भारत चीन युद्ध हुआ तो तटस्थ रहेगा रशिया? हां, तो क्यों?

भारत चीन युद्ध हुआ तो तटस्थ रहेगा रशिया? हां, तो क्यों?
एशिया की ताकतें : भारत के पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. फाइल फोटो.

ऐतिहासिक आधारों पर समझ कहती है कि Russia ने ज़रूरत पड़ने पर India की मदद की है और वह करेगा. लेकिन यह बात कहां तक सही है? इसके साथ ही ये भी समझना चाहिए कि Covid-19 के प्रकोप और चीन के साथ लद्दाख सीमा पर तनाव (Ladakh Face-Off) की स्थिति के बावजूद Rajnath Singh ने रूस का दौरा आखिर क्यों किया...

  • Share this:
Galwan Valley Stand-Off के बाद से भारत और चीन के बीच सीमाओं पर बढ़े तनाव (India-China Tension) के बीच, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के कूटनीतिक दौरे पर पहुंचे. ज़ाहिर है यह दौरा चीन के साथ बढ़ रहे तनाव के बीच पुराने दोस्त रहे रूस से मदद जुटाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. हालांकि रूस ने कहा है कि भारत और चीन के बीच जारी विवाद (India China Dispute) में वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहता. लेकिन विवाद के बाद, युद्ध की स्थिति में रूस किसके पक्ष में फैसला ले सकता है? यह बड़ा सवाल बना हुआ है.

भारत रूस संबंधों की समझ क्या है?
चूंकि दोनों देश पुराने दोस्त रहे हैं, इसलिए ऐसा समझा जाता है कि ऐतिहासिक संबंधों के आधार पर यही होगा कि भारत किसी देश के साथ संघर्ष में उलझा तो रूस मदद करेगा. लेकिन इस तरह की समझ अधूरी है. 2017 में डोकलाम विवाद के समय रूस ने तटस्थता की नीति अपनाई. इससे पहले 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में तो भारत का साथ रूस ने दिया लेकिन चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में नहीं.

india russia relations, india china border tension, india china border dispute, china russia relations, rajnath singh russia visit, भारत रूस संबंध, भारत चीन सीमा तनाव, भारत चीन सीमा विवाद, चीन रूस संबंध, राजनाथ सिंह रूस दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूसी राष्ट्रपति पुतिन. फाइल फोटो.

भारत के लिए क्यों अहम है रूस का साथ?


चीन के खिलाफ युद्ध की स्थिति में रूस का साथ भारत के लिए काफी अहम सिद्ध होगा क्योंकि दोनों देश रक्षा के क्षेत्र में सबसे ज़्यादा दोस्ताना रहे हैं. भारत कई तरह की सैन्य शक्तियों के लिए रूस पर निर्भर करता है. केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह का यह दौरा भी कोविड 19 के दौर के बीच इसलिए भी हुआ है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण रक्षा सौदों की आपूर्ति में हो रही देर को लेकर चर्चा की जाए.



ये भी पढ़ें :- नेपाल में अचानक क्यों बहुत बढ़ गई है चीनियों की आवाजाही?

दूसरी तरफ, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो चीन के कठोर रवैये को सुलझाने में रशिया मददगार साबित हो सकता है. इसके लिए रूस को तैयार करने की कोशिश भारत को हर संभव तरीके से करना भी होगी.

चीन और रूस भी हैं गहरे दोस्त
रूस के लिए बात केवल भारत का साथ देने भर की नहीं है बल्कि विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और रूस के दोस्ताना संबंध पिछले कुछ समय में काफी गहरे हुए हैं. विशेषज्ञों के हवाले से यूरेशियन टाइम्स ने लिखा है कि चीन के खिलाफ जाना रूस के लिए इस समय में बेहद कठिन कदम होगा. क्यों? इसके कारण जानने लायक हैं.

india russia relations, india china border tension, india china border dispute, china russia relations, rajnath singh russia visit, भारत रूस संबंध, भारत चीन सीमा तनाव, भारत चीन सीमा विवाद, चीन रूस संबंध, राजनाथ सिंह रूस दौरा
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ रूसी राष्ट्रपति पुतिन. फाइल फोटो.


रूस की स्थितियां अब अनुकूल नहीं!
पाकिस्तान से भी कम आबादी वाले रूस के पास अथाह ज़मीन है. यानी यूरोप से एशिया तक फैला यह देश अपनी रक्षा खुद कैसे करता है, यह सोचना चाहिए. खास तौर से अमेरिकी खतरे से जूझकर अपनी सुरक्षा के लिए रूस पूरी तरह तकनीक पर निर्भर है और इसमें उसका बड़ा साथी चीन है. दूसरी तरफ, बेवजह किसी एक का भी साथ देकर रूस पड़ोसियों के साथ किसी संघर्ष में उलझने का रास्ता चुने, इसकी वजहें कम ही हैं.

ये भी पढें:-

पड़ोसियों के साथ सीमाओं पर उलझा चीन, भारत के दुश्मन नंबर 1 पर मेहरबान क्यों?

जानिए नेपाल में किस तरह सक्रिय है हिंदू स्वयंसेवक संघ

एक और विशेषज्ञ के हवाले से यूटी की रिपोर्ट कहती है कि रूस अब कमज़ोर शक्ति है. आर्थिक रूप से उसकी हालत खराब है. इन हालात में उसे निकटवर्ती पड़ोसी चीन की मदद की काफी ज़रूरत है. चीन और भारत के बीच युद्ध की स्थिति भी बनी तो रूस न तो भारत और न ही चीन की मदद आंख मूंदकर कर सकता है क्योंकि भारत का साथ देने वालों में अब तक अमेरिका का नाम महत्वपूर्ण है और रूस इस समय अमेरिका से सीधे टकराने के हाल में नहीं है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज