"समुद्र में दिखा तो मार गिराएंगे 'सिविलियन' विमान", क्या चीन ने ऐसी धमकी दी?

अभ्यास करता एक एयरक्राफ्ट. (File Photo)
अभ्यास करता एक एयरक्राफ्ट. (File Photo)

भारत और भूटान के साथ ज़मीन पर सीमा विवाद (Indo-China Border Dispute) तो समुद्र में अमेरिका के साथ चीन के स्टैंडऑफ जारी हैं. दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ समुद्र में अपनी सेनाओं की ताकत मज़बूत करने के साथ ही कुटिल चालें (US-China Tension) भी चल रहे हैं.

  • News18India
  • Last Updated: September 20, 2020, 12:09 PM IST
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भारत के साथ लद्दाख सीमा (Ladakh Border) के साथ ही चीन भूटान के साथ भी सीमा विवाद (China-Bhutan Dispute) में हाल में उलझा है. ज़मीनी सीमाओं के साथ ही चीन समुद्र में भी अपने वर्चस्व के लिए हर तरह के हथकंडे के लिए तैयार है. इसी सिलसिले में खबरें हैं कि चीन ने साफ धमकी दी है कि अगर अमेरिका के हवाई जहाज़ (US Airplanes) दक्षिण चीन समुद्र (South China Sea) में दिखाई दिए, तो बख्शे नहीं जाएंगे. अस्ल में, चीन का गंभीर आरोप यह है कि अमेरिका उसके इलाकों की जासूसी (US Spy) के लिए गलत हथकंडे अपना रहा है.

आपको जानकर हैरत हो सकती है कि साउथ चाइना सी में दबदबे की लड़ाई किस कदर बड़ी हो चुकी है. यहां अमेरिका और चीन एक दूसरे के खिलाफ कई तरह के हथकंडे अपनाने में लगे हैं. चीन का आरोप है कि दूसरे देशों के साथ मिलकर अमेरिका उसकी सीमाओं में दखल दे रहा है, तो वहीं अमेरिका यहां अपने वर्चस्व के लिए चीन के सताए हुए देशों के लीडर के तौर पर ज़ोर आज़माइश से गुरेज़ भी नहीं कर रहा है. जानिए क्या है ये पूरा माजरा.

क्या है चीनी थिंक टैंक का आरोप?
साउथ चाइना सी रणनीति से जुड़े एक इनिशिएटिव (SCSPI) बीजिंग का एक थिंक टैंक है, जिसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि अमेरिका जासूसी और चीनी इलाकों की निगरानी के लिए दूसरे देशों के नागरिक विमानों का इस्तेमाल कर रहा है. चीनी विदेश मंत्री वांग वेनबिन ने कहा कि दूसरे देशों के ​नागरिक विमान इलेक्ट्रॉनिक रूप से सामान्य प्लेनों की तरह ट्रैक होते हैं, इसलिए अमेरिका की यह पुरानी चाल रही है.
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साउथ चाइना सी के विवादित क्षेत्र में पिछले दिनों अमेरिकी जहाज़ों की घुसपैठ की खबरें थीं. (File Photo)


एक हालिया घटना बताते हुए SCSPI ने कहा कि 8 से 10 सितंबर के बीच एक विमान ने समुद्र में पारासेल द्वीप, ताइवान स्ट्रेट और पीले समुद्र के पास काफी सघन निगरानी की. रडार में यह मलेशिया का सिविलियन प्लेन नज़र आ रहा था, लेकिन अस्ल में यह अमेरिकी वायु सेना का जासूसी विमान था. इस रिपोर्ट के बाद चीन ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेताया.

चीन ने कहा कि वह ज़िम्मेदार नहीं होगा!
वेनबिन ने साफ कहा कि अमेरिका ने ऐसी हरकतें जारी रखीं तो भविष्य में समुद्र या हवा में होने वाली दुर्घटनाओं के लिए वो खुद ज़िम्मेदार होगा. SCSPI ने यह भी कहा कि अमेरिका की ऐसी हरकतों की वजह से सिविलियन विमानों की उड़ानों को भी खतरा होगा क्योंकि नकली बहरूपिये विमानों की तस्दीक में हो सकता है कि कोई वास्तविक सिविलियन विमान भी गलती से चपेट में आ जाए.

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ऐसा ही एक केस 1983 में तब हुआ था, जब सोवियत संघ ने एक कोरियाई सिविल विमान को मार गिराया था क्योंकि उसके अमेरिकी जासूसी विमान होने का शक था, जिसमें 269 लोगों की मौत हो गई थी.

चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रहा द्वंद्व
दक्षिणी चीन समुद्र में चीन का अमेरिका व अन्य देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है. हाल में, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की एयर फोर्स ने चीनी रिपब्लिक के तहत दावे वाले ताइवान की सीमा पर लगातार दो दिनों तक हवाई ड्रिल करवाई. इससे नाराज़ हुए ताइवान ने अपने इंटरसेप्टरों और एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइलों को मुस्तैद कर दिया. यानी चीन जो आरोप अमेरिका पर लगा रहा है, वही ताइवान चीन पर.

इससे पहले, पिछले महीने SCSPI ने दावा किया था कि अमेरिका के एक जासूसी विमान EP-3E ने ताइवान में लैंडिंग की और यह जानकारी संस्था को ओपन सोर्स आइ​डेंटिफिकेशन से मिली. लेकिन, ताइवान ने इस तरह के दावों को बकवास करार देकर तथ्यहीन बताया था.
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