जानिए जनता कर्फ्यू के एक महीने बाद भारत में कितना सफल रहा Covid-19 लॉकडाउन

जानिए जनता कर्फ्यू के एक महीने बाद भारत में कितना सफल रहा Covid-19 लॉकडाउन
भारत में लॉकडाउन बहुत ही सख्ती से लागू किया गया था.

कोरोना वायरस (Corona virus) के कारण जनता कर्फ्यू के बाद एक महीने लागू लॉकडाउन (Lock down) काफी हद तक सफल रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2020, 4:19 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) को दुनिया भर में फैले करीब चार महीने का समय हो चुका है. भारत में इसकी आहट आते ही ठीक एक महीने पहले जनता कर्फ्यू  (Junta Curfew) का प्रयोग हुआ और उसके बाद लॉकडाउन (Lock down) लागू हुए एक महीना हो गया. कहा जा रहा है कि भारत में दुनिया का सबसे सख्ती से लॉकडाउन लागू किया गया. यह अब भी जारी है और आगामी 3 मई तक चलेगा. ऐसे में देखते हैं कि यह कितना सफल रहा.

भारत ने लागू किए सभी संभव उपाय
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने 73 देशों का अध्ययन किया है और भारत के लॉकडाउन को दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन की संज्ञा दी है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने स्ट्रिंजेंसी इंडेक्स बनाया. सख्ती का इस इंडेक्स में कई कारकों जैसे यात्रा पर प्रतिबंध, शिक्षण संस्थानों को बंद करना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपात निवेश, सीमाबंदी आदि को शामिल किया गया.

पूरे 100 अंक मिले भारत को



खास बात यह है कि शोधकर्ताओं ने भारत को पूरे 100 अंक दिए. उनके मुताबिक भारत ने वायरस को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाया है. पर क्या यह लॉकडाउन सफल रहा. शोधकर्ताओं का मानना है कि कई चुनौतियों के बावजूद दुनिया अन्य देशों के मुकाबले भारत का हाल बहुत ही बेहतर रहा. उन्होंने इस बात को भी माना कि भारत में गर्मी के मौसम, वायरस का ज्यादा घातक न होना जैसे अन्य कारक भी थे जिसकी वजह से भारत आगे रहा.



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भारत में 23 मार्च से लागू लॉकडाउन अब भी जारी है.


इतने बढ़ जाते संक्रमण, अगर लॉकडाउन न होता तो
लेकिन भारत की सफलता कई आंकड़ों में दिख रही है. इनमें से सबसे खास है संक्रमित लोगों की संख्या में बहुत ज्यादा बढ़त न होना. आईसीएमआई के अध्ययन के अनुसार अगर लॉकडाउन या अन्य तरह की सख्ती नहीं बरती जाती तो भारत में 15 अप्रैल तक 8 लाख 20 हजार संक्रमण हो चुके होते. अगर लॉकडाउन के न लगाकर केवल कुछ कड़े कदम उठए जाते तो यह आंकड़ा 1.2 लाख होता. लेकिन 15 अप्रैल की रात तक भारत में संक्रमण के मामले 12021 ही रहे.

वृद्धिदर में दिखा नियंत्रण
लॉकडाउन से पहले 17 मार्च से लेकर 24 मार्च तक 137 से 519 तक संक्रमण संख्या पहुंची थी. यह 279 प्रतिशत वृद्धि थी. यहां अगर सप्ताह की संक्रमण संख्या और सप्ताह से पहले पाए गए मामलों की संख्या का अनुपात निकाला गया जिसे वीकली ग्रोथ मल्टिपल (WGM) यह लॉकडाउन से पहले सप्ताह में 3.79 था. लेकिन लॉकडाउन के बाद 25 मार्च को 606 कुल मामले हो गए थे.. उसके बाद एक अप्रैल को 1966 (3.24 WGM),  8 अप्रैल को 5749 मामले (2.92 WGM), 15 अप्रैल को 12021 मामले (2.09 WGM) और 21 अप्रैल को 20004 मामले (1.66 WGM) हो गए थे.

दैनिक वृद्धिदर में भी गिरावट शुरू
गौर करने वाली बात यह है कि WGM लॉकडाउन से पहले के मुकाबले आधे से भी कम रह गया. एक एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि संक्रमण के बारे में कहा जा रहा था कि इसकी वृद्धि कई गुना बढ़ने की संभावना होती है. लेकिन लॉकडाउन के पहले जो दर दो गुनी थी वह  उससे ज्यादा नहीं बढ़ी. इतना ही नहीं औसत वृद्धि दर में भी गिरावट आई है. पिछले तीन दिनों में दैनिक वृद्धि दर भी 12 से 6 प्रतिशत (22 अप्रैल) तक आ गई है.

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भारत ने सख्तीसे लॉकडाउन लागू किया है.


ठीक हो चुके मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में भी हम बेहतर
रिकवरी रेट की दर जो कि ठीक हो चुके मरीजों और सभी मामलों की संख्या का अनुपात है, वह भी 21 अप्रैल को 19.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यह 8 अप्रैल को 7 प्रतिशत था. इसके अलावा पिछले एक सप्ताह में मृत्यु दर 3.4 के मुकाबले 3.19 तक गिरी है. इस मामले में जर्मनी की दर 3.42, कनाडा की दर 4.77, अमेरिका की दर 5.53, चीन कीदर 5.6, स्पेन की दर 10.42, फ्रांस की दर 13.16, इटली की दर 13.4 और यूके की दर 13.43 है.

और जांच में भी चुनौती पूर्ण मुद्दा
इस समय जांच एक अहम मुद्दा है. भारत में जांचे गए मामले और पॉजिटिव निकले मामलों का अनुपात  22.92 है. 10 हजार से ज्यादा मामले वाले देशों में तीस यह दुनिया का तीसरा सबसे अच्छा अनुपात है. वह केवल दक्षिण कोरिया और रूस से पीछे हैं. वहीं भारत में जांचे गए मामले और मारे गए मरीजों का अनुपा 717.24 है जो दुनिया में सातवां स्थान है.

5000वें मामले में के बाद तेजी से नहीं बढ़े हम
अगर 5 हजारवें मामले के 14 दिन बाद की संख्या में बढ़त को देखें तो  दक्षिण कोरिया  में यह संख्या 8320, भारत में 20004, ईरान में 20100, यूके में 41903, इटली 53578, जर्मनी 62095, जर्मनी 62095, यूएसे 188172 तक पहुंची है. यहां भी भारत का हाल काफी बेहतर है.

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लॉकडाउन के दौरान कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा . (प्रतीकात्मक फोटो)


ये सच है कि भारत इस चुनौती से निपटने में कई देशों के मुकाबले बहुत ही बेहतर रहा है, लेकिन अभी चुनौती खत्म नहीं हुई है. अब भी कई जगहों पर लॉकडाउन जारी रखे जाने के जरूरत महसूस हो रही है. इसके अलावा लोगों की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति भी एक चुनौती है. इस लिहाज से अभी तक उठाए गए कदम पूरी तरह से सफल हो गए हैं यह कहना जल्दबाजी होगी.

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