क्या राज्य कर सकते हैं केंद्र के नए ट्रैफिक एक्ट में फेरबदल?

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 8:10 PM IST
क्या राज्य कर सकते हैं केंद्र के नए ट्रैफिक एक्ट में फेरबदल?
न्यूज़18 क्रिएटिव.

गुजरात (Gujarat) के बाद राजस्थान (Rajasthan) और दिल्ली (Delhi) भी ट्रैफिक नियम संबंधी (Traffic Rules) जुर्माने घटाने की तैयारी में हैं. सवाल ये है कि आखिर केंद्र सरकार के बनाए कानून में राज्य कैसे फेरबदल कर सकते हैं?

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नए मोटर व्हीकल एक्ट (New Motor Vehicle Act) को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच घमासान लगातार बना है. ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने (Penalty) की रकम मंगलवार को गुजरात ने घटा दी और आज बुधवार को ऐसी खबर है कि राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने जुर्माने की रकम गुजरात से भी कम कर देने की घोषणा की है. इसके अलावा और भी राज्य हैं, जो केंद्र के इस एक्ट पर अपना असंतोष दर्ज करा चुके हैं. अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या केंद्र (Union) के बनाए किसी नियम या कानून में क्या राज्य फेरबदल या उसे खारिज कर सकते हैं?

पढ़ें : सिर्फ गुजरात ही नहीं नए ट्रैफिक एक्ट के खिलाफ, कई और राज्य भी असंतुष्ट

बीते 1 सितंबर से केंद्र ने संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट (Amended Motor Vehicle Act) को लागू करने के निर्देश दिए थे, जिसमें भारी जुर्माने की व्यवस्था थी. दर्जन भर राज्यों ने विरोध कर इसमें फेरबदल की गुंजाइश तलाशने की कवायद की. दिल्ली के मुख्यमंत्री (Delhi CM) अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा था कि केंद्र के कानून में हस्तक्षेप करने का अधिकार राज्य को नहीं है लेकिन ताज़ा खबर है कि केजरीवाल सरकार भी जुर्माना घटाने के मूड में आ गई है. आइए, समझते हैं कि कानून बनाने (Legislature) और उसमें तब्दीली के लिए केंद्र और राज्यों के पास क्या अधिकार हैं और क्या व्यवस्थाएं हैं.

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अव्वल तो तीन सूचियां हैं
देश के संविधान में कानून बनाने की प्रक्रिया को लेकर तीन सूचियों की व्यवस्था है. पहली सूची में कानून बनाने के लिए केंद्र के क्षेत्र और अधिकार तय किए गए हैं यानी सेना, मुद्रा, बैंकिंग आदि क्षेत्रों में केंद्र ही कानून बना सकता है. दूसरी सूची में राज्य को कानून बनाने संबंधी हिदायतें हैं. पुलिस, स्थानीय प्रशासन, खेती आदि क्षेत्रों में राज्य अपने कानून बना सकते हैं. तीसरी संयुक्त सूची है जिसमें शिक्षा, शादी, बिजली, वन, व्यापार आदि क्षेत्रों में केंद्र और राज्य दोनों ही कानून बना सकते हैं.
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क्या राज्य के क्षेत्र में दखल दे सकता है केंद्र?
बेशक. भारतीय संविधान में कानूनी शक्तियों के संबंध में आर्टिकल 245 से 255 तक केंद्र और राज्यों के बीच के संबंध को लेकर विस्तार से चर्चा है. इसी के तहत केंद्रीय संसद को कुछ स्थितियों में शक्तियां हैं, कि वह राज्य के क्षेत्र में आने वाले विषयों पर भी कानून बना सकती है. सिलसिलेवार देखें.

- आर्टिकल 249 के मुताबिक स्टेट लिस्ट में आने वाले दायरे में भी कोई कानून केंद्र का सर्वोपरि होगा अगर राज्यसभा में यह कानून दो तिहाई या उससे ज़्यादा बहुमत के साथ पास होता है.
- आर्टिकल 250 के अनुसार केंद्र ऐसा आपातकाल की स्थिति में कर सकता है कि वह स्टेट लिस्ट के विषय में कोई कानून पूरे देश के लिए बना दे.
- आर्टिकल 253 में व्यवस्था है कि किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि, नीति या समझौते के मामले में केंद्र देश के किसी भी या सभी हिस्सों के लिए कोई कानून बना सकता है.

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संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माने की जो व्यवस्था केंद्र ने दी है, राज्य उसमें फेरबदल की गुंजाइश देख रहे हैं.


तो केंद्रीय कानून ही माना जाएगा
आर्टिकल 251 में व्यवस्था है : आर्टिकल 249 और 250 के अनुसार राज्य अपने दायरे के विषय में कोई भी कानून बना सकता है. लेकिन, अगर उसी संबंध में केंद्र का कोई कानून राज्य के कानून से पहले या बाद में आए और राज्य का कानून असंगत या विरोधी पाया जाए, तो केंद्र या संसद द्वारा बनाया गया कानून ही माना जाएगा.

इस स्थिति में होगा राज्य का पलड़ा भारी
आर्टिकल 252 में व्यवस्था है : अगर केंद्र ने ऐसे किसी विषय में राज्यों के लिए कोई कानून बनाया है, जिसका अधिकार उसे संविधान नहीं देता तो इस स्थिति में राज्य अपनी संपूर्ण विधायी प्रक्रिया के तहत उस कानून के संबंध में कोई रिज़ॉल्यूशन पास कर सकते हैं. अगर दो या उससे ज़्यादा राज्य ऐसा कर देते हैं तो संसद को इस मामले को नियंत्रित करने के लिए समुचित नियामक कार्यवाही करनी होगी.

एमवी एक्ट में क्या है गुंजाइश?
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माने की जो व्यवस्था केंद्र ने दी है, राज्य उसमें फेरबदल की गुंजाइश देख रहे हैं. गुजरात ने जुर्माना घटाने की घोषणा कर दी है और राजस्थान व दिल्ली ने भी ऐसा करने की मंशा ज़ाहिर कर दी है. गुजरात समेत अब तक किसी राज्य ने स्पष्ट नहीं किया है कि किस आधार पर राज्य ने केंद्र के इस कानून में फेरबदल की गुंजाइश निकाली. वहीं जानकार कह रहे हैं कि मोटर व्हीकल एक्ट में दर्ज 61 ऑफेंस में से 27 मामलों में राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती. लेकिन, 34 मामलों में कंपाउंडिंग एमाउंट में रिलीफ दे सकती है.

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किस कदर है एमवी एक्ट का विरोध?
देश के करीब एक दर्जन राज्य इस एक्ट में भारी भरकम जुर्माने को लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं और देश भर से असंगत चालान या जुर्माने लगाए जाने की खबरों का सिलसिला बना हुआ है. हालांकि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने इस एक्ट को लेकर कोई असंतोष ज़ाहिर नहीं किया है लेकिन ताज़ा खबरों के मुताबिक महाराष्ट्र के किसानों की एक प्रमुख संस्था ने इस एक्ट का विरोध कर चेतावनी दी है कि सरकार को जुर्माने की रकम पर फिर सोचना चाहिए क्योंकि इससे लोगों के आत्महत्या करने की आशंका बढ़ सकती है. वहीं, ओडिशा के एक समाचार पोर्टल ने इस व्यवस्था के खिलाफ लिखे एक लेख का शीर्षक 'जुर्माने की शक्ल में जबरन वसूली' दिया है.

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First published: September 11, 2019, 8:10 PM IST
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