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जानें कोरोना वायरस को सिंगापुर ने कैसे किया काबू और कहां से फैलना शुरू हुआ संक्रमण

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 2:44 PM IST
जानें कोरोना वायरस को सिंगापुर ने कैसे किया काबू और कहां से फैलना शुरू हुआ संक्रमण
चीन के बाद सबसे पहले सिंगापुर में कोरोना वायरस फैला. इसके बाद भी सिंगापुर ने लॉकडाउन किए बिना ही संक्रमण को फैलने से रोक लिया.

सिंगापुर (Singapore) सरकार ने कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों और संदिग्‍धों का पता लगाने के लिए जासूसों की मदद ली. इसके बाद संक्रमितों और इनके करीबियों की पहचान कर अलग-थलग कर दिया गया. अब तक 6,000 से ज्‍यादा लोगों का पता लगाया जा चुका है, जो संक्रमितों के संपर्क में आए थे. इसके लिए पुलिस की मदद भी ली गई.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 2:44 PM IST
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चीन से बाहर निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) ने सबसे पहले सिंगापुर (Singapore) में संक्रमण फैलाया था. इसके बाद भी अब तक वहां सिर्फ 509 लोग ही संक्रमित हुए हैं, जिनमें 2 लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका (US), ब्रिटेन (Britain), इटली (Italy), स्‍पेन, ईरान, भारत (India) और पाकिस्‍तान (Pakistan) जैसे तमाम देश सिंगापुर के बहुत बाद कोरोना वायरस का शिकार हुए. फिर भी इन देशों में संक्रमित लोगों की तादाद में तेजी से वृद्धि हुई. साथ ही संक्रमण से मरने वालों की संख्‍या पर भी अंकुश नहीं लगाया जा सका. ऐसे में दुनिया भर के देश सिंगापुर के उन उपायों के बारे में जानना चाहते हैं, जिनसे उसने संक्रमण पर काबू किया.

सिंगापुर में चीनी दवाइयों की दुकान से फैलना शुरू हुआ संक्रमण
जनवरी के मध्य में चीनी नए साल पर चीन (China) के शहर गुआंगशी से 20 पर्यटक सिंगापुर आए थे. इस दौरान वे चीनी दवाइयां बेचने वाली दुकान पर भी गए. ये दुकान चीन पर्यटकों के बीच खासी लोकप्रिय है. इस दुकान पर मगरमच्छ का तेल और हर्बल उत्‍पाद बेचे जाते हैं. दवाइयों की दुकान पर काम करने वाली महिला ने पर्यटकों को प्रोडक्‍ट्स दिखाए. उसने दवा वाले तेल से उनके हाथों पर मसाज भी की. इसके बाद चीनी पर्यटकों का ये दल स्वदेश लौट गया. इसके बाद 23 जनवरी को सिंगापुर में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया. सबसे पहले इसका शिकार चीनी दवाइयों की यही दुकान बनी. शुरुआती मामलों में एक स्थानीय टूर गाइड और दवा की दुकान में काम करने वाली महिला बीमार पड़ गए.

4 फरवरी को कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की सरकार ने कर दी घोषणा



चीनी यात्रियों की शॉपिंग ट्रिप से 9 लोग संक्रमित हुए. इनमें दवाइयों की दुकान चलाने वाली महिला के पति, उसका छह महीने का बच्चा और उसका इंडोनेशियाई नौकर शामिल थे. स्टाफ के दो अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में आ गए. इसके बाद कुछ ही दिन में संक्रमण के 18 मामले सामने आए. सिंगापुर की सरकार ने 4 फरवरी को कह दिया कि वायरस स्थानीय समुदाय (Community Transmission) में फैल चुका है. सिंगापुर में 23 मार्च तक 509 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 2 की मौत हो चुकी है. हालात बहुत खराब हो सकते थे, अगर सिंगापुर की सरकार ने संक्रमित लोगों के साथ ही उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में देरी कर दी होती. अब तक संक्रमितों के संपर्क में आए 6,000 लोगों का पता लगाया जा चुका है. इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, पुलिस जांच और जासूसों की मदद ली गई.

सिंगापुर सरकार ने 23 जनवरी को कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने बाद 4 फरवरी को ही संक्रमण के कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की घोेषणा की दी थी. सिंगापुर ने किसी भी महामारी को फैलने से रोकने कह तैयारी पहले से ही की हुई थी.


सार्स से सबक ले चुके सिंगापुर ने पहले ही कर रखी थी तैयारी
सिंगापुर को 2002-03 की सार्स (SARS) त्रासदी में पता चल गया था कि उसका बुनियादी ढांचा महामारी वाले प्रकोप के लिए तैयार नहीं है. इसलिए इसके बाद उसने कई आइसोलेशन सेंटर वाले अस्पताल बना लिए थे. साथ ही ऐसे हालात से निपटने के लिए विशेष कानून भी बना लिया था. इस बार सिंगापुर ने रोगियों को समुदाय में वापस नहीं लौटने दिया. चीन (China) ने भी संक्रमण पर काबू पाने के लिए यही काम किया था. सिंगापुर में भी संक्रमितों को समाज से काटकर वायरस से मुक्त होने तक कड़ी निगरानी में रखा गया. माइल्‍ड केसेस में भी मरीजों को अस्पतालों में ही रखा जा रहा है. पहले से की गई तैयारी के कारण पॉजिटिव मरीजों को एकसाथ रखने की पर्याप्त जगह मौजूद है. यदि किन्हीं लोगों में संक्रमण के लक्षण साफ नहीं दिखने पर भी संदिग्‍धों को होम क्वॉरंटीन में डाला गया. इसके लिए भी काफी सख्त नियम हैं. संदिग्‍ध व्‍यक्ति को दिन में दो बार एक एसएमएस मिलता रहा, जिस पर उसे क्लिक करना होगा. इससे पता चलता रहा कि वह व्‍यक्ति किस जगह पर है. नियमों का उल्‍लंघन करने वालों पर सख्‍त कार्रवाई की गई.

संक्रमण के मेडिकल टेस्‍ट के दायरे में लगातार की गई वृद्धि
सिंगापुर सरकार ने कार्टून के जरिये जन जागरूकता अभियान चलाया. इससे काफी लोग जुड़े और 10 लाख से भी ज्‍यादा बार देखा गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अब इनका कई अन्य भाषाओं में अनुवाद करवा रहा है. सिंगापुर में पहले सप्ताह केवल वुहान या हुबेई प्रांत के लोगों का परीक्षण किया. फिर पिछले 15 दिनों के भीतर चीन में रहे हर व्‍यक्ति की मेडिकल जांच कराई. जनवरी के आखिर तक सिंगापुर के सभी सार्वजनिक अस्पताल मेडिकल टेस्‍ट के लिए तैयार थे. इसके बाद स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाया गया. इसके बा सांस से संबंधी किसी भी बीमारी का इलाज करा चुके हर उस व्यक्ति का परीक्षण किया गया, जो किसी भी तरीके से कोविड-19 रोगी के संपर्क में आया था. इसके बादद अस्पताल के कर्मचारी को अगर थोड़ी भी ठंड लगी तो उसका टेस्ट कराया गया. मामूली लक्षण वाले कर्मचारियों को घर पर रहने की अनुमति दी गई. अस्थायी कर्मचारियों को आर्थिक मदद भी दी गई.

संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए सिंगापुर सरकार ने पुलिस, इंटेलिजेंस सर्विसेस और क्राइम इंवेि‍स्टिगेशन डिपार्टमेंट तक की मदद ली.


जासूसों की मदद से ढूंढे गए संक्रमितों के संपर्क में आए लोग
संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए सिंगापुर सरकार ने जासूसों की मदद ली. लोगों के पास अचानक एक फोन आता है और पूछा जाता है कि क्या आप किसी टैक्सी में बैठकर कहीं गए थे. लोगों के हां कहने पर उन्हें घर में ही रहने को कहा जाता है. अगले दिन स्वास्थ्य अधिकारी उनके घर पहुंच जाते हैं. फोन करने वाले सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के लोग होते हैं. तय वक्त तक क्वारंटाइन रहने के बाद अगर कोई लक्षण मिलता है तो मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है. लक्षण नहीं दिखने पर उन्हें सामान्य तौर पर रहने के लिए कह दिया जाता है. अस्‍पताल लाए जाने पर कॉन्टेक्ट ट्रेसर उनके संकर्प में आए लोगों के बारे में पूरी जानकारी लेते हैं. इसके बाद जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के स्टाफ को े दी जाती है. इसके बादद की जिम्‍मेदारी मंत्रालय के लोग संभालते हैं.

पुलिस और इंटेलिजेंस सर्विसेस ने भी कांट्रेक्‍ट ट्रेसिंग में की मदद
अगर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की टीम संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए लोगों तक नहीं पहुंच पाती है तो पुलिस का काम शुरू हो जाता है. पुलिस के औसतन 30 से 50 अधिकारी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के काम में लगे रहते हैं. कई बार 100 अधिकारियों को भी लगाना पड़ता है. इस समय कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग वहां की पुलिस के रोजमर्रा के कामों में प्रमुख काम है. जरूरत महसूस होने पर क्रिमिनल इंवेस्टिगेटिव डिपार्टमेंट, नार्कोटिक्स ब्यूरो और पुलिस इंटेलिजेंस सर्विसेस की भी मदद ली जा रही है. वे सीसीटीवी फुटेज, डाटा विजुअलाइजेशन और इंवेस्टिगेशन की मदद से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान करते हैं . इसमें भी अधिकारी ऐसे लोगों के बारे में पता लगाने की कोशिश करते हैं, जो संक्रमित के साथ 30 मिनट से ज्‍यादा देर तक रहे हों और उनसे 2 मीटर से कम दूरी पर रहकर बात की हो. पहला मामला सामने आने के पहले ही सिंगापुर सरकार की ओर से की गई कोशिशों की डब्‍ल्‍यूएचओ भी तारीफ कर चुका है.

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First published: March 24, 2020, 2:21 PM IST
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