Everyday Science : भाषा सीखने की चीज़ है या पैदाइशी का​बिलियत?

अपने शिशु को विज़ुअल वर्ड्स के साथ इंगेज करती मां.
अपने शिशु को विज़ुअल वर्ड्स के साथ इंगेज करती मां.

एक नई वैज्ञानिक स्टडी (Scientific Study) ने यह धारणा बदली है कि भाषा लर्निंग (Learning Language) का हिस्सा है. रिसर्चरों ने देखा कि जन्म के तुरंत बाद ही मनुष्य के दिमाग में यह योग्यता होती है कि शब्दों या अक्षरों को देखकर रिसीव किया जा सके.

  • News18India
  • Last Updated: October 26, 2020, 1:59 PM IST
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मनुष्य एक ऐसा दिमाग (Human Brain) लेकर पैदा होते हैं, जिसमें अक्षरों और शब्दों (Words or Letters) को देखकर रिसीव करने के लिए पहले से ही तंत्र होता है. एक नई स्टडी का दावा है कि जन्म से ही मनुष्य में यह गुण होता है कि वो पढ़ना सीख सके. अभी तक रीडिंग और राइटिंग (Reading & Writing) को लर्निंग संबंधी गुण माना जाता रहा था, लेकिन इस नई स्टडी (New Study) से एक गलतफ़हमी दूर होती है. पैदा हुए बच्चों के ब्रेन के जिस हिस्से में रिसर्चरों ने शोध किया और इस लेंग्वेज नेटवर्क (Language Network) के बारे में जाना, उसे 'विज़ुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (VWFA) कहा है.

इस VWFA को समझने से गुत्थी सुलझेगी. जो पढ़े लिखे होते हैं, उनके ब्रेन में यह हिस्सा पढ़ने के लिए होता है. हालांकि कुछ शोधकर्ताओं की ऐसी धारणा रही कि यह हिस्सा भी दूसरे विज़ुअल कॉर्टेक्स की तरह ही है और अलग नहीं है और बच्चों को भाषा सीखने-सिखाने की ही ज़रूरत होती है. लेकिन प्री​ रीडिंग VWFA ने अब कुछ धारणाएं बदलने की राह खोली है.

भाषा के संपर्क में आने से पहले ही, विज़ुअल शब्दों के लिए एक संवेदनशीलता के आधार मिले हैं... जन्म के समय भी हमने पाया कि नवजात के ब्रेन में लेंग्वेज नेटवर्क में VWFA अच्छी तरह कनेक्टेड और सक्रिय होता है. यह बेहद एक्साइटिंग तथ्य हाथ लगा है.
ज़ेनेप सैगिन, ओडियो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और रिसर्च लेखक

कैसे हुई स्टडी?


साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक एक जर्नल में रिसर्च प्रकाशित हुई है, जिसमें कहा गया कि रिसर्चरों ने उन 40 नवजातों के ब्रेन के एमआरआई स्कैन किए, जिनकी उम्र 7 दिन से ज़्यादा नहीं थी. इस उम्र के नवजातों में कनेक्टोम प्रोजेक्ट के तहत ब्रेन के विकसित हिस्सों को देखा गया. इन स्कैन रिपोर्ट्स की तुलना उन रिपोर्ट्स से की गई, जो एक और प्रोजेक्ट के तहत 40 वयस्कों के ब्रेन स्कैन से मिली थीं.

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रिसर्चरों ने कहा कि जिस तरह चेहरों को समझने और पहचानने के लिए विज़ुअल कॉर्टेक्स सक्रिय होता है, उसी तरह VWFA है, जो कतई अलग नहीं है और नवजातों के ब्रेन में सक्रिय पाया गया. जिस तरह चेहरों में फर्क करना पेचीदा होता है क्योंकि सबके आकार या बनावट करीबन एक सी होती है, इसी तरह विज़ुअल वर्ड्स के साथ भी होता है.

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नवजातों के ब्रेन स्कैन पर स्टडी के बाद लेंग्वेज नेटवर्क को समझा गया. तस्वीर (Pixabay) से साभार.


कॉर्टेक्स से अलग है VWFA
रिसर्चरों ने नवजातों में देखा कि विज़ुअल कॉर्टेक्स के पार्ट से VWFA अलग दिखा और इसका कारण यही है कि इसका कनेक्शन ब्रेन के लेंग्वेज प्रोसेसिंग वाले हिस्से से है. जिस तरह किसी अनुभवी या सीखे हुए व्यक्ति के केस में होता है, उसी तरह के ब्रेन कनेक्शन जन्म से ही देखे गए हैं, इस बात पर यह पूरी रिसर्च ज़ोर देती है. हालांकि नवजातों और वयस्कों के VWFA में कुछ अंतर भी देखे गए.

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रिसर्च में साफ कहा गया हालांकि गतिविधि के स्तर पर सक्रियता नवजातों के VWFA में भी दिखी, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसमें और सुधार और बेहतरी की गुंजाइश बनी रहती है. जब भाषा को सुनने और लिखने की बारी आती है, तब ब्रेन के इस लेंग्वेज सर्किट में और विकास होता है और इस हिस्से की कार्यप्रणाली कुछ और विशिष्ट होती जाती है.

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क्यों हो रहे हैं ये प्रयोग?
ओहियो की लैब में मनोविज्ञानी रिसर्चर सैगिन फिलहाल 3 से 4 साल के उम्र के बच्चों के ब्रेन स्कैन पर काम कर रही हैं और जानने की कोशिश कर रही हैं कि बच्चों के पढ़ना सीखने से पहले VWFA किस तरह काम करता है और कौन सी विज़ुअल प्रॉपर्टीज़ से किस तरह के रिस्पॉंस मिलते हैं. इस अध्ययन का मकसद यह जानना है कि एक दिमाग किस तरह रीडिंग ब्रेन बनता है.

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इन अध्ययनों से यह पता लगाया जा सकेगा कि रीडिंग बिहेवियर के पीछे क्या कारण हैं. उम्मीद की जा रही है कि डिस्लेक्सिया और इस तरह के अन्य डिसॉर्डरों को और बेहतर ढंग से समझने और उसके निदान में ये स्टडीज़ मददगार साबित होंगी. इस रिसर्च को विस्तार में यहां पढ़ा जा सकता है.
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