मौकापरस्त पाकिस्तान ने कैसे भारत-चीन तनाव का उठा लिया फायदा?

मौकापरस्त पाकिस्तान ने कैसे भारत-चीन तनाव का उठा लिया फायदा?
भारत के साथ तनाव क बीच चीन और पाकिस्तान ने किया बड़ा समझौता. न्यूज़18 क्रिएटिव इमेज.

जब Galwan Valley Face-Off में 20 भारतीय जवान शहीद हुए, तब कई देशों ने घटना पर अपना रुख ज़ाहिर किया, लेकिन पाकिस्तान चुप रहा. यह तूफान से पहले की नहीं बल्कि चालबाज़ी से पहले की खामोशी साबित हुई. जानिए पाकिस्तान ने किस धूर्तता का नमूना पेश किया और क्या बन रहे हैं India-China-Pakistan त्रिकोण के समीकरण.

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Ladakh में भारत के साथ सीमा पर तनाव के हालात के बीच China & Pakistan के बीच अरबों डॉलर का एक समझौता होना भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है. पाकिस्तान के दावे वाले कश्मीर (PoK) के कोहाला में 2.4 अरब डॉलर के हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट के लिए इस Agreement से पाकिस्तान को सस्ती बिजली मिलेगी. Europe, Asia और Africa के बीच कमर्शियल लिंक बनाने वाले बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative) के तहत यह प्रोजेक्ट शुरू होगा.

विशेषज्ञों की मानें तो BRI कॉरिडोर के दूसरे प्रोजेक्टों की अनदेखी कर पाकिस्तान के दावे वाले कश्मीर में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और बांध को तरजीह देकर चीन अस्ल में भारत को तंग करना चाह रहा है. चीन की तरफ से कई अरबों डॉलर के चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) में यह किसी कंपनी द्वारा पावर सेक्टर में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है. अब समझना ये ज़रूरी है कि इस डील के मायने किसके लिए क्या हैं.

भारत का विरोध क्या और क्यों?
चीन और पाकिस्तान के बीच CPEC में हुए इस समझौते का विरोध करते हुए ​भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से कश्मीर के हिस्से को कब्ज़े में ले रखा है, ऐसे में इस इलाके में किसी भी किस्म का निर्माण मंज़ूर नहीं हो सकता. विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत इस रुख पर कायम है कि कश्मीर और लद्दाख का समूचा हिस्सा भारत का अभिन्न अंग है और यहां किसी का हस्तक्षेप भारत स्वीकार नहीं करेगा.
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चीन और पाकिस्तान के बीच हुए पावर प्रोजेक्ट समझौते पर भारत ने विरोध जताया.


भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि वह लगातार इस तरह के प्रोजेक्टों को लेकर पाकिस्तान और चीन दोनों देशों के सामने अपनी आपत्तियां रख रहा है.

क्या ये भारत के खिलाफ चीन की रणनीति है?
साल 2015 में BRI के तहत CPEC कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी, जिसके ज़रिये एशिया के कई हिस्सों को अफ्रीका और यूरोप के साथ सड़क व समुद्र मार्ग से जोड़े जाने का नेटवर्क शुरू हुआ था. चीन के शब्दों में इसके दूसरे फेज़ में विशेष आर्थिक ज़ोन के विकास के साथ ही व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने पर फोकस रहेगा. लेकिन क्या यह अस्ल में भारत के खिलाफ कोई रणनीति है?

यूएई के नेशनल डिफेंस कॉलेज में प्रोफेसर मोहन मलिक के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की 'भारत को घेरो' नीति के तहत ये कदम उठाए जा रहे हैं. मलिक ने ये भी माना कि हाल में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद बने तनाव से सबसे ज़्यादा फायदे में पाकिस्तान ही रहा.

पाकिस्तान ने कैसे भुनाया भारत चीन तनाव?
पावर प्रोजेक्ट के लोन की अदायगी को लेकर पाकिस्तान ने चीन से और ज़्यादा समय दिए जाने की मांग की थी. दूसरी तरफ, भारत चीन के बीच बने तनाव के अलावा एक घटना और हुई जब पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज पर पिछले दिनों चार हमलावरों ने गोलीबारी की. हालांकि यह हमला बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने किया था, लेकिन पाक ने इसके लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया.

अब स्थिति ये है कि इस स्टॉक एक्सचेंज में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 40% की है. सिंगापुर के RSIS के फेलो जेम्स डॉर्सी के हवाले से एक और रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान ने जब भारत को हमले के लिए घेरा तो चीन की हमदर्दी उसे मिली. यानी पाकिस्तान ने चीन और भारत की झड़प को अपने लिए भुनाया.

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BRI के तहत CPEC कार्यक्रम के दूसरे फेज़ में विशेष आर्थिक ज़ोन के विकास पर चीन ज़ोर देगा. प्रतीकात्मक तस्वीर.


पाक के लिए मील का पत्थर बनी डील कैसे हुई?
पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर के सुधानोटी जिले में झेलम नदी पर आजाद पट्टान हाइड्रो प्रॉजेक्ट की घोषणा की. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के हिस्से में बांध पर इस प्रोजेक्ट को चीन की तीन गॉर्गेज कॉर्पोरेशन की इकाई कोहोला हाइड्रोपावर कंपनी द्वारा डेवलप किया गया. समझौते पर दस्तखत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राजदूत याओ जिंग शामिल थे. पीएम के विशेष सहायक असीम सलीम बाजवा ने इस डील को मील का पत्थर बताया.

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चीन की दोहरी चाल से रहना होगा सावधान!
डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के तहत चीनी सैनिकों के करीब 1.5 किमी पीछे हटने की खबरें आईं. इसके बाद चीन ने भारत के साथ सीमाओं पर शांति और सीमाक्षेत्रों में विकास की तरफ बढ़ने का राग अलापा है, लेकिन दूसरी तरफ, ये भी खबरें हैं कि चीन पाकिस्‍तान को मिसाइलों से लैस ड्रोन विमान भी दे रहा है. गौरतलब है कि चीन लद्दाख में जिन हमलावर ड्रोन Wing Loong II के ज़रिए भारतीय इलाकों पर नज़र रख रहा है, वैसे ही 4 ड्रोन विमान पाकिस्‍तान को देने वाला है.

यानी एक तरफ, चीन के विदेश विदेश मंत्री Wang Yi ने उम्मीद जताई ​है कि दोनों पक्षों की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया जाएगा, जिससे विवाद बढ़े और दूसरी तरफ, पाकिस्तान को खुले हाथों से हथियार देने में चीन पीछे नहीं है. चीन भले ही दावा करे कि इससे बलूचिस्‍तान में बन रहे चीनी नौसेना बेस की सुरक्षा होगी लेकिन भारत को सतर्क रहना ही होगा.
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