सुशांत ने खरीदा था... क्या कोई खरीद सकता है चांद पर प्लॉट?

सुशांत ने खरीदा था... क्या कोई खरीद सकता है चांद पर प्लॉट?
आत्महत्या करने वाले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने चांद पर एक प्लॉट खरीदा था.

एक तरफ दुनिया भर के शक्ति संपन्न और महत्वाकांक्षी देश चांद के ज़र्रे ज़र्रे की न​ सिर्फ छानबीन ​बल्कि वहां अपनी कॉलोनी और बेस बनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं Global Treaty का आदर्श कहता है कि कोई देश Lunar Land पर आधिकारिक दावा नहीं कर सकता. ऐसे में, चांद पर एकड़ों ज़मीन बेची कैसे जा रही है?

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क्या चांद पर कोई Plot या Lunar Land खरीदना संभव है? शायद आपके ज़हन में यह सवाल आए क्योंकि हालिया खबरों के मुताबिक पिछले दिनों Suicide करने वाले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत 2018 में पहले Bollywood अभिनेता बने थे, जिन्होंने चांद पर प्लॉट (Lunar Plot) खरीदा था. अब सवाल ये है कि अगर चांद पर प्लॉट खरीदना मुमकिन है, तो बेच कौन रहा है? आखिर चांद पर भी क्या किसी व्यक्ति या संस्था का हक है?

एक सच्चाई तो यह है कि अंतर्राष्ट्रीय समझौते के मुताबिक कोई देश या सरकार चांद पर अपना हक़ नहीं जता सकती. दूसरी तरफ, ये भी सच है कि कई शक्तिशाली देश चांद पर कॉलोनी या बेस बनाने की तैयारी कर रहे हैं. तीसरी बात यह भी है कि कुछ प्राइवेट संस्थाएं चांद की सतह के हिस्सों पर दावा करते हुए प्लॉट बेचती रही हैं. इस पूरे उलझे हुए मामले को कुछ सवालों के जवाबों से सुलझाते हैं.

चांद पर किस तरह हो रहे हैं कब्ज़े?
एक तरफ यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी चांद पर 2020 से 2030 के बीच 'अंतर्राष्ट्रीय गांव' बनाने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ, अमेरिका की नासा चांद पर एक बेस बनाने की. रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos और चीन की CNSA भी इसी तरह के बेस चांद पर बनाने की योजना रखते हैं. इन तमाम कोशिशों के चलते चांद की ज़मीन पर हक़ को लेकर कानूनी पहलुओं पर अक्सर बहस की गुंजाइश रहती है.
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यूएन के सदस्य देशों के बीच एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते के तहत कोई देश चांद पर दावा नहीं कर सकता.


क्या हैं अंतर्राष्ट्रीय समझौते?
आउटर स्पेस ट्रीटी या OST 1967 में प्रभावशाली हुई थी. इस समझौते के तहत तय हुआ था कि दुनिया का कोई देश या किसी भी देश की कोई सरकार चांद पर किसी तरह के प्रभुत्व का दावा नहीं कर सकेगी. 2015 तक इस समझौते पर 104 देश हस्ताक्षर कर चुके थे और उसके बाद भी कम से कम 24 देशों ने और दस्तखत किए.

यह समझौता बहुत बड़ा दस्तावेज़ है, जो संयुक्त राष्ट्र के आउटर स्पेस अफेयर्स दफ्तर में सुरक्षित है और इसमें कई किस्म के प्रावधान और चर्चाएं हैं. लेकिन इस समझौते में एक बड़ा लूपहोल है, जिसका फायदा कुछ संस्थाओं ने उठाने की भरपूर कोशिश की है.

चांद को पूरी मानवता के भले के लिए घोषित करने वाले इस समझौते में देशों और सरकारों के प्रभुत्व को तो खारिज किया गया है लेकिन निजी तौर पर किसी व्यक्ति या संस्था के दावे को समझौते ने कहीं खारिज नहीं किया. इसका फायदा उठाकर कुछ निजी संस्थाएं चांद पर ज़मीन बेचते रही हैं और कानूनी लड़ाई भी लड़ रही हैं.


तो क्या प्राइवेट सेक्टर बेच सकता है चांद पर प्लॉट?
इस पूरे विषय पर कई अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया है कि इसी समझौते का आर्टिकल VI कहता है कि किसी भी दावेदार के एक्शनों के लिए संबंधित सरकारें ज़िम्मेदार होंगी. हालांकि यह भाषा स्पष्ट नहीं है, फिर भी इतना बताती है कि इस समझौते का मकसद यही है कि वह सरकारी हो या निजी, हर दावे को खारिज करे.

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हाल में, सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने एक इंटरव्यू में पुष्टि की कि सुशांत ने चांद पर प्लॉट खरीदा था.


क्या कोई और भी समझौता या प्रावधान है?
साल 1979 में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने एक और समझौते पर विचार किया था, जिसे मून ट्रीटी या मून एग्रीमेंट के नाम से जाना जाता है. इस समझौते में चांद या किसी अन्य अंतरिक्ष इकाई के इस्तेमाल को लेकर कानूनी प्रावधान तय किए गए थे. हालांकि इस समझौते का कोई औचित्य सिद्ध नहीं हुआ क्योंकि ज़्यादातर देशों ने इस पर दस्तखत करने से मना ​कर दिया था. फिर भी, उस वक्त भी सबने माना कि चांद की ज़मीन पर किसी तरह का सरकारी या निजी दावा नहीं होना चाहिए.

क्या किसी काम की है चांद पर ज़मीन?
अब अगर ये मान भी लिया जाए कि कानूनी तौर पर ऐसा कोई सख्त प्रावधान नहीं है, जो निजी सेक्टर को चांद की ज़मीन पर दावा करने से रोके या बेचने से तो भी सवाल ये है कि चांद पर ज़मीन खरीदने का फायदा क्या है? चांद की सतह पर 100°C से लेकर —173°C तक तापमान रहता है. पृथ्वी की तुलना में गुरुत्वाकर्षण सिर्फ 16.5% है और कठोर धूल है.

चांद पर सिर्फ प्रशिक्षित एस्ट्रोनॉट खास तरह के विमानों से ही जा सकते हैं और वह भी कुछ ही समय के लिए. अंतरिक्ष संबंधी अध्ययनों और उपग्रहों आदि के लिए ज़रूर चांद का इस्तेमाल हो रहा है और होगा लेकिन अगली कुछ सदियों तक तो चांद पर सामान्य जीवन की कोई गुंजाइश नहीं है.

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तो सुशांत ने कैसे खरीदा चांद पर प्लॉट?
खबरों की मानें तो सुशांत को अंतरिक्ष विज्ञान से लगाव था इसलिए उन्होंने लूनर लैंड नाम की संस्था के ज़रिये चांद पर 'सी ऑफ मस्कॉवी' क्षेत्र में एक प्लॉट खरीदा था. इससे पहले शाहरुख खान को एक फैन ने चांद पर एक प्लॉट तोहफे में दिया था. तो तकनीकी तौर पर सुशांत चांद पर प्लॉट खरीदने वाले पहले बॉलीवुड अभिनेता थे. अब रही बात लूनर लैंड संस्था की तो, इसकी वेबसाइट पर कुछ रोचक जानकारियां हैं.

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यह वेबसाइट दावा करती है कि 1967 के समझौते में जो लूपहोल रह गया है, उसी का फायदा उठाते हुए यह संस्था बरसों से चांद पर प्लॉट बेच रही है और 1980 से यह संस्था चांद पर 30 करोड़ एकड़ ज़मीन बेच चुकी है.

ऐसी कई प्राइवेट कंपनियां हैं, जो चांद पर ज़मीन बेचने के धंधे में हैं. इनमें से चांद के रियल एस्टेट की प्रमुख कंपनी डेनिस होप के मालिकाना हक वाली लूनर एम्बेसी भी है, जिसका दावा है कि 1980 से वह 60 करोड़ एकड़ से ज़्यादा ज़मीन बेच चुकी है. लूनर लैंड 20 डॉलर तो लूनर एम्बेसी 25 डॉलर प्रति एकड़ तक चार्ज करते रहे हैं.
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