जापान में कोरोना वायरस से जंग के आड़े कैसे आ रही है सदियों पुरानी 'हैंको' परंपरा

जापान के कार्यालयों में जरूरी दस्‍तावेजों पर हैंको लगवाने की सदियों पुरानी परंपरा के कारण कोरोना वायरस से मुकाबले में दिक्‍कते हो रही हैं.
जापान के कार्यालयों में जरूरी दस्‍तावेजों पर हैंको लगवाने की सदियों पुरानी परंपरा के कारण कोरोना वायरस से मुकाबले में दिक्‍कते हो रही हैं.

जापान (Japan) की सरकार कोरोना वायरस (Coronavirus) से मुकाबले में एक तरफ वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दे रही है तो दूसरी तरफ लोगों को सब्सिडी आवेदन के लिए कार्यालय पहुंचने को कह रही है. ऐसे में कारोबारी देश के कार्यालयों में लागू हैंको जैसी कुछ परंपराओं की आलोचना कर रहे हैं.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) से जापान में अब तक 16 हजार से ज्‍यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें 697 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9,868 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं. इस बीच जापान (Japan) में सदियों पुरानी कुछ परंपराओं को सोशल डिस्‍टेंसिंग (Social Distancing) में रोड़े डालने का दोषी बताया जा रहा है. दरअसल, जापान में अहम दस्‍तावेजों से लेकर, शादी के पंजीकरण और यहां तक कि डिलिवरी स्लिप पर भी 'हैंको' लगवाने की परंपरा है, जो लकड़ी या प्‍लास्टिक से बनी सील होती है.

दस्‍तावेजों पर 'हैंको' (Hanko) लगवाने के लिए लोगों को संबंधित दफ्तरों तक जाना पड़ता है. वहीं, कंपनियों में काम करने वाले लोगों को अपने दस्‍तावेजों पर मुहर लगाने के लिए दफ्तर जाना पड़ रहा है. हैंको लगाने या लगवाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने के कारण ट्रेनों और कार्यालयों में भीड़ होने पर सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं. ऐसे में लोगों का मानना है कि ये परंपरा कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अड़चन डाल रही है.

शिंजो आबे ने की डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की अपील
जापान के आम लोग और कारोबारी कोरोना संकट के बीच मुसीबत बढ़ाने वाली ऐसी परंपराओं को जारी रखने की आलोचना कर रहे हैं. इस बीच कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे (PM Shinzo Abe) ने सरकारी कार्यालयों में जारी ऐसी सभी पुरानी परंपराओं को बदलने की अपील की है. इनमें हाथ से दस्तावेजों पर हैंको या मुहर लगाना भी शामिल है. आबे इस परंपरा को बंद कर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराकर 70 फीसदी लोगों को एकदूसरे से मिलने से रोकना चाहते हैं ताकि कोरोना वायरस से मुकाबला करने में आसानी हो. उन्‍होंने इस समय कार्यालयों में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने को कहा है. वहीं, जापान के विज्ञान व तकनीकी नीति मंत्री ने भी हैंको के चलन पर फिलहाल रोक लगाने का समर्थन किया है. इसी बीच जापान ने देश में पाबंदियों की अवधि 31 मई तक बढ़ा दी है.
जापान के पीएम शिंजो आबे ने कार्यालयों में पारंपरिक हैंको के बजाय डिजिटल सील को प्रोत्‍साहित करने पर जोर दिया है.




इसलिए हैंको के इस्‍तेमाल के खिलाफ हो गए जापान के लोग
जापान कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए वर्क फ्रॉम होम (Work-from-Home) की नीति को आक्रामक तरीके से प्रोत्‍साहित कर रहा है. सरकार की नीति के उलट जापान में लोग घर से काम करने को लेकर कम इच्छुक हैं. टोक्यो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने पिछले महीने फैक्स के जरिये किए एक सर्वे में पाया कि 1,333 कंपनियों में सिर्फ 26 फीसदी ही घर से काम कराने की इच्छुक हैं. एक तरफ सरकार वर्क फ्रॉम होम और सोशल डिस्‍टेंसिंग को प्रोत्‍साहित कर रही है और दूसरी तरफ कोरोना संकट के बीच छोटे कारोबारियों और अन्य लोगों को रोजगार कार्यालय (Employement Office) में व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर सब्सिडी आवेदन करने को कहा गया है. इन सभी कारणों से जापान में सील के प्रयोग पर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने लगी.

जापान में 43 फीसदी दफ्तरों में ही डिजिटल मुहर का चलन
सीबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में सिर्फ 43 फीसदी दफ्तरों में ही डिजिटल सील (Digital Seal) का इस्‍तेमाल किया जा रहा है. व्यापार लॉबी कीडरेन के प्रमुख हिरोकी नाकिनेसी ने कहा कि सब कुछ इलेक्‍ट्रॉनिक हस्ताक्षर से संभव है. आधुनिक दौर में पहचान और प्रमाणीकरण के लिए मुहर के इस्‍तेमाल की जरूरत समझ से बाहर है. कोरोना पॉजिटिव मामलों में हो रही वृद्धि को देखते हुए कारोबारी समुदाय के लोग भी सदियों पुरानी हैंको परंपरा को खत्‍म करने की वकालत कर रहे हैं. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में हैंकों की अहमियत दूसरे देशों में दस्‍तावेजों पर किए जाने वाले हस्‍ताक्षर के बराबर है. हैंको यहां बहुत से लेनदेन में अनिवार्य है. ये मुहर गोल और वर्गाकार होती है. इसे 'शुनिकू' नाम के इंकपैड के जरिये गीला करके दस्‍तावेजों पर लगाया जाता है. इससे बने मार्क को 'इंकान' कहा जाता है.

जापान में अलग-अलग तरह के लेनदेन में अलग हैंको का इस्‍तेमाला किया जाता है.


अलग-अलग तरह के लेनदेन के लिए होती है अलग हैंको
जापान में हैंको का इतिहास सदियों पुराना है. बताया जाता है कि चीन के हान वंश के एक राजा ने 57 AD में जापान के एक राजदूत को ठोस सोने से बनी एक मुहर दी थी. इसके बाद कई सदियों तक सरकारी विभागों और मंदिरों में ही इस तरह की मुहर का इस्‍तेमाल किया गया. फिर 19वीं सदी के अंत में राष्‍ट्रीय प्रमाणन व पंजीकरण प्रणाली से संबंधित एक कानून पारित कर दिया गया. इसके बाद हैंको का इस्‍तेमाल पूरे जापान में चलन में आ गया. आज जब दुनियाभर में पेपरलेस सिस्‍टम को प्रोत्‍साहित करने के साथ ही अपनाया भी जा रहा है, तब भी जापान में हैंकों की मान्‍यता सबसे ज्‍यादा है. जापान में अलग-अलग लेनदेन के लिए अलग हैंको का इसतेमाल किया जाता है. इनमें पंजीकरण सील, बैंक डॉक्‍यूमेंट की सील और रोजमर्रा के सामान की डिलिवरी की सील अलग होती हैं.

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