• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • जानें क्‍या धरती से हर 20 मिनट में लुप्त हो रही है जीव-जंतुओं की एक प्रजाति

जानें क्‍या धरती से हर 20 मिनट में लुप्त हो रही है जीव-जंतुओं की एक प्रजाति

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में कई ऐसे जीव-जंतुु होंगे, जिनकी कई प्रजातियां विलुप्‍त हो चुकी होंगी.

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में कई ऐसे जीव-जंतुु होंगे, जिनकी कई प्रजातियां विलुप्‍त हो चुकी होंगी.

वैज्ञानिकों ने करीब एक दशक पहले अनुमान लगाया था कि धरती पर जीव-जंतुओं की 87 लाख प्रजातियां मौजूद हैं. वहीं, किताब 'इकोलॉजिकल कॉसिक्‍वेंसेस ऑफ इंक्रीजिंग क्रॉप प्रोडक्टिविटी' में ही लिखा है कि धरती से हर 20 मिनट में एक प्रजाति विलुप्‍त हो जाती है.

  • Share this:
    पृथ्वी पर मानव आबादी (Human Population) में लगातार इजाफा हो रहा है. वहीं, दूसरी ओर जीव-जंतुओं की प्रजातियां (Species) लुप्त हो रही हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, धरती पर हर 20 मिनट पर मानव आबादी में 3,500 का इजाफा हो रहा है तो जीव-जंतुओं की एक प्रजाति लुप्त हो रही है. अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो 30 साल में धरती की 20 फीसदी प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी.

    यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, धरती पर मानव अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जल स्रोतों (Water resources), जंगलों (Forests), जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों और दलदली वन क्षेत्रों के महत्व का जिक्र किया गया था. साथ इसमें कहा गया था कि मानव खुद ही इन्हें मिटाने पर तुला है. इसी रिपोर्ट के अनुसार, हर घंटे धरती पर 240 एकड़ जंगल खत्म हो रहे हैं, जिसकी वजह से जैव संपदा की 75 फीसदी विविध किस्में लुप्त हो चुकी हैं.

    सभी जीव-जंतुओं की पहचान में लगेंगे 1,000 साल
    दुनिया का तापमान बढ़ रहा है, मौसम बदल रहे हैं, फसलों का चक्र तबाह हो रहा है, जीव जंतुओं के रहने की जगह खत्म हो रही है. इन सबकी वजह से जैव विविधता को खतरा है. भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य की रूपरेखा के तहत 2020 तक जैव विविधता संरक्षण को केंद्र और राज्यों की योजना प्रक्रियाओं में अनिवार्य रूप से शामिल करने व जैव संसाधनों के नष्‍ट होने और दोहन को रोकने के लिए राष्ट्रीय नीति क्रियान्वित करने की बात की गई है.

    'इकोलॉजिकल कॉसिक्‍वेंसेस ऑफ इंक्रीजिंग क्रॉप प्रोडक्टिविटी' के प्रिफेस में ही लिखा है कि धरती से हर 20 मिनट में एक प्रजाति विलुप्‍त हो जाती है.


    करीब एक दशक पहले ही वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि दुनिया में जीव-जंतुओं की करीब 87 लाख प्रजातियां हैं, लेकिन इनमें कई की पहचान अभी भी नहीं हो पाई है. वैज्ञानिकों ने पेड़-पौधों की पत्तियों और शाखाओं के अध्ययन के बाद ये निष्कर्ष निकाला था. उस वक्‍त उन्‍होंने कहा था कि सभी प्रजातियों की पहचान करने में कम से कम 1,000 साल लगेंगे. वैज्ञानिकों की टीम का यह शोध जर्नल पीएलओएस बायोलॉजी में छपा था, जिसमें कई प्रजातियों के जल्‍द लुप्‍त होने की चेतावनी दी गई थी.

    हर 24 घंटे में विलुप्‍त हो जाती हैं 200 प्रजातियां
    धरती पर विभिन्न प्रजातियों (Species) की संख्या का अनुमान तो लगाया जा सकता है लेकिन, इस संख्या की प्रमाणिकता हमेशा संदेह में रही है. एक किताब 'इकोलॉजिकल कॉसिक्‍वेंसेस ऑफ इंक्रीजिंग क्रॉप प्रोडक्टिविटी' के प्रिफेस में ही लिखा है कि धरती से हर 20 मिनट में एक प्रजाति विलुप्‍त हो जाती है. इस बारे में कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि हर 24 घंटे में यानी रोज करीब 200 प्रजातियां विलुप्‍त (Disappearing) हो जाती हैं. रॉयल सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष लॉर्ड रॉबर्ट ने एक आर्टिकल में लिखा था, 'हम यह तो बता सकते हैं कि अमेरिकी कांग्रेस की लाइब्रेरी में 1 फरवरी 2011 के दिन 2,21,94,656 किताबें हैं, लेकिन हम ये निश्चित तौर पर कभी नहीं कह सकते कि दुनिया में कितने प्रकार के जीव-जंतु हैं.'

    वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदूषण समेत कई दूसरों कारणों से सील जैसे जीवों की भी कई प्रजातियां पूरी तरह से गायब हो जाएंगी.


    कुल जीव-जंतुओं में जानवरों की है बड़ी आबादी
    वैज्ञानिकों की शोध टीम के एक सदस्य डेरेड टिटेनसर ने करीब एक दशक पहले कहा था कि हम कई वर्ष इस बारे में सोचते रहे हैं. हमने कई तरह के एप्रोच से इन नंबरों की जांच की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. ये आखिरी मौका था और ये आखिरी उपाय जिसमें हमें सफलता मिल गई. डॉ. टिटेनसर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम के विश्व संरक्षण मानिटरिंग केंद्र से जुड़े थे. तब वह ब्रिटेन में रहते थे.

    डॉ. टिटेनसर ने कनाडा की डलहौजी और हवाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर इस योजना पर काम किया था. शोध के अनुसार 87 लाख जीव-जंतुओं में बड़ी आबादी जानवरों की है, जबकि पौधे, प्रोटोजोआ, फंगी, अल्गी की संख्या थोड़ी कम है. इन आंकड़ों में बैक्टीरिया और कुछ अन्य सूक्ष्म जीवों को शामिल नहीं किया गया. शोध में करीब सवा लाख जीव-जंतुओं और पौधों की पहचान भी की गई. इनमें अधिकतर जमीन पर रहने वाले हैं.

    ये भी देखें:

    टैक्‍सी ड्राइवर, शेफ और रिटेल स्‍टोर सहायकों जैसे कामगारों को कोविड-19 से जान का खतरा ज्‍यादा

    कोरोना वायरस के डर से सो तक नहीं पा रहे भारतीय, दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के केस

    जानें क्‍या कोरोना संकट के बीच सुरक्षित है एसी ट्रेन से सफर करना

    लॉकडाउन के दौरान दुनिया के कुछ नेताओं की लोकप्रियता बढ़ी, मोदी सबसे ऊपर

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज