयोग में इसी कार्बन डाइ ऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने की योजना है. जिस तरह से ईधन सेल में ऑक्सीजन को ईधन के तौर पर जलाया जाता है, यह उसी की विपरीत प्रक्रिया जैसा ही है, जिसे सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं. इसमें मंगल की कम दबाव वाली गैस ली जाएगी और फिर उसे पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब पर लाया जाएगा.

सोने की भी होगी भूमिका
कार्बन डाइऑक्साइड को करीब 800 डिग्री के तापमान पर गर्म किया जाएगा. इसके बाद इलेक्ट्रलिसस प्रक्रिया से ऑक्सीजन उसमें से अलग हो जाएगी. अब यह प्रक्रिया जिस बक्से में होगी वह खुद बहुत ज्यादा गर्म हो जाएगा. सोना जल्दी से गर्मी नहीं फेंकता है इसलिए इस बक्से के सोने का होने से फायदा मिलेगा.

Mars
नासा का क्यूरोसिटी रोवल मंगल ग्रह पर पहले से ही काम कर रहा है. (Reuters)


कितनी ऑक्सीजन बन सकेगी इस प्रक्रिया से
मोक्जी हर घंटे में छह ग्राम ऑक्सीजन बना सकेगा जो एक कुत्ते को जीवित रखने के लिए काफी है, लेकिन जरूरत इससे 200 गुना ज्यादा ऑक्सीजन बनाने की होगी. इसके अलावा यह प्रयोग मंगल के अलग अलग हालातों में किया जाएगा जैसे दिन और रात, आंधी और साफ मौसम, गर्मी और सर्दी, वगैरह.

इंसानों के मंगल ग्रह पर जाने का रास्ता खोल सकता है यह प्रयोग
यदि प्रयोग सफल रहा तो यह मंगल पर इंसान भेजने के भविष्य के अभियानों के लिए रास्ता खोल सकता है. मंगल पर मानव भेजने के लिए कई चुनौतियां का सामना करना होगा. पर्सिवियरेंस रोवर का प्रमुख काम मंगल से मिट्टी और पत्थरों के नमूने एकत्र करना होगा जिसने पृथ्वी पर लाने की योजना भी बन चुकी है. इसी से इंसान को भी वापस धरती पर ला पाने की क्षमता की भी जांच की जाएगी.

अभी यह है योजना
जब पर्सिवियरेंस नमूने जमा कर लेगा तब 2026 तक दो अंतरिक्ष यान एक साथ मंगल भेजे जाएंगे. इनमें से एक मंगल पर दूसरे यान के साथ एक मिनी रोवर को पहुंचाएगा जो पर्सिवियरेंस से नमूने लेगा. यह रोवर दूसरे यान में चला जाएगा, जो मंगल से ही उसी की कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा. इसके बाद उन नमूने को उस अंतरिक्ष यान से वापस लाने के काम ईएसए का एक अन्य यान करेगा. यह योजना बहुत ही महत्वाकांक्षी है.

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Tags: Mars, Science, Space

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