जानें कश्मीर मामले पर कैसे अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान

आर्टिकल 370 के प्रावधान खत्म कर जम्मू-कश्मीर (jammu and kashmir) राज्य को पुनर्गठित करने के भारत (India) के कदम के बाद बौखलाए पाकिस्तान (Pakistan) की समर्थन जुटाने की कोशिश के दौरान कैसे उससे पल्ला झाड़ रही है दुनिया?

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 5:55 AM IST
जानें कश्मीर मामले पर कैसे अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान.
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Updated: August 9, 2019, 5:55 AM IST
जम्मू-कश्मीर (jammu and kashmir) पर भारत ने अपना रुख साफ करते हुए इसे आंतरिक मामला बताया है, लेकिन ये बात पाकिस्तान के गले नहीं उतर नहीं है. वह इसे द्विपक्षीय मामला (Bilateral Issue) साबित कर अपने पक्ष को मज़बूत करने में जुटा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने लिए साथ खोज रहा है. लेकिन सवाल ये है कि इस ​कवायद में पाकिस्तान के हाथ क्या लग रहा है? आइए जानें कि कश्मीर राज्य से आर्टिकल 370 (Article 370) खत्म करने के मामले में भारत पर दबाव बनाने के लिए कौन पाकिस्तान का साथ दे सकता है और कौन हाथ खींच रहा है.

पढ़ें : कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने गुहार लगाई तो क्या कहेगा UN?

कश्मीर मामले में भारत के कदम के बाद पाकिस्तान ने बौखलाहट दिखाते हुए ​कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों (Diplomatic & Trade Relations) को स्थगित करने की धमकी दी है और ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार पाकिस्तान में समझौता एक्सप्रेस (Samjhauta Express) को रोक दिया गया. इन तमाम कदमों के साथ ही आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने स्थितियां ऐसी बन गई हैं कि वह क्या करे और क्या नहीं..! भारत पर दबाव बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान ने समर्थन जुटाने की कवायद शुरू की है. जानिए कि पाकिस्तान कहीं अलग-थलग तो नहीं पड़ रहा.

'आप क्या चाहते हैं? हमला?'

पाकिस्तान में सर्वदलीय बैठक हुई और वहां पता चला कि पाकिस्तान किस कदर लाचार महसूस कर रहा है. विपक्ष के नेता शाहबाज़ शरीफ़ ने जब पाकिस्तान के कदमों के बारे में प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) से जवाब चाहा तो इमरान ने कहा, 'आप मुझसे क्या चाहते हैं? भारत पर हमला कर दिया जाए?' इमरान के इस प्रतिप्रश्न का शरीफ़ के पास यही जवाब था कि पाकिस्तान कठिन समय में है और वह चाहता है कि प्रधानमंत्री एक ऐसा ज़बरदस्त भाषण दें जो 'देश को प्रेरित' कर सके. ये तो हुई बात कि पाकिस्तान किस कश्मकश से जूझ रहा है. पाकिस्तान के ही समाचार समूह द डॉन के हवाले से अब जानिए कि दुनिया उसके साथ कैसे पेश आ रही है.

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चीन ने किया भारत का विरोध, लेकिन...
आर्टिकल 370 खत्म कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में गठित कर देने के भारत के फैसले पर चीन ने सख्त बयान जारी किया, लेकिन पाकिस्तान के हाथ मायूसी ही लगी. असल में, चीन ने भारत के इस ​कदम का विरोध किया लेकिन लद्दाख के मुद्दे को केंद्र में रखा. चीन विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुवा चुनइंग ने कहा, 'भारत ने अपने घरेलू कानून में एकतरफा बदलाव कर चीन की सीमा की संप्रभुता को जोखिम में डालने का रवैया जारी रखा है'. चुनइंग ने भारत के इस कदम को अवैधानिक भी कहा. लेकिन पाकिस्तान को मायूसी क्यों हुई?

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि चीन उसके पक्ष में बात करेगा, लेकिन चीन ने इस बयान में कश्मीर के मुद्दे को लेकर कहा कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर संयम और विवेक से काम लें और तनाव न बढ़े इसलिए एकतरफा बदलावों वाले कदम उठाने से बचें.

यूएई ने दिखाया पाक को ठेंगा
गल्फ न्यूज़ ने यूएई के राजदूत के हवाले से लिखा है कि यूएई ने एक तरह से भारत के कदम का समर्थन किया है. रिपोर्ट में लिखा गया है, 'राज्य का पुनर्गठन आज़ाद भारत के इतिहास में कोई नायाब घटना नहीं है और राजदूत ने माना है कि इसका प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय समस्याओं को खत्म कर वहां बेहतर स्थितियां बनाना ही है. उन्होंने ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य से जुड़ा भारत का हालिया फैसला भारत का अंदरूनी मामला है क्योंकि यह उसके संविधान से जुड़ा है'.

क्या तुर्की ने दिया पाक को समर्थन?
तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन के संचार विभाग ने एक बयान जारी करते हुए कहा, 'एर्डोगन ने पाकिस्तान और भारत से संवाद प्रक्रिया को मज़बूत करने को कहा. एर्डोगन ने कश्मीर के हालात पर चिंता ज़ाहिर करते हुए इमरान खान को भरोसा दिलाया कि तुर्की पाकिस्तान के रुख का समर्थन करता है'. लेकिन, पाकिस्तानी समाचार पोर्टल डॉन का कहना है कि तुर्की के समर्थन का कोई संकेत तो मिलता नहीं दिखा. इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है कि भारत के साथ तुर्की अपने कूटनीतिक व व्यापारिक संबंध वैसे ही बनाए रखेगा या नहीं.

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अमेरिका का फोकस तो अलग है ही
कश्मीर को लेकर भारत के साथ उलझे पाकिस्तान की गुहार सुनते हुए अमेरिका ने साफ कह दिया है कि उसकी प्राथमिकता अभी अफगानिस्तान में शांति बहाली को लेकर है. अमेरिका ने इस मामले में केवल संवाद और संयम बनाए रखने की नसीहत देकर कुल मिलाकर पाकिस्तान को सिवाय ठेंगा दिखाने के और कुछ नहीं किया है. उधर, सऊदी अरब के साथ पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने एक से ज़्यादा बार फोन पर बात की लेकिन, सऊदी के क्राउन प्रिंस ने भी कोई भरोसा या दिलासा पा​किस्तान को दिया है, ऐसी खबर नहीं है.

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर द डॉन ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व का मज़ाक बनाते हुए ये कमेंट भी किया, 'कश्मीर के स्टैंड पर पाकिस्तान को मिलने वाले समर्थन पर बादल छाए हैं. और ऐसे समय में जब कश्मीर के लोगों को हमारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, तब हमारे पीएम कह रहे हैं : आप क्या चाहते हैं कि मैं क्या करूं?'

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First published: August 9, 2019, 5:46 AM IST
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