देश में जून के आखिर में पीक पर होगा कोरोना - स्टडी

देश में जून के आखिर में पीक पर होगा कोरोना - स्टडी
संक्रमण की रफ्तार थमी ज़रूर है, लेकिन अनुमान है कि फिर बढ़ेगी. फाइल फोटो.

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉकडाउन दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है और देश को ज़ोन्स में बांटकर खास तरह से ढील दी गई. ऐसा न किया जाता तो? या लॉकडाउन जैसा कदम उठाया ही नहीं जाता तो? जानिए कि लॉकडाउन और कोविड 19 महामारी के बुरी तरह फैलने के बारे में क्या कहता है भारत में हुआ अध्ययन.

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भारत (India) में हुए एक अध्ययन (Study) की मानें तो देश भर में कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण जून के महीने में अपने चरम पर होगा. जी हां, इस स्टडी में साफ कहा गया है कि अभी जो हालात हैं, वो देश में कोविड 19 (Covid 19) महामारी का सबसे व्यापक स्वरूप नहीं है. इस महीने भी महामारी अपने चरम पर हो सकती थी, लेकिन लॉकडाउन (Lockdown) के कारण एक महीने की देर हुई है. आइए इस अध्ययन में जो और तथ्य सामने आए हैं, उनके बारे में जानें.

क्यों और कैसे हुई यह स्टडी?
कोलकाता (Kolkata) बेस्ड इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस यानी आईएसीएस (IACS) ने कोविड 19 की गति और लॉकडाउन के असर को समझने के लिए जो स्टडी की, उसमें कहा गया है कि लॉकडाउन की वजह से देश में महामारी (Pandemic) के चरम पर पहुंचने का वक्त एक महीने टाला जाना संभव हुआ है इसलिए बेहतर तैयारियों के लिए और वक्त मिल पाया है.

यह स्टडी बायो कंप्यूटैशनल मॉडलिंग पर आधारित है, जिसमें संक्रमण की दरों में लगातार आए बदलावों के आधार पर अच्छे और बुरे समय के बारे में आकलन किया गया है. संवेदनशील-संक्रमित-रिकवरी-मृत्यु यानी एसआईआरडी मॉडल को स्टडी का आधार बनाया गया है. इस स्टडी में मॉडल के कर्व और रिप्रोडक्शन नंबर के ट्रेंड के आधार पर कहा गया है कि जून के आखिर तक संक्रमण का दौर चरम पर होगा और तब डेढ़ लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं.



क्या है रिप्रोक्शन नंबर?


इस स्टडी में अभी रिप्रोडक्शन नंबर 2.2 पाया गया है यानी 10 लोग औसतन 22 और लोगों को संक्रमित कर रहे हैं. यह रिप्रोडक्शन नंबर है, जिसके जून आखिर तक और कम होकर 0.7 रह जाने का भी अनुमान लगाया गया है.

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न्यूज़18 क्रिएटिव


लॉकडाउन न होता तो?
इस स्टडी के अनुमानों की मानें तो लॉकडाउन का पालन देश भर में नहीं किया जाता, तो संक्रमण अपने चरम पर मई के महीने के अंत तक आ सकता था. इस अध्ययन के बारे में टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक स्टडी का मॉडल यह भी दर्शाता है कि अगर 3 मई को लॉकडाउन पूरी तरह से हटा लिया जाता तो संक्रमण की दर तेज़ी से बढ़ती.

पहले भी हुआ है यह दावा
वेल्लूर में क्लीनिकल वायरोलॉजी के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. जैकब जॉन ने डेक्कन हेराल्ड को दो हफ्ते पहले दिए साक्षात्कार में कहा था कि आंकड़े सिर्फ अनुमानों को बढ़ावा दे रहे हैं, ये महामारी विज्ञान के तर्क नहीं हैं. महामारी विज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर परिभाषित कर पाने के लिए भारत में अभी पर्याप्त डेटा नहीं है.

लॉकडाउन के हालात ने संक्रमण फैलने की रफ्तार पर एक लगाम तो लगाई है और दुनिया भर में मास्क का जो इस्तेमाल अनिवार्य हुआ है, उससे भी संक्रमण की गति में कुछ कमी आई ही है. मेरा अनुमान है कि जून और जुलाई में भारत में संक्रमण अपने चरम पर होगा.

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First published: May 4, 2020, 1:34 PM IST
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