कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने गुहार लगाई तो क्या कहेगा UN?

जम्मू-कश्मीर (jammu and kashmir) राज्य के विशेष दर्जे को खत्म कर दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत (India) के कदम के बाद पाकिस्तान (Pakistan) के पास क्या विकल्प बचे हैं कि वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत पर दबाव बना सके?

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 7:10 PM IST
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने गुहार लगाई तो क्या कहेगा UN?
न्यूज़18 क्रिएटिव
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Updated: August 8, 2019, 7:10 PM IST
जम्मू-कश्मीर (jammu and kashmir) को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधानों को खत्म कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट देने के फैसले को भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना अंदरूनी मामला बताया है, लेकिन पाकिस्तान इसे द्विपक्षीय मामला साबित कर अपने पक्ष को मज़बूत करने की कवायद कर रहा है. अलबत्ता इस ​कवायद में पाकिस्तान के हाथ कुछ नहीं आ रहा है क्योंकि पाकिस्तान के पास सबसे बड़ा विकल्प यही है कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में उसे साथ मिले, लेकिन यूएन से पाकिस्तान को कितनी मदद मिल सकती है? इस सवाल का जवाब जानिए.

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कश्मीर को लेकर भारत के कदम ने पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा पाकिस्तान को चौंका दिया है और पाकिस्तान बौखला उठा है. पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों (Global Forums) पर दावा कर रहा है कि भारत ने एक द्विपक्षीय मामले (Bilateral Issue) में एकतरफा फैसला लिया है, लेकिन पाकिस्तान के ताज़ा हालात ऐसे हैं कि उसकी आवाज़ कौन कितनी सुनेगा, ये पाकिस्तान को खुद भी नहीं पता.

पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया समूह द डॉन ने एक लेख में पाकिस्तान की उस पूरी कवायद के ​बारे में चिंतन प्रस्तुत किया है, जिसके तहत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान अपने पक्ष में दुनिया का साथ जुटाने की कोशिश कर रहा है. जानिए कि पाकिस्तान के पास क्या विकल्प हैं और यूएन का रुख क्या हो सकता है.

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पाकिस्तान के ताज़ा कदम बेअसर
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पाकिस्तान की सुरक्षा परिषद ने शीर्ष बैठक के बाद भारत के साथ असहयोग की ​नीति पर ज़ोर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को निलंबित करने की धमकी दी, लेकिन पाकिस्तान का यह दांव इसलिए बेअसर रहा क्योंकि इससे भारत को कोई फर्क नहीं पड़ा, जबकि पाकिस्तान में आर्थिक संकट है तो ऐसे में इस तरह के कदम से भारत को कोई खास नुकसान नहीं होगा बल्कि पाकिस्तान को खमियाज़ा भुगतना पड़ेगा.

अब है संयुक्त राष्ट्र का विकल्प
हर मोर्चे पर विफल साबित हो रहे पाकिस्तान के पास अब सबसे बड़ा विकल्प यही बचा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की शरण में जाए. ऐसा हुआ भी तो पाकिस्तान यूएन की सुरक्षा परिषद में ही गुहार लगा सकता है. लेकिन किस तरह की गुहार? द डॉन ने ये सवाल भी उठाया है कि अगर पाकिस्तान ने ये कदम उठाया भी तो कितने देश उसका साथ देकर भारत के प्रधानमंत्री मोदी पर अपना कदम वापस लेने का दबाव बना सकेंगे.

सुरक्षा परिषद में पाक का मुद्दा क्या होगा?
अब अगर पाकिस्तान कश्मीर की सुरक्षा को लेकर यूएन की सुरक्षा परिषद में गया तो वह भारतीय कश्मीर में कथित रूप से मानवाधिकारों के लगातार हो रहे हनन को मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा. इसके समर्थन में वह यूएन के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की रिपोर्ट्स को ही आधार बना सकता है, जो मानती हैं कि भारतीय कश्मीर में मानवाधिकार हनन, गैरकानूनी हत्याओं, जबरन प्रताड़नाओं व लोगों के गायब होने का सिलसिला जारी है.

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तो पाक को क्या मिलेगा जवाब?
यूएन की सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की गुहार का मतलब ये होगा कि मुद्दा मानवाधिकारों के हनन का बनकर रह जाएगा. पाकिस्तान बहुत उम्मीद करे तो भी ज़्यादा से ज़्यादा यही हो सकता है कि यूएन के कहने पर भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से माफी मांगी जाए. द डॉन के लेख के मुताबिक पाकिस्तान की सुनवाई करते हुए यूएन का जवाब सिवाय एक वाक्य के कुछ और नहीं होगा - 'हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं'.

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First published: August 8, 2019, 7:08 PM IST
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