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16 साल में बनकर तैयार हुआ है बोगीबील ब्रिज, भारतीय सेना के लिए क्यों है खास

16 साल में बनकर तैयार हुआ है बोगीबील ब्रिज, भारतीय सेना के लिए क्यों है खास

बोगिबिल रेल/रोड पुल तस्वीर News18

बोगिबिल रेल/रोड पुल तस्वीर News18

बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 10.3 किलोमीटर है लेकिन रेलवे पुल बनाने के लिए यहां तकनीक लगाकर पहले नदी की चौड़ाई कम की गई और फिर इसपर करीब 5 किलोमीटर लंबा रेल/रोड ब्रिज बनाया गया है. यह भारत का सबसे लंबा रेल/ रोड ब्रिज है.

    असम में ऊपरी ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील ब्रिज भारतीय सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण है. 4.94 किलोमीटर लंबा रेल/रोड ब्रिज भारत को अब नई ताकत देगा. खासकर अरुणाचल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण है.

    इस पुल के शुरू होने से भारतीय सेना को जवानों के ट्रांसपोर्ट में बड़ी मदद मिलेगी. भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य और चीन करीब 4000 किलोमीटर लंबा बॉर्डर साझा करतेहैं. इसका करीब 75 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ अरुणाचल प्रदेश में है.

    भारतीय रेल के इस पुल की आधारशिला साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी और 2007 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया. लेकिन पिछले 4-5 साल से इसके निर्माण में तेजी आई.

    इसके चलते असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र के उत्तर की तरफ जाना आसान हो जाएगा जिसमें अरुणाचल प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है. अरुणाचल प्रदेश और पूरे उत्तर पूर्वी भारत के चुनौतीपूर्ण भूगोल को देखते हुए बोगीबील ब्रिज इस इलाके में रेल लाइन के विकास की नई शुरुआत है.

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    हालांकि बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 10.3 किलोमीटर है लेकिन रेलवे पुल बनाने के लिए यहां तकनीक लगाकर पहले नदी की चौड़ाई कम की गई और फिर इसपर करीब 5 किलोमीटर लंबा रेल/रोड ब्रिज बनाया गया है. यह भारत का सबसे लंबा रेल/ रोड ब्रिज है.

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यहां से 450 किलीमेटर दूर गुवाहाटी में ही ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए नदी पर पुल मौजूद है. जबकि सड़क पुल भी यहां से करीब 250 किलोमीटर दूर है. ऐसे भी आम लोगों की सुविधा के अलावा फौजी जरूरतों के लिहाज से यह पुल सेना को बड़ी ताकत देगा.

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    इस ब्रिज को बनाने में इंजीनियरों को कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है. सबसे पहले तो उन्हें यहां मार्च से लेकर अक्टूबर तक होने वाली बारिश के बाद ही काम करने का समय मिला है. इसके अलावा नदी के पानी के भारी दबाव में होने के नाते किसी भी तरफ से मिट्टी का कटाव शुरू हो जाता है और कहीं भी टापू बन जाता है ऐसे में काम करना या फिर लोकेशन बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है. लेकिन इन सबसे निबटकर पहली बार रेलवे ने स्टील गर्डर का इस्तेमाल कर इतना बड़ा पुल बनाया है.

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    इस पुल में कहीं भी रिपीट नहीं लगाया गया बल्कि हर जगह लोहे को वेल्ड किया गया है जिससे इसका वजन 20% तक कम हो गया और इससे लागत में भी कमी आयी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को इस पुल का उद्घाटन करेंगे.

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    मुख्य अभियंता मोहिंदर सिंह ने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बना 4.9 किलोमीटर लंबा पुल देश का पहला पूर्णरूप से जुड़ा पुल है. उन्होंने बताया कि पूरी तरह से जुड़े पुल का रखरखाव काफी सस्ता होता है.

    इस पुल के निर्माण में 5,900 करोड़ रुपए का खर्च आया है और इसकी मियाद 120 वर्ष है. इससे असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच की यात्रा दूरी घट कर चार घंटे रह जाएगी. इसके अलावा दिल्ली से डिब्रूगढ़ रेल यात्रा समय तीन घंटे घट कर 34 घंटे रह जाएगा. इससे पहले यह दूरी 37 घंटे में तय होती थी.

    Tags: Assam, Narendra modi

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