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किन-किन देशों में खुल चुके हैं स्कूल और कैसा है हाल?

किन-किन देशों में खुल चुके हैं स्कूल और कैसा है हाल?

वुहान से लेकर लंदन तक स्कूल फिर खुल रहे हैं.

वुहान से लेकर लंदन तक स्कूल फिर खुल रहे हैं.

लॉकडाउन (Lockdown) के बाद कोरोना के बढ़ते केसों (Coronavirus Cases) के बीच, भारत में स्कूल दोबारा खोले जाने को लेकर विचार जारी है. Unlock-4 के चलते इस महीने से बड़ी क्लासों के लिए स्कूल खुलने की बात (Schools Reopening in India) कही जा रही है. जानिए दुनिया में कहां स्कूल खुल चुके हैं और किस तरह की व्यवस्थाओं के साथ और कहां जोखिम बना हुआ है.

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  • News18India
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    दुनिया भर में कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रकोप के बीच कई महीनों के बाद बच्चों को स्कूल फिर (Schools Reopening Worldwide) बुलाया जाने लगा है. चीन की बात हो या यूरोप की या फिर खाड़ी देशों की, पिछले हफ्ते से दुनिया भर में कई जगहों पर स्कूल खुलने शुरू हुए हैं और करीब 9 लाख लेने वाली महामारी Covid-19 के दौरान ज़्यादातर जगह स्कूलों का खुलना जोखिम भरा माना जा रहा है. लेकिन, अर्थव्यवस्था (Economy) और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ ही जीवन को वापस पटरी पर लाने के मकसद से कई देश इस तरह का ​जोखिम ले रहे हैं.

    पौने तीन करोड़ कुल कन्फर्म केसों वाली दुनिया में स्कूलों का खुलना बड़ी घटना है, खासकर उन हिस्सों में जो वैश्विक महामारी के हॉटस्पॉट रह चुके हैं. हालांकि, स्कूलों में मास्क पहनने, हाथ धोने, बॉडी टेंप्रेचर चेक करने और सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बच्चों की बैठक व्यवस्था सुरक्षित दूरी पर करने जैसे कदम ज़रूर उठाए जा रहे हैं. देखिए कि कैसे दुनिया भर में स्कूल खोलने की व्यवस्था हो रही है.

    वुहान में 3000 स्कूलों का खुलना
    चीन के मीडिया में पिछले हफ्ते ये खबरें छपीं कि महामारी शुरू होने का केंद्र जो शहर बना, वहां 2840 से ज़्यादा प्राइमरी और सेकंडरी स्कूल खोले गए. तकरीबन 14 लाख स्टूडेंट्स को स्कूलों में बुलाया गया और उनके टेंप्रेचर चेक करने के साथ ही हैंड वॉश तकनीकों का इंतज़ाम किया गया. ध्यान रखने की बात यह है कि वुहान में जनवरी व फरवरी में स्कूल खुले रखने का खमियाज़ा पहले ही भुगता जा चुका है.

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    यूरोप के कई देशों में जोखिम के बावजूद स्कूल ​रीओपन हुए.


    अब, लंबे इंतज़ार के बाद चीन में स्कूल खोले जाने का सिलसिला शुरू हुआ है. इससे पहले, व्यक्तिगत कक्षाओं के तहत स्टूडेंट्स की पढ़ाई के इंतज़ाम किए गए थे.

    'स्कूल दोबारा खोलना नैतिक ज़िम्मेदारी'
    कोरोना वायरस की चपेट में जो शीर्ष नेता आए, उस लिस्ट में शुरूआत में ही शामिल होने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि स्कूल दोबारा खोलने ही चाहिए. यहां ध्यान रखने की बात यह है कि यूरोप में जिस देश में कोरोना ने सबसे ज़्यादा जानें लीं, वो ब्रिटेन ही रहा. अब ब्रिटेन में खुल रहे स्कूलों में ऐसा कोई देशव्यापी नियम नहीं है कि फेसमास्क पहनना ज़रूरी ही हो. सरकार ने इस नियम के बारे में स्कूलों को ही कमान सौंप दी है.

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    यूरोप में इस तरह खुले स्कूल
    5 साल या उससे ज़्यादा उम्र वाले बच्चों के लिए बेल्जियम में दोबारा स्कूल खुले. यहां हाई रिस्क इलाकों के बच्चों को स्कूल न आने की हिदायत है और बड़ी क्लास के छात्रों के लिए मास्क अनिवार्य है. इससे पहले, फ्रांस में जून में करीब सवा करोड़ बच्चों को स्कूल वापस बुलाया गया था, तब कोरोना केस और तेज़ी से फैले थे. फिर जहां प्रकोप ज़्यादा दिखा, वहां स्कूल फिर बंद किए गए. अब यहां 11 साल से बड़े बच्चों और तमाम टीचरों के लिए मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है.

    तीन यूरोपीय देशों ने ऐसे किए इंतज़ाम
    नॉर्वे यूरोप का पहला देश बना, जिसने अप्रैल से ही सिलसिलेवार ढंग से स्कूल खोलने शुरू कर दिए थे. यहां सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य रही. मई में नॉर्वे ने 'ट्रैफिक लाइट' मॉडल के तहत स्कूलों को गाइडलाइन दी कि किस तरह संक्रमण से बचाव के तरीके अपनाए जाएं. यही नहीं, जर्मनी की तरह नॉर्वे ने 'कोहोर्ट' मॉडल भी अपनाया, जिसमें सामूहिक गतिविधियों को सीमित करने के बारे में दिशानिर्देश थे. नॉर्वे में हालांकि संक्रमण के केस बड़ी उम्र के स्टूडेंट्स में दिखे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान न होने की खबरें रहीं.

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    भारत में सितंबर के महीने में स्कूल फिर खुलने जा रहे हैं.


    कोविड 19 और लॉकडाउन के चलते बीते 7 अगस्त को पहली बार जर्मनी में डेढ़ लाख से ज़्यादा बच्चे वापस स्कूलों में पहुंचे थे. यहां स्कूलों में खयाल रखा गया कि बच्चों के छोटे छोटे समूह बनाए गए और टीचरों को उनका गाइड नियुक्त किया गया. इन समूहों में भी तय किया गया कि स्टूडेंट्स मास्क पहने रहें और हाथ मिलाने से परहेज़ कर नियमित समय पर हाथ धोते रहें. सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से कक्षाओं में बेहतर वेंटिलेशन और बैठक व्यवस्था की गई.

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    स्कॉटलैंड में जर्मनी की तरह वेंटिलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के कायदे तो अपनाए गए लेकिन छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य नहीं रखी गई. पिछले करीब 3 हफ्ते पहले से स्कूल खुल जाने के बाद अब तक स्कॉटलैंड से किसी खास संक्रमण की खबरें नहीं हैं, लेकिन स्कूल खोलना चुनौतीपूर्ण ज़रूर है. बड़ी चुनौती यह है कि यहां मौसम के चलते कई बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण दिखे, लेकिन कोरोना पॉज़िटिव केस न के बराबर रहे. यहां टेस्टिंग सिस्टम के ​काफी चुनौती खड़ी हुई.

    इज़रायल में खतरा, रूस में मास्क अनिवार्य नहीं!
    स्कूल और कॉलेज खोलने के मुद्दे पर इज़रायल सरकार के खिलाफ भारी प्रदर्शन किए जा चुके थे क्योंकि मई में सकूल खोल दिए जाने से संक्रमण तेज़ी से फैला था. इस महीने से 20 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स के लिए फिर स्कूल खोले गए. दूसरी तरफ, दुनिया में कोरोना से चौथे सबसे ज़्यादा प्रभावित देश रूस में कुछ सावधानियों की हिदायतों के साथ स्कूल खोले गए, लेकिन यहां मास्क की अनिवार्यता नहीं है.

    भारत में अनलॉक के चरण के तहत आगामी 21 सितंबर से कक्षा 9वीं से 11वीं तक के स्कूलों को खोलने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. वहीं, अमेरिका में फिलहाल रिमोट लर्निंग पर ही ज़ोर दिया जा रहा है. इससे पहले न्यूयॉर्क कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोला जाना महंगा पड़ चुका है. अमेरिका के अलावा, भारत और कुछ और दक्षिण एशियाई देश, जो इस समय संक्रमणों की तेज़ रफ्तार से दो-चार हैं, वहां स्कूलों का खुलना फिलहाल या तो असमंजस में है या बेहद जोखिम की सूरत है.undefined

    Tags: Corona virus update, Coronavirus school opening, Covid-19 Update, Students

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