आस्ट्रेलिया के पास बसे साउथ पैसिफिक के दर्जनों देश कैसे रहे कोरोनामुक्त?

आस्ट्रेलिया के पास बसे साउथ पैसिफिक के दर्जनों देश कैसे रहे कोरोनामुक्त?
ऑस्ट्रेलिया के पास बसे कई छोटे देशों में नहीं पहुंचा कोरोना वायरस. फाइल फोटो.

दक्षिण प्रशांत (South Pacific) समुद्र क्षेत्र में जो छोटे छोटे देश स्थित हैं, उनमें से कई अब तक कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण से मुक्त हैं तो बाकी ने कोविड 19 (Covid 19) के शुरूआती केसों के सामने आने के बाद महामारी पर काबू पा ​लिया है. पर्यटन (Tourism) पर आश्रित इन देशों की सरकारों ने शुरू में ही खतरा भांपते हुए सीमाएं सील कर दी थीं इसलिए यहां संक्रमण संकट नहीं बना.

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साउथ पैसिफिक के इन द्वीपों (Islands) की रणनीतिक (Diplomacy) स्थिति काफी उलझी हुई है. कुछ स्वतंत्र देश हैं तो कुछ स्वतंत्र होते हुए भी रक्षा और इमिग्रेशन जैसे मामलों में न्यूज़ीलैंड (New Zealand) व ऑस्ट्रेलिया (Australia) के साथ समझौते रखते हैं. कुछ द्वीप अन्य देशों की टेरिटरी हैं तो कुछ एसोसिएट राज्य भी. जानने लायक यह है कि इन द्वीपों ने खुद को महामारी (Covid 19 Pandemic) से कैसे बचाया और यह भी कि अगर नहीं बचाते तो कितने बुरे हालात होते.

फिजी ने पाया संक्रमण पर काबू
विदेशी यात्रियों के लिए बॉर्डर बंद करने के चार दिन बाद 19 मार्च को फिजी में कोरोना वायरस का पहला केस सामने आया था. यह ​पहला मरीज़ फिजी एयरवेज़ का फ्लाइट अटेंडैंट था और इसके संपर्क में आने वाले कुछ और लोग भी संक्रमित हुए. हालांकि अप्रैल के आखिरी हफ्ते से फिजी में कोविड 19 का कोई केस नहीं है.

समुद्र के रास्ते गुआम पहुंचा संक्रमण
दक्षिण प्रशांत में अमेरिकी टेरिटरी गुआम द्वीप में समुद्री जहाज़ों के ज़रिए संक्रमण ने पैर पसारे और मार्च के मध्य तक यहां 150 से ज़्यादा केस देखे गए थे. साथ ही, न्यू सैले​डोनिया में भी उसी वक्त ओवरसीज़ यात्रा के कारण पहला केस सामने आया था. यहां अब तक सभी 18 केस रिकवर हो चुके हैं जबकि गुआम के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक कुल 151 केसों में से 122 रिकवर हो चुके हैं और पांच मौतें हो चुकी हैं.



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गुआम में Corona Virus के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक कुल 151 केसों में से 122 रिकवर हो चुके हैं. फाइल फोटो.


क्यों इन द्वीपों पर था खतरा?
मार्च में जब अमेरिका व अन्य कई देशों ने पूरी तरह लॉकडाउन घोषित नहीं किया था, तब कई संपन्न अमेरिकियों ने महामारी से बचने के लिए न्यूज़ीलैंड जैसे कई द्वीपों में पनाह लेने के लिए भागने की कोशिशें की थीं. इन छोटे द्वीपों को जैसे ही भनक लगी कि महामारी कितना कहर ढा सकती है, इन्होंने फौरन यात्रा प्रतिबंध लगाए और कई मामलों में तो क्रूज़ और मालवाहक जहाज़ों तक के लिए मंज़ूरियां बंद कर दीं.

कहां नहीं पहुंचा संक्रमण?
दक्षिण प्रशांत स्थित सोलोमन आईलैंड, कुक आईलैंड्स, टोंगा, टुवालू, वनुआटु, द मार्शल आईलैंड्स, पलाउ और नाउरु जैसे द्वीपों में कोविड 19 का अब तक कोई केस दर्ज नहीं है. इससे पहले बीते 1 मई को न्यूज़ 18 ने एक रिपोर्ट में आपको बताया था कि दुनिया की किन जगहों पर कोरोना वायरस नहीं पहुंचा है. जानें कि इन छोटे द्वीपों में अगर महामारी फैलती तो कितनी भयानक तस्वीर होती.

स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र की हैं
पर्यटकों के बीच लोकप्रिय इन द्वीपों में देसी ग्रामीण आबादी रहती है. जनवरी में वायरस की मार की खबरें आने के बाद इन द्वीपों में से कई ने यात्रा प्रतिबंध जैसे कदम इसलिए उठाए क्योंकि अगर महामारी यहां फैलती तो बहुत बड़ा संकट खड़ा होता. इन छोटे द्वीपों में स्वास्थ्य का बहुत मामूली ढांचा है और इसी वजह से इन द्वीपों में टेस्टिंग तक की सुविधा न होने के कारण ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड नमूने भेजकर टेस्ट हो पा रहे हैं.

ताईवान ने भेजी मदद
फेस मास्क और थर्मल गन्स जैसे मेडिकल उपकरणों के तौर पर ताईवान ने टुवालू, नाउरु, मार्शल आईलैंड्स और पलाउ जैसे द्वीपों को मेडिकल मदद भेजी. हालांकि पिछले कुछ सालों से ताईवान के इन द्वीपों में प्रभुत्व को खत्म करने के लिए चीन आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर काफी कोशिशें कर रहा है.

क्यों संक्रमण होता बेहद खतरनाक : प्रशांत द्वीपों की आबादी में टाइप 2 डायबिटीज़ और हृदय रोगों की दर बेतहाशा है यानी यहां कोविड 19 फैलता तो संवेदनशील आबादी पर इसकी मार किस तरह पड़ती, इसका अंदाज़ा लगता है. शोधकर्ताओं ने माना है कि यहां संक्रमण आते ही कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका बेहद बढ़ती.


बेसिक सुविधाएं तक नहीं..!
इन कई द्वीपों में बड़ी आबादी के पास रनिंग वॉटर और साफ सफाई की बेसिक सुविधाएं तक नहीं हैं. अप्रैल में इस क्षेत्र में आए एक चक्रवाती तूफान के कारण भी बर्बादी हुई और फिजी, वनाउटु, सोलोमन आईलैंड और टोंगा जैसे द्वीपों के सैकड़ों लोग उजड़ गए. इन लोगों को अस्थायी शिविरों में शरण दी गई है लेकिन वहां भी पानी और साबुन जैसी बेसिक सुविधाएं न होने की खबरें हैं. ऐसे में इन द्वीपों में संक्रमण फैलता तो बेहद खराब हालात होते.

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प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन.


लॉकडाउन कितना झेल पाएंगे ये द्वीप?
रिपोर्टों की मानें तो इनमें से कई द्वीप पर्यटन पर मुख्यत: आश्रित हैं, कुछ की अर्थव्यवस्था में तो 50 फीसदी जीडीपी पर्यटन है. ऐसे में लंबा लॉकडाउन इन द्वीपों की आर्थिक सेहत निश्चित ही खराब कर देगा. पर्यटन के अलावा आयात और निर्यात इन द्वीपों का मुख्य स्रोत है और लॉकडाउन से यह भी प्रभावित है.

किसी तरह इन द्वीपों ने खुद को महामारी से बचाने में तो कामयाब हो गए हैं लेकिन साउथ पैसिफिक के द्वीपों में कोविड 19 संबंधी विस्तृत रिपोर्ट के आखिर में यह चिंता भी जताई गई है कि जैसे ही यहां की सीमाएं खुलेंगी, संक्रमण के लिए ये क्षेत्र संवेदनशील हो जाएंगे. इसकी बड़ी वजह कोरोना की चपेट में सबसे ज़्यादा आने वाले अमेरिका और यूरोप के वो संपन्न पर्यटक होंगे, जो कुदरत की गोद में बसे इन द्वीपों की तरफ भागे आएंगे.

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