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जानिए भारत के पड़ोसी देशों में कैसे लागू है एक राष्ट्रीय पहचान पत्र की व्यवस्था

News18Hindi
Updated: September 24, 2019, 4:18 AM IST
जानिए भारत के पड़ोसी देशों में कैसे लागू है एक राष्ट्रीय पहचान पत्र की व्यवस्था
पाकिस्तान का नेशनल आईडेंटी कार्ड

कई ऐसे भी देश हैं, जहां अगर आपने आईडी कार्ड साथ नहीं रखा है तो आपके ऊपर पेनाल्टी तो लगेगी ही साथ में जेल में जाने का भी खतरा होता है. वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां कोई एक राष्ट्रीय पहचान पत्र नहीं है, बल्कि अलग-अलग कार्ड आईडी का काम कर देते हैं

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  • Last Updated: September 24, 2019, 4:18 AM IST
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देश के गृहमंत्री अमित शाह ने आधार की जगह देश में एक नए पहचान पत्र की बात कही है, जो असल में देश के अकेले कार्ड के तौर पर नागरिकता की पहचान करेगा. फिलहाल हमारे देश में पहचान पत्र के लिए कई तरह कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें आधार, पासपोर्ट, वोटर कार्ड, लाइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड आदि शामिल हैं.

आइये जानते हैं कि दुनियाभर के देशों में पहचान पत्र का क्या सिस्टम है. खासकर भारत के पड़ोसी देशों में किस तरह नेशनल आईडेंटी कार्ड काम करता है. क्या ये अकेला कार्ड ही काफी होता है या अन्य वैकल्पिक कार्ड भी पहचान बताने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

आमतौर पर राष्ट्रीय पहचान पत्र वो आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें आपका नाम, पता, पहचान फोटो के साथ दी जाती है, जिसे आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार जारी करती है और इसका इस्तेमाल देश के अंदर होता है.

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ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य कार्ड राज्य की सरकारों या अलग विभागों द्वारा जारी होते हैं, जिनका इस्तेमाल सीमित तौर पर होता है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय पहचान पत्र नहीं माना जा सकता. दुनियाभर के सौ से ज्यादा देशों में राष्ट्रीय पहचान पत्र अनिवार्य हैं. कुछ देशों में इनके लिए वैकल्पिक प्रूफ आईडेंडी कार्ड भी मंजूर होते है, मसलन ड्राइविंग लाइसेंस. प्राइवेसी इंटरनेशनल नामक संस्था का कहना है कि वास्तव में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां एक कार्ड से हर काम हो जाता हो.

यूरोपीय देशों में नागरिकों के पास अगर तय तकनीक मानकों के साथ नागरिक पहचान पत्र हैं और वो  नागरिकता के मानकों को पूरा करते हैं तो पासपोर्ट के बगैर पूरे यूरोप की यात्रा कर सकते हैं.

भारत के पड़ोसी देशों में प्रावधान
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अफगानिस्तान में यूं तो कई कार्ड इस्तेमाल होते हैं लेकिन राष्ट्रीय पहचान पत्र का काम ताजकिरा करता है, जो इलैक्ट्रॉनिक आईडी कार्ड है.

बांग्लादेश में 18 साल के बाद सभी नागरिकों के लिए नेशनल आईडी कार्ड अनिवार्य है. सभी बांग्लादेशियों को एक एनआईडी कार्ड जारी होता है, इसी के जरिए वो पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, क्रेडिट कार्ड और जमीन मालिकाना संबंधी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं.

बांग्लादेश में 18 साल के बाद सभी नागरिकों के लिए नेशनल आईडी कार्ड अनिवार्य है


भूटान में भूटान सिटिजनशिप कार्ड पहचान पत्र का काम करता है. ये राष्ट्रीय कार्ड इलैक्ट्रॉनिक आईडी कार्ड है, ये सभी भूटानी नागरिकों के लिए अनिवार्य है. इसकी कीमत 100 भूटानी नेगुलत्रम है.

चीन में रेजिडेंट आइडेंटी कार्ड की जरूरत पड़ती है. आमतौर पर ये स्कूल के दौरान ही जारी हो जाता है.

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हांगकांग में हांगकांग आईडेंटी कार्ड की जरूरत पड़ती है. इसका इस्तेमाल वहां 1949 से हो रहा है. इसे 1980 के बाद अनिवार्य बना दिया गया. बच्चों को 11 साल की उम्र में आईडी कार्ड की जरूरत पड़ती है लेकिन इसे उन्हें 18 साल में बालिग होने पर बदलवाना पड़ता है.पुलिस यहां किसी भी 15 साल के लड़के या शख्स से अपना हांगकांग आईडी कार्ड या वैद्य पासपोर्ट प्रस्तुत करने को कह सकती है. अगर आप ऐसा नहीं कर सके तो आपके खिलाफ कानून तोड़ने का जुर्म दर्ज कर दिया जाएगा.

मालदीव में अब पासपोर्ट कार्ड को क्रेडिट कार्ड के आकार में बॉयोमैट्रिक तरीके से माना जा रहा है, जो ड्राइविंग लाइसेंस और हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड की भी जगह काम करता है. साथ ही कुछ खास क्रेडिट कार्ड्स का भी .

चीन में रेजिडेंट आइडेंटी कार्ड की जरूरत पड़ती है


नेपाल में राष्ट्रीय पहचान पत्र 2018 से बॉयोमीट्रिक तरीके से जारी किया जा रहा है. इसमें अंग्रेजी और नेपाली में सारी जानकारी होती है.

पाकिस्तान में कंप्युटराइज्ड नेशनल आईडेंटी कार्ड काम में आता है, जिसे सीएनआईसी भी कहते हैं. जो पहली बार 18 साल की उम्र में बनता. इसे हमेशा लेकर चलना अनिवार्य नहीं है. लेकिन बैंक में खाता खोलने, पासपोर्ट और सभी जरूरी ट्रांजिक्शन में इसकी जरूरत अनिवार्य है.

श्रीलंका में नेशनल आईडेंटी कार्ड 16 साल का होने के बाद सभी नागरिकों के लिए जरूरी होता है. इसमें दस डिजिट के नंबर होते हैं, जिसमें पहले दो नंबर आपके बर्थ के होते हैं. अगर आपको पासपोर्ट के लिए आवेदन करना हो तो आपके पास नेशनल आईडी कार्ड होना जरूरी है

दूसरे देशों में क्या है व्यवस्था
ब्राजील में पहचान पत्र को सेडुला डि आईडेंटीडेड कहा जाता है. 18 वर्ष से ऊपर हर नागरिक के लिए ये जरूरी है. ये कई दस्तावेजों के पूरक के तौर पर काम करता है. लेकिन यहां के अलग अलग विभाग भी अपने अलग कार्ड जारी करते हैं. हर राज्य का अपना कार्ड भी होता है.

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जर्मनी में पर्सनलाऊजवेज (आईडी कार्ड) सभी उन जर्मन नागरिकों के लिए जरूरी है, जो 16 साल या इससे ऊपर हों. उन्हें या तो पर्सनलाऊजवेज की जरूरत होती है या फिर पासपोर्ट भी इसका काम करता है. लेकिन इसे साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होती. लेकिन पुलिस या कुछ अन्य अधिकारियों को अधिकार है वो इसकी मांग कर सकते हैं. लेकिन इसे तुरंत पेश करने की जरूरत नहीं होती. हां तब पेनाल्टी लग जाती है अगर आप आईडी कार्ड या पासपोर्ट में कोई एक पेश नहीं कर पाएं. इसमें आप जेल की हवा भी खा सकते हैं.

जर्मनी में अगर आप आईडी कार्ड या पासपोर्ट में कोई एक पेश नहीं कर पाएं तो जेल की हवा भी खा सकते हैं.


इजरायल में पहले 16 साल की उम्र में तेउडेट जेहूट कार्ड जारी होता है लेकिन 18 की उम्र के बाद ये अनिवार्य होता है.

उत्तर कोरिया में अगर आप आईडेंटी कार्ड और ट्रेवल पास लेकर नहीं चलते तो आप पर तगड़ा फाइन लगाया जा सकती है. उत्तर कोरिया में अगर आपको कहीं देश में यात्रा भी करनी हो तो उसके लिए आपको ट्रैवल पास की भी जरूरत पड़ेगी, जिसपर साफ लिखा होगा कि आपको कहां जाना है और इस पर मंजूरी भी होगी. वहां कई बार अगर आप ये कार्ड लेकर नहीं चलते तो सजा भी हो सकती है. 2004 से 2008 के बीच यहां सभी कार्ड इलैक्ट्रॉनिक तौर पर बना दिये गए. जो एक सेंट्रल डेटाबेस से जुड़े हैं. उत्तरी कोरिया में आप आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हासिल कर सकते हैं. यहां पर कुछ ही लोगों के पास अपनी कार है.

रूस में इंटरनल पासपोर्ट आईडेंटी कार्ड का काम करता है, जो किसी भी नागरिक को 14, 20 और 45 साल की उम्र में जारी होता है. लेकिन लोग बतौर आईडेंटी ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट का भी उपयोग कर सकते हैं.

अमेरिकी पासपोर्ट राष्ट्रीय पहचान पत्र का काम करता है


अमेरिका में अमेरिकी पासपोर्ट राष्ट्रीय पहचान पत्र का काम करता है. पासपोर्ट को संघीय सरकार का विदेश मंत्रालय अनुरोध पर जारी करता है. इसे आईडी और सीमित ट्रैवल डाक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

कई देशों में जरूरी नहीं
कई देश ऐसे भी हैं जहां राष्ट्रीय पहचान पत्र की जरूरत नहीं होती. बल्कि वैकल्पिक कार्ड या दस्तावेज ही उसका काम करते हैं. ऐसे देशों में अंडोरा, आस्ट्रेलिया, बहामास, कनाडा, कांगो, डेनमार्क, जापान, नौरू, नार्वे, न्यूजीलैंड, सामोआ, तुर्कमेनिस्तान, ब्रिटेन, उजबेकिस्तान शामिल हैं.

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First published: September 23, 2019, 4:43 PM IST
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