जो एक बार कोरोनाग्रस्त हो चुका, क्या वाकई उसे दोबारा नहीं हो सकता संक्रमण?

जो एक बार कोरोनाग्रस्त हो चुका, क्या वाकई उसे दोबारा नहीं हो सकता संक्रमण?
न्यूज़18 क्रिएटिव

मीडिया में आ रही खबरों को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है क्योंकि कई बार तथ्य होते नहीं या छुपाकर दर्ज किए जाते हैं. कोरोना वायरस संबंधी कुछ खबरों में इस तरह के दावे से आप चौंक सकते हैं लेकिन इस बारे में आपको जागरूक होने की ज़रूरत है क्योंकि इस दावे को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. जानें पूरा ब्योरा.

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अगर आप एक बार कोरोना वायरस (Corona Virus) की चपेट में आ चुके हैं तो आपको दोबारा संक्रमण (Reinfection) नहीं हो सकता, विशेषज्ञों के हवाले से इस तरह का दावा कई मीडिया रिपोर्ट्स (Media) में किया गया है. वास्तव में, कोविड 19 (Covid 19) के दौर में कई तरह की खबरें आ रही हैं और सच क्या है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा जब विज्ञान (Science) वाकई किसी नतीजे पर पहुंचेगा, लेकिन फिलहाल यह दावा क्यों और कैसे सामने आया है, यह जानना चाहिए.

जिन मरीज़ों में दोबारा मिला कोरोना, उनकी जांच
कोरोना वायरस के खिलाफ मज़बूती से लड़ने और एक तरह से जंग जीतकर मिसाल बनने वाले देश दक्षिण कोरिया (South Korea) के रोग निवारण केंद्र यानी सीडीसी (CDC) ने यह दावा किया है. कहा गया है कि कोविड 19 के 10 हज़ार से ज़्यादा केसों और 245 मौतों के बाद दक्षिण कोरिया में करीब 280 ऐसे मरीज़ (Corona Positive) सामने आए, जिनमें दोबारा संक्रमण की आशंका थी, तब इनकी जांच की गई.


क्या इम्यूनिटी नहीं हुई पैदा? जांच के बाद दावा


एक बार संक्रमित होकर क्या इन मरीज़ों में इम्यूनिटी पैदा नहीं हुई थी, जो दोबारा वायरस की चपेट में आए? यह चिंता उभरी तो जेनेटिक विश्लेषण संबंधी जांचें की गईं तो इम्यून सिस्टम में किसी भी प्रभावशाली बदलाव के कारण नहीं दिखे. माना गया कि एंटीजन के लिए की जाने वाली खून की जांच (पॉलिमइरेज़ चेन रिएक्शन यानी पीसीआर) में गड़बड़ी से पॉज़िटिव रिपोर्ट आई.

यह दावा किया गया कि इस जांच में यह साबित नहीं हुआ कि खून के नमूने में दिख रहा वायरस क्या है. यानी मरीज़ के ठीक होने के बाद उसके खून में मृत वायरस के अंश रह जाते हैं, जांच में ये अंश दिखे या वायरस का कोई जीवित अंश. इसी आधार पर दावा किया गया है कि किसी को दोबारा संक्रमण नहीं हो सकता.

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कई विशेषज्ञ मानते हैं कि दोबारा संक्रमण की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता. फाइल फोटो.


क्या मानते हैं विशेषज्ञ?
हाल ही विश्व् स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि जो लोग कोविड 19 संक्रमण से ठीक हो चुके हैं और एंटीबॉडीज़ विकसित कर चुके हैं, उन्हें दूसरी बार संक्रमण नहीं हो सकता, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है. डब्ल्यूएचओ ने यह बात तब कही थी, जब कुछ देशों में इम्यूनिटी पासपोर्ट जारी कर संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को प्रतिबंध के दायरे से बाहर लाने के कदम के बारे में चर्चा की थी.

दूसरी तरफ, अभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की राय इस मामले में बंटी हुई है. फॉरेन पॉलिसी की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञों को अभी तक इस बारे में ज़्यादा नहीं पता है कि एक बार संक्रमण के बाद दूसरी बार हो सकता है या नहीं, इम्यूनिटी विकसित होने पर कब तक रहती है या मरीज़ में इम्यूनिटी विकसित हो गई इसका पता कैसे चले.

इसी बारे में, बीजिंग स्थित चीन जापान फ्रेंडशिप अस्पताल के विभागीय निदेशक ली किन्गुयान के हवाले से एक हफ्ते पहले ही इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट में कहा गया था कि जो लोग कोविड 19 से संक्रमित होने के बाद सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज़ विकसित कर चुके हैं, उनके बारे में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि उनका यह सुरक्षा कवच कब तक के लिए है.

इसी तरह, हफपोस्ट ने टेक्सस मेडिकल स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीटर जुंग के हवाले से लिखा कि कोई भी इस बारे में निश्चित नहीं है, लेकिन इतना कहा जा सकता है कि जिस तरह फ्लू रूपांतरित होता है, कोविड 19 भी हो सकता है और इस​ स्थिति में पहले संक्रमित हो चुके किसी व्यक्ति में दोबारा संक्रमण की आशंका हो सकती है.

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