क्या नासा की सालों की मेहनत पर पानी फेर चुका है चीन का स्पेस प्रोग्राम?

चीन जल्द ही अपना पहला स्पेस स्टेशन लॉंच करने की तैयारी में है.
चीन जल्द ही अपना पहला स्पेस स्टेशन लॉंच करने की तैयारी में है.

चीन का दावा है कि अंतरिक्ष में तेज़ी से बढ़ती मौजूदगी वैज्ञानिक संभावनाओं की तलाश के लिए है, तो अमेरिका का आरोप है कि चीन (US vs China) स्पेस में जंग करने के मंसूबे रखता है. यह अमेरिकी बौखलाहट है या चीनी चालबाज़ी?

  • News18India
  • Last Updated: October 6, 2020, 7:44 AM IST
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चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की शाखा के तौर पर काम करने वाली अंतरिक्ष एजेंसी (CMSA) ​को पिछले महीने ही चीन के स्पेस स्टेशन (Space Station of China) के पहले मॉड्यूल Tianhe के लिए हरी झंडी मिल चुकी है. CMSA ने इस स्टेशन के लिए 18 नए अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को चुन भी लिया है. लेकिन चीन का यह कदम अमेरिका के गले नहीं उतर रहा है. अमेरिका इससे न केवल खतरा महसूस कर रहा है बल्कि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अंतरिक्ष को जंग का मैदान बनाने के इस खेल से दोनों ताकतों के बीच युद्ध के हालात बन सकते हैं.

अस्ल में, अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन की इस साल चीन पर फोकस रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि चीन के निशाने पर अमेरिका बराबर बना हुआ है. साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और मनोवैज्ञानिक मोर्चों पर युद्ध की कवायद के साथ ही चीन पर अमेरिका ने अंतरिक्ष में युद्ध संबंधी नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप भी रिपोर्ट में लगाया है. अब सवाल ये है कि अमेरिका इतना बौखलाया क्यों है? क्या अंतरिक्ष की रेस में चीन वाकई अमेरिका को मात दे रहा है?

'चीन को सोवियत संघ जैसा न समझा जाए'
विदेशी मीडिया में चीन की वायु सेना के मेजर जनरल कायो लियांग के हवाले से यह बयान आया कि चीन को सोवियत संघ समझना अमेरिका की भूल होगी. 'अगर अमेरिका यह सोचता है कि वह चीन को हथियारों की रेस में घसीटकर सोवियत की तरह उसे नेस्तनाबूद कर देगा, तो अंजाम यह हो सकता है कि जो नेस्तनाबूद होगा, वह चीन नहीं होगा.'
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कैसे बढ़ रहा है चीन का दबदबा?
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की डिफेंस नीति उसके अंतरिक्ष और साइबर स्पेस कार्यक्रमों के हिसाब से ही डिज़ाइन की गई है. इस रिपोर्ट में स्पेस में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर काफी चिंताएं ज़ाहिर की गई हैं. इसी तरह, वॉशिंग्टन के एक थिंक टैंक ने माना है कि फिलहाल चीन अंतरिक्ष शक्ति के मामले में अमेरिका और रूस से पीछे ज़रूर है, लेकिन साल 2030 तक चीन अव्वल हो सकता है.

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इस दावे के पीछे चीन की मिलिट्री इंटेलिजेंस संबंधी सैटेलाइटों के नेटवर्क का लगातार बढ़ना और पिछले साल 32 रॉकेटों की सफल लॉंचिंग को प्रमुख आधार समझा गया है. क्योंकि पिछले साल में अमेरिका ने 21 ऐसी लॉंचिंग की और चीन लगातार दूसरे साल इस मामले में आगे रहा.

कैसा होगा चीन का स्पेस स्टेशन?
चीन के इस कदम को अमेरिका यही मान रहा है कि चीन अंतरिक्ष को भी युद्ध का मैदान बना रहा है. कहा गया है कि चीन का पहला स्पेस स्टेशन लड़ाकों वाला होगा. 2021 में लॉंच होने की संभावनाओं के साथ, खबरें कह रही हैं कि यह स्टेशन 380 किलोमीटर के अल्टिट्यूड पर कक्षा में 41 से 43 डिग्री तक झुकाव के साथ होगा.

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अमेरिका में 15 सदस्यों वाले थिंक टैंक चाइना टास्क फोर्स ने एक ब्लूप्रिंट जारी करते हुए कहा है कि अगर 2022 तक चीन लॉंग टर्म स्पेस स्टेशन मॉड्यूल लॉंच करने में कामयाब हुआ तो वह अमेरिका की बराबरी कर लेगा.

वार और पलटवार की नौबत
अमेरिका और चीन दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाने से बाज़ नहीं आ रहे हैं. चांद पर इंसानी बेस बनाने के कदम को भी आक्रामक ठहरा रहे अमेरिका ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों को खतरनाक बताने में कसर नहीं छोड़ी है, तो दूसरी तरफ चीन ने साफ शब्दों में कहा है कि चीन को ब्लैकमेल नहीं किया जा सकता. अगर कोई मुल्क स्पेस को चौथा मैदान ए जंग बनाने पर तुला है, तो चीन इस दबाव को नहीं झेलेगा.

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अमेरिका की स्पेस फोर्स को मुंहतोड़ जवाब देने की बात कहने वाले चीन और अंतरिक्ष में व्यापक सैन्यकरण कर चुके अमेरिका, दोनों ही दक्षिण चीनी समुद्र में भी आमने सामने की स्थिति में हैं. थिंक टैंक मान रहे हैं कि स्पेस के मामले में चीन का तेज़ी से आगे बढ़ना अमेरिका के वैश्विक वर्चस्व और नासा की सालों की मेहनत के लिए खुली चुनौती बन रहा है इसलिए दोनों देश युद्ध के मुहाने पर पहुंच रहे हैं.

पेंटागन की रिपार्ट में यह भी गौरतलब है कि चीन ने पहले स्पेस स्टेशन के लिए पहली बार नागरिकों के लिए ओपन प्रक्रिया रखते हुए 2500 कैंडिडेट्स में से 7 पायलटों, 7 स्पेस फ्लाइट इंजीनियरों और चार स्पेस हथियार विशेषज्ञों का सेलेक्शन किया. इससे पहले केवल वायु सेना के पायलटों को ही ये नियुक्तियां मिलती रही थीं.
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