Coronavirus: संदिग्‍ध मरीजों का इलाज कर रहे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी ऐसे रखें संक्रमण को खुद से दूर

Coronavirus: संदिग्‍ध मरीजों का इलाज कर रहे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी ऐसे रखें संक्रमण को खुद से दूर
कोरोना वायरस संक्रमण लगातार फैल रहा है. ऐेसे में स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के लिए भी संक्रमण से बचे रहना चुनौती है.

सिंगापुर (Singapore) और हांगकांग (Hong Kong) ने वैश्विक महामारी से बाखूबी निपटा. सभी देश इन दोनों से सबक लेकर अपने यहां संक्रमण फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2020, 10:20 PM IST
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दुनिया भर में सरकारें कोराना वायरस (Coronavirus) को फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए अपने नागरिकों को घर में ही रहने की सलाह दे रही हैं. इसके बाद भी कई ऐसे पेशे हैं, जिनमें काम कर रहे लोग न चाहते हुए भी घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं. इनमें पुलिसकर्मी, स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी, मीडियाकर्मी, सब्‍जी वाले, किराने वाले, घर-घर सामान पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉयज, दूध पहुंचाने वाले लोग शामिल हैं. इनमें कोरोना वायरस की चपेट में आने का सबसे ज्‍यादा खतरा स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों (Healthcare Workers) को है. ऐसे में स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी क्‍या करें कि खुद बीमार होने के बजाय संक्रमण से बचे रहकर वे मरीजों का इलाज करते रहें.

वुहान में मरीजों के इलाज के लिए बाहर से बुलाने पड़ गए थे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी
चीन के वुहान (Wuhan) में जब कोरोना वायरस फैला तो 1,300 स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी संक्रमण (Infected) का शिकार हो गए. स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के संक्रमित होने की आशंका सामान्‍य लोगों से तीन गुना ज्‍यादा होती है. संक्रमण का असर तुरंत दिखाई नहीं देता है. ऐसे में वे वायरस के कैरियर के तौर पर काम कर सकते हैं यानी जब वे घर जाएंगे तो अपने परिवार और मिलने वालों को संक्रमित कर सकते हैं. हुआ भी कुछ ऐसा ही. धीरे-धीरे वुहान में डॉक्‍टर कम पड़ने लगे. इसके बाद चीन सरकार दूसरे प्रांतों से 42 हजार स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी वुहान लेकर आई. सौभाग्‍य से तब तक स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के तरीके खोज लिए गए थे. हालांकि, ये तरीके बहुत सख्‍त थे. इसके बाद वहां एक भी डॉक्‍टर संक्रमित नहीं हुआ.

स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को घर जाने या परिवार से मिलने पर लगा दी थी पाबंदी



वुहान को लॉकडाउन (Lock-down) कर दिया गया. लोगों को घर के बाहर निकलने की मनाही कर दी गई. साथ ही बाहर के लोगों के वुहान में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई. चीन सरकार ने डॉक्‍टरों को कोरोना वायरस का सबसे आसान कैरियर मानाते हुए अपने परिवारों से मिलने या घर जाने की अनुमति नहीं दी. सभी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को फुल बॉडी प्रोटेक्टिव ड्रेस उपलब्‍ध कराई गई. आंखों और सिर को पूरी तरह ढंकने के निर्देश दिए गए. इसके लिए उन्‍हें चश्‍मे और N95 फेस मास्‍क (Face Mask) तक उपलब्‍ध कराए गए. अब सवाल ये उठता है कि क्‍या भारत (India) में ऐसा कुछ भी किया गया? भारत में अंदरूनी इलाकों में अब तक स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के लिए सुरक्षा इंतजाम वाली किसी भी चीज की आपूर्ति नहीं की गई है.



स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी संदिग्‍ध मरीजों का इलाज करते समय या बात करते समय सर्जिकल मास्‍क, ग्‍लब्‍स पहनने. साथ ही बार-बार हाथों को सैनेटाइज करते रहें.


संक्रमितों के संपर्क में आए हर डॉक्‍टर को क्‍वारंटीन किया तो क्‍या होगा
अमेरिका के मैसाच्‍युसेट्स की 14 काउंटीज में से 11 में ये वायरस फैल चुका है. संक्रमित लोगों की संख्‍या में लगातार वृद्धि होती जा रही है. वहां बिना सुरक्षा उपायों के कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के संपर्क में आए डॉक्‍टरों को घर भेज दिया गया है. उन्‍हें अपने घरों में आइसोलेट होने को कहा गया है. वहीं, केरल में भी एक डॉक्‍टर इसी वजह से संक्रमण की चपेट में आ गया. इसके अलावा जहां-जहां डॉक्‍टर बिना सुरक्षा उपायों के संक्रमित लोगों के संपर्क में आए उन्‍हें भी 14 दिन के लिए अलग-थलग कर दिया गया है. सोचिए क्‍या होगा अगर हर स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी को ऐसे ही अलग-थलग किया जाता रहा. कुछ ही समय बाद इलाज कराने के लिए डॉक्‍टर मिलना मुश्किल हो जाएगा.

सिंगापुर और हांगकांग से सबक ले सकते हैं दुनिया भर के देश
ऐसे में हमसे बहुत पहले वायरस की चपेट में आए दो देशों सिंगापुर और हांगकांग से सबक लिया जा सकता है. दोनों देशों मं जनवरी के आखिरी सप्‍ताह में पहला मामला सामने आया था. इसके बाद संक्रमण के नए मामलों की संख्‍या तेजी से ऊपर होती गई. अधिकारियों ने तुरंत सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंददी लगा दी. लोगों को घर पर रहकर ही काम करने का निर्देश दे दिया गया. सोशल डिस्‍टेंसिंग को प्रोत्‍साहित किया गया. जितना जल्‍दी हो सका दोनों देशों ने मेडिकल टेस्टिंग की संख्‍या में तेजी से इजाफा किया. ये सभी कदम बेकार चले जाते अगर वायरस स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों में फैल जाता.

सर्जिकल मास्‍क, ग्‍लब्‍स पहनें स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी, हाथों को भी धोते रहें
सिंगापुर और हांगकांग में भी भारत की तरह प्राथमिक उपचार केंद्रों पर स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के लिए पर्याप्‍त गाउन व N95 मास्‍क उपलब्‍ध नहीं थे. शुरुआत में मेडिकल टेस्‍ट की भी पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं थी. बावजूद इसके उन्‍होंने 6 सप्‍ताह के भीतर संक्रमण पर काबू पा लिया. अस्‍पतालों में संक्रमित लोगों की संख्‍या तेजी से घटी है. अब वहां कारोबारी और सरकार कार्यालय खुलने शुरू हो गए हैं. अब इन दोनों देशों का पूरा जोर देश में सामने आ रहे नए मामलों को काबू करने पर है. दोनों देशों ने अपने स्‍वास्‍यिकर्मियों को किसी भी बीमारी की शिकायत लेकर आए मरीज के संपर्क में आने के दौरान सर्जिकल मास्‍क, ग्‍लब्‍स पहनने और बार-बार हाथों को सैनेटाइज करने को अनिवार्य कर दिया. साथ ही मरीज और डॉक्‍टर के बीच मौजूद हर तरह की सतह को संक्रमणमुक्‍त रखने का निर्देश दिया.

डॉक्‍टर्स को संक्रमण से बचे रहने के लिए कई तरह की एहतियात बरतनी होंगी. डॉक्‍टर्स 6 फीट की दूरी से ही मरीजों से बात करें.


डॉक्‍टर भी मरीजों के साथ 6 फीट की दूरी पर रहकर ही करें बात
संक्रमण के संदिग्‍ध मरीजों को बाकी मरीजों से अलग रखा गया. उनका इलाज करने की भी अलग व्‍यवस्‍था कर दी गई. यहां तक कि उनका इलाज करने के लिए भी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की अलग टीमें बनाई गईं. क्‍लीनिकों और अस्‍पतालों में भी सोशल डिस्‍टेंसिंग को अपनाया गया. वेटिंग रूम्‍स में चेयर्स भी 6 फीट की दूरी पर रखी गईं. स्‍टाफ के लोगों को भी तय दूरी पर रहकर बात करने के निर्देश दिए गए. साथ ही कहा गया कि डॉक्‍टर भी 6 फीट की दूरी से ही मरीजों से बात करें. जांच करने की जरूरत होने पर ही मरीज के नजदीक जाएं. उन्‍होंने किसी अस्‍पताल या प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में या क्‍लीनिक में किसी कर्मचारी के अचानक पॉजिटिव निकल आने पर पूरे परिसर को बंद नहीं किया. उन्‍होंने उस संक्रमित कर्मी के संपर्क में आए लोगों को ढूंढा.

दिन में दो बार अपना टैम्‍प्रेचर चेक करते रहें सभी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी
हांगकांग में उन्‍होंने संक्रमित स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी के नजदीकी संपर्क में आए लोगों को खोजा. इसमें भी नजदीकी संकर्प को परिभाषित किया गया. नजदीकी संपर्क में 15 मिनट तक बिना मास्‍क लगाए 6 फीट से कम दूरी से बातचीत करने वाले लोगों की ही जांच की गई. वहीं, सिंगापुर में बाकी सभी नियमों के साथ 30 मिनट तक संपर्क में रहने का नियम रखा गया. अगर किसी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी ने 6 फीट से कम दूरी पर रहकर अपने साथी कर्मी से दो मिनट से ज्‍यादा लेकिन तय समय से कम देर तक बात की है तो वो सर्जिकल मास्‍क, ग्‍लब्‍स पहनकर ड्यूटी पर रह सकता है. ऐसे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी का दिन में दो बार टैम्‍प्रेचर लिया गया. ऐसे लोगों को खुद पर नजर रखने को कहा गया. इससे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों में संक्रमण नहीं फैल पाया.

सरकार प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों तक पहुंचाएं पर्याप्‍त मास्‍क-ग्‍लब्‍स
सिंगापुर में अब तक एक भी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी के संक्रमण का शिकार होने की जानकारी सामने नहीं आई है, जबकि हाल में वहां एक निमोनिया का गंभीर मरीज कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने से पहले करीब 41 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के संपर्क में आया था. सिंगापुर में करीब 85 फीसदी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी सिर्फ फेस मास्‍क का इस्‍तेमाल कर रहे हैं. वे सिर्फ बार-बार हाथ धोने के निर्देश का पालन कर संक्रमण से बचाव में सफल हो रहे हैं. लिहाजा, सभी देशों को अपने स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को बचाव के सभी निर्देश देकर संक्रमण से बचाए रखना चाहिए ताकि मरीजों को इलाज मिलता रहे और कोरोना वायरस को हराया जा सके. साथ ही सरकारों को भी सभी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों तक मास्‍क, ग्‍लब्‍स तत्‍काल पहुंचाने चाहिए.

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First published: March 22, 2020, 9:28 PM IST
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