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Coronavirus से कैसे उबरेगी दुनिया और कब पटरी पर लौटेगी रोजमर्रा की जिंदगी

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 2:42 PM IST
Coronavirus से कैसे उबरेगी दुनिया और कब पटरी पर लौटेगी रोजमर्रा की जिंदगी
कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भारत के 12 राज्‍यों में लॉकडाउन कर दिया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि स्थिति कब और कैसे सामान्‍य होगी.

चीन से बाहर निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए हैं. दुनिया भर में 100 करोड से ज्‍यादा लोग संक्रमण के डर से अपने घरों में कैद हैं. भारत में 12 राज्‍यों को लॉकडाउन कर दिया गया है. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि दुनिया इस वैश्विक महामारी (Pandemic) से कैसे और कब उबरेगी?

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  • Last Updated: March 23, 2020, 2:42 PM IST
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चीन ने कोरोना वायरस (Coronavirus) पर काबू पा लिया है. वहीं, दूसरे देशों में हालात हर दिन खराब हो रहे हैं. संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ज्‍यादातर देश लॉकडाउन का सहारा ले रहे हैं ताकि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन पर अंकुश लगाया जा सके. भारत में 12 राज्‍यों में लॉकडाउन (Lock-Down) की घोषणा कर दी गई है. लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं ताकि वायरस की चपेट में आने से बच सकें. इस बीच ज्‍यादातर लोग जानने चाहते हैं कि दुनिया इस वैश्विक महामारी से कैसे उबरेगी और कब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पटरी पर लौटेगी? इस बारे में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) समेत दुनिया भर के विशेषज्ञों व संस्‍थाओं की राय लगभग एक जैसी ही है.

डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा, वैक्‍सीन बनने में लगेगा एक साल
डब्‍ल्‍यूएचओ की चीफ साइंटिस्‍ट डॉ. सौम्‍या स्‍वामीनाथन ने News 18 से कहा कि कोरोना वायरस ज्‍यादा गर्मी में कुछ समय के लिए निष्क्रिय हो सकता है. हालांकि, इसके ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है. इसके बाद अनुकूल मौसम मिलते ही फिर संक्रमण फैलाना शुरू कर देगा. वहीं, इसकी वैक्‍सीन तैयार होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं. हालांकि, इसकी दवा तैयार होने की घोषणा कभी भी की जा सकती है. इसकी दवाई खोजने का काम काफी तेजी से चल रहा है. दुनिया के 5 देशों ने कोरोना वायरस के स्‍ट्रेन को अलग कर इसका इलाज खोजना शुरू कर दिया है. अगर उनकी बात मानी जाए तो हालात पूरी तरह सामान्‍य होने में एक से डेढ साल लग सकता है. हालांकि, दवाई तैयार हो जाने पर इसके संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है.

आईसीएमआर का दावा, 30 दिन में पा लेंगे नियंत्रयण



भारत की सबसे बडी मेडिकल रिसर्च संस्‍था इंडियन काउंसिल ऑफ मंडिकल रिसर्च ने दावा किया है कि 30 दिन के भीतर हम इस वायरस पर काबू पा लेंगे. आईसीएमआर के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि वायरस का स्‍ट्रेन अलग होने से वैज्ञानिकों को इसकी वैक्‍सीन बनाने में काफी मदद मिलेगी. उन्‍होंने दावा किया है कि हम जल्‍द ही इसकी वैक्‍सीन तैयार कर लेंगे. वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का मानना है कि उनका देश 12 सप्‍ताह में ये जंग जीत लेगा और कोरोना वायरस को उखाड़ फेंकेगा. वहीं, स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के मुताबिक, भले ही अगले तीन महीने में कोरोना वायरस के मामले कम हो भी जाएं, लेकिन हम इसे जड़ से उखाड़ फेंकने में कामयाब नहीं हो पाएंगे. उनका अनुमान है कि इसमें सालभर लग सकता है.

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कोरोना वायरस की वैक्‍सीन तैयार होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं. हालांकि, इसकी दवा तैयार होने की घोषणा कभी भी की जा सकती है.


'किसी देश की सरकार के पास नहीं है एग्जिट स्‍ट्रेटेजी'
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ लॉकडाउन की नीति से काम नहीं चलेगा. वहीं, बहुत लंबे समय तक पूरी दुनिया को घरों में बंद रखना संभव भी नहीं हो पाएगा. अगर ऐसा किया गया तो इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्‍परिणाम सामने आएंगे. अब दुनिया के ज्‍यादातर देशों के लोग अपनी सरकारों से एग्जिट स्ट्रेटेजी के बारे में पूछने लगे हैं ताकि प्रतिबंध हटाए जाएं और सब सामान्य हो सके. लेकिन, यह भी सच है कि प्रतिबंध हटाते ही वायरस लौटेगा और मामले तेजी से बढ़ेंगे. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिनब्रा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग महामारी विज्ञान के प्रोफेसर मार्क वूलहाउस कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी समस्या इससे बाहर निकलने की नीति को लेकर है. ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के किसी भी देश के पास एग्जिट स्ट्रेटेजी नहीं है.

वैश्विक महामारी से बच निकलने के हैं तीन ही रास्‍ते
कोरोना वायरस इस समय की सबसे बड़ी वैज्ञानिक और सामाजिक चुनौती है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक महामारी से निकलने के तीन ही रास्ते हैं. एक इसकी वैक्‍सीन तैयार कर ली जाए. दूसरा, लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए तैयार हो जाए. ब्रिटेन के पीएम ने शुरुआत में इसी तरीके की बात की थी. उन्‍होंने हर्ड इम्‍युनिटी की बात की थी ताकि वायरस महामारी न बन पाए. वहीं, तीसरा तरीका है कि लोग अपने व्यवहार में स्‍थायी बदलाव ले आएं. ये तीनों ही तरीके वायरस के फैलने की रफ्तार पर इमरजेंसी ब्रेक लगा देंगे. इनमें से हर एक रास्ता वायरस के फैलने की क्षमता को कम करेगा. हालांकि, हर्ड इम्‍युनिटी को लेकर ब्रिटेन में विवाद हो गया था.

सीधे मानव शरीर पर वैक्‍सीन ट्रायल की दी छूट
वैश्विक महामारी से फैल रही बर्बादी को देखते हुए वैज्ञानिकों को पहले जानवरों के बजाय सीधे मानव शरीर पर कोरोना वायरस की वैक्‍सीन के परीक्षण की छूट दे दी गई है. अमेरिका में कोरोना वायरस वैक्‍सीन का एक व्‍यक्ति पर परीक्षण किया जा चुका है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस की वैक्‍सीन पर शोधकार्य बहुत ही तेज रफ्तार से चल रहा है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि यह सफल होगा ही. वहीं, इसके बाद प्रोडक्‍शन ट्रायल और बिजनेस प्रोडक्‍शन में भी वक्‍त लगेगा. वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन का अनुमान है कि अगर सब सही रहता है तो भी वैक्‍सीन बनने में 12 से 18 महीने लगेंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के इमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस को हराने के लिए पब्लिक हेल्थ को लेकर कदम उठाने की सबसे ज्‍यादा जरूरत है.


'लंबे समय के लिए हर चीज पर पाबंदी संभव नहीं'
ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वेलेंस कहते हैं कि हर चीज पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना संभव नहीं है. कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण अनजाने में लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ सकती है, लेकिन इसे होने में कई साल लग सकते हैं. इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर नील फर्ग्युसन कहते हैं कि हम एक स्तर पर संक्रमण को दबाने की बात कर रहे हैं. बेहतर होगा कि बहुत ही कम लोग संक्रमित हो पाएं. हालांकि, ये भी हो सकता है कि दो या इससे ज्‍यादा साल तक संक्रमण जारी रहने पर लोग इस वायरस के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लें. हालांकि, ये वो आदर्श स्थिति है, जहां पहुंचने से पहले काफी नुकसान हो चुका होगा.

लॉकडाउन हटते ही संक्रमण फैलने का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के इमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस को हराने के लिए देश सीधे अपने समुदायों को लॉकडाउन में नहीं डाल सकते. पाबंदियां हटने के बाद वायरस को सिर उठाने से रोकने के लिए पब्लिक हेल्थ को लेकर कदम उठाने की सबसे ज्‍यादा जरूरत है. माइक ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि हमें रोगियों को खोजने पर सबसे ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत है. इसके बाद कोरोना वायरस संक्रमितों को अलग कर उनके संपर्क में आए लोगों को ढूंढें और उन्हें भी अलग करें. अगर हम मजबूत आम स्वास्थ्य सुरक्षा के कदमों को प्रभाव में नहीं लाते हैं तो लॉकडाउन खत्म होते ही वायरस के वापस लौटने का खतरा बना रहेगा.

संकट से उबरने में लग सकते हैं करीब 18 महीने
प्रोफेसर वूलहाउस कहते हैं कि हम व्यवहार में हमेशा के लिए बदलाव कर संक्रमण का स्तर कम कर सकते हैं. Covid-19 के लिए दवाई विकसित करने के बाद इसका उपयोग उन लोगों पर कर सकते हैं, जिनमें इसके लक्षण दिखे हों. इससे संक्रमण फैलने से रोका जा सकेगा. वहीं, ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार प्रोफेसर क्रिस विटी ने कहा कि सिर्फ और सिर्फ एक वैक्‍सीन ही दुनिया को इस वायरस से स्‍थायी तौर पर बचा सकती है. बाकी सभी उपायों से संक्रमण के फैलने की गति को कम किया जा सकता है. अब अगर डब्‍ल्‍यूएचओ की चीफ साइंटिस्‍ट डॉ. सौम्‍या स्‍वामीनाथन और प्रोफेसर क्रिस विटी की बातों के मायने निकाले जाएं तो दुनिया को इस संकट से निपटने में 12 से 18 महीने का वक्‍त लग सकता है. इससे पहले तक कोरोना वायरस से बचाव ही सबसे कारगर हथियार है.

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First published: March 23, 2020, 2:07 PM IST
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