1918 की महामारी के दौरान क्यों और कैसे हुआ था मास्क पहनने का विरोध?

1918 की महामारी के दौरान क्यों और कैसे हुआ था मास्क पहनने का विरोध?
1918 में महामारी के दौरान सैनफ्रांसिस्को में एक अदालत की सुनवाई खुले में होने की यह तस्वीर वॉशिंगटन पोस्ट से साभार.

1918 और 1919 के बीच जब पहला विश्वयुद्ध (World War) जारी था, तब अमेरिका (USA) में युद्ध स्तर पर कैसे महामारी से भी लड़ने की चुनौती थी? यह भी जानें कि एशियन फ्लू (Asian Flu) के दौरान मास्क पहनने संबंधी नियम (Mask Enforcement) कैसे बने थे और कैसे इनका विरोध हुआ था, यहां तक कि मास्क न पहनने पर गोली मारे जाने तक बात कैसे पहुंच गई थी.

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इतिहास (History) के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि दुनिया भर में करीब 5 करोड़ और अमेरिका (America) में ही 6 लाख 75 हज़ार के करीब जानें लेने वाली इन्फ्लुएंज़ा महामारी (Influenza) के वक्त कैसे नियम बन रहे थे और कैसे तोड़े जा रहे थे. स्थानीय प्रशासनों ने संक्रमण (Infection) रोकने के लिए कई तरह की गाइडलाइंस (Guidelines) जारी की थीं. मसलन स्कूल बंदी, सार्वजनिक मनोरंजन प्रतिबंध, 'थूकना मना' नियम, रूमाल या टिशू का इस्तेमाल करने की हिदायत और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने (Wear Face Mask) जैसे नियम आदि.

एशियन फ्लू के दौर में मास्क पहनने संबंधी जो विधान था, वह मुख्य रूप से अमेरिका के पश्चिमी राज्यों में दिखा था और लोग इसका पालन करते भी दिखे थे. चूंकि युद्ध का समय था इसलिए इन नए स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन करना देशभक्ति जैसा भी प्रचारित किया गया था. देशभक्ति की भावना के तहत सैनफ्रांसिस्को, सिएटल, डेनवर और फीनिक्स जैसे स्थानों पर मास्क के नियम का पालन कर रहे लोगों को हालांकि ये शिकायतें थीं कि मास्क आरामदेह, असरदार नहीं हैं और व्यवसाय के लिए भी खराब हैं.

कैसे शुरू हुआ विरोध?
मास्क को लेकर कई तरह की शिकायतें तो थी हीं, फिर कुछ अधिकारी तक बगैर मास्क के सार्वजनिक तौर पर देखे गए. युद्ध का समय खत्म हुआ और सैनिकों की सुरक्षा के लिए मास्क पहनने की ज़रूरत अब लोग महसूस नहीं कर रहे थे. ऐसे समय में सैनफ्रांसिस्को में कुछ विरोधियों ने 'एंटी मास्क लीग' बनाकर इसका ज़बरदस्त विरोध शुरू किया.
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1918 के दौरान मास्क पहनने के बारे में इस तरह की गाइडलाइंस के ज़रिए लोगों को जागरूक किया जाता था.




जालीदार कपड़े के मास्क का मज़ाक
कोरोना वायरस के समय में हमारे आपके पास एन95 जैसे बेहतर ढंग से फेस मास्क का विकल्प है, लेकिन तब 1918 में ऐसी सुविधाएं नहीं थीं. सर्जिकल मास्क जालीदार कपड़े के बनाए जाते थे इसलिए जन सुरक्षा के लिए भी वही जालीदार मास्क बनाए गए, जो निर्देशों के साथ रे​डक्रॉस कार्यकर्ताओं ने लोगों को बांटे थे. लेकिन, क्वालिटी के लिहाज़ से सबको ये मास्क ठीक नहीं लग रहे थे.

एक तरफ, डॉक्टरों के बीच यह विचार चल रहा था कि जालीदार कपड़े की कई तहों से मास्क तैयार किए जाएं तो प्रभावी होंगे या नहीं, तो दूसरी तरफ मास्क से जुड़े तरह तरह के फैशन की खबरें छप रही थीं. वहीं कुछ लोग मास्क के जालीदार होने के कारण छेदों में उंगलियां डालकर तस्वीरें खिंचवा रहे थे और मास्क का मज़ाक बना रहे थे.


विज्ञान से ज़्यादा कम्फर्ट की दलील
हालांकि कम लोग ​बगैर मास्क पहने सार्वजनिक स्थानों पर दिख रहे थे, लेकिन उस समय की रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने इसके ​पीछे कोई विज्ञान संबंधी दलील के बजाय निजी कम्फर्ट न होने की दलील ज़्यादा दी थी. अमेरिकन पैनडैमिक किताब की लेखक नैंसी ब्रिस्टॉ के मुताबिक उस वक्त लोग मास्क पहनना नहीं चाह रहे थे क्योंकि उन्हें पहनने से गर्मी और घुटन महसूस होती थी.

कानून का पालन करवाना था टेढ़ी खीर
विशेषज्ञ यह भी कह चुके थे कि अगर आप कई तरह की सावधानियां नहीं बरतते हैं तो सिर्फ मास्क पहनना संक्रमण से बचने का इकलौता तरीका नहीं है. इन हालात में, 1918 के अंत में जिन शहरों में कम लोग ही सही, लेकिन जो मास्क का विरोध कर रहे थे, उनसे कानून का पालन करवाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो रहा था.

प्रावधान किए गए कि विरोधियों को जेल की सज़ा दी जाएगी और उनका नाम अखबार में छपवाया जाएगा. यहां तक कि विरोध से तंग सैनफ्रांसिस्को में एक विशेष स्वास्थ्य अधिकारी ने मास्क न पहनने पर एक आदमी और उसके साथ खड़े दो अन्य को गोली मार दी थी.

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1918 के दौरान एंटी मास्क लीग की मीटिंग को लेकर छपी सूचना.


जब 'आला अफसरान' बगैर मास्क के दिखे!
सैनफ्रांसिस्को में नियमों का मखौल तब जमकर उड़ा जब एक बॉक्सिंग मैच के दौरान एक फोटोग्राफर ने कई सुपरवाइज़रों, एक कांग्रेस सदस्य, एक न्यायाधीश, नेवी के एक रियर एडमिरल, शहर के स्वास्थ्य अधिकारी और यहां तक कि मेयर की वो तस्वीरें खींचीं, जिनमें ये सब बगैर मास्क के नज़र आ रहे थे. स्वास्थ्य अधिकारी ने 5 और मेयर ने 50 डॉलर का फाइन भी भरा लेकिन ज़ाहिर है किसी को भी जेल तो नहीं जाना पड़ा, गोली तो दूर की बात थी ही.

इसके बाद क्या हुआ? हिस्ट्री.कॉम के लेख पर आधारित रिपोर्ट के आखिर में आपको यह भी बता दें कि 1918-19 में मास्क पहनना कितना कारगर सिद्ध हुआ, इस बारे में पुख्ता तौर पर जानकारी इतिहासकारों को भी नहीं है. लेकिन यह ज़रूर है कि जिन जगहों पर स्वास्थ्य को लेकर और सख्त और बेहतर कदम उठाए गए थे, वहां महामारी का संकट कम हुआ था.

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