क्या भारत ने सऊदी अरब और यूएई को पाकिस्तान से दूर किया?

कॉंसेप्ट इमेज.

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मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति भारत के लिए अहम है और भारत मुस्लिम देशों (Muslim Nations) के लिए. इस्लामी दुनिया के देश जब कोई डील करते हैं और वो भी भारत के सहयोगी देश के साथ, तो इससे सीधे तौर पर भारत जुड़ ही जाता है. अब समझना ये है कि भारत के पक्ष में उठने वाले मुस्लिम देशों के कदम पाकिस्तान की कैसे फजीहत करते हैं.

  • News18India
  • Last Updated: August 17, 2020, 12:51 PM IST
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कहते हैं ब्रह्मांड में हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है और एक दूसरे को प्रभावित करती है. फिर केवल मध्य पूर्व व दक्षिण एशिया (South Asia) की बात हो तो यह ब्रह्मांड का छोटा सा हिस्सा है. ज़ाहिर है कि अरब देशों (Arab Countries) की हलचलें भारत में न सिर्फ महसूस की जाती हैं, बल्कि अरब देश और भारत एक दूसरे को प्रभावित करते हैं. इज़राइल (Israel) और संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) के बीच कोई समझौता होता है, तो भारत और पाकिस्तान (India & Pakistan) इसके असर से अछूते कैसे रह सकते हैं.

विशेषज्ञों की मानें तो मुस्लिम देशों की जो दुनिया (Islamic World) है, फिलहाल वो तीन खेमों में बंटी हुई है. ईरान (Iran) अकेले एक खेमा बनाए खड़ा है तो दूसरे खेमे का नेतृत्व सऊदी अरब और यूएई (Saudi Arabia & UAE) कर रहे हैं और तीसरा खेमा तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान के गठजोड़ वाला है. माना जा रहा है कि यूएई के इज़राइल के समर्थन में आने से मुस्लिम देशों के बीच ये खेमेबाज़ी और बढ़ने वाली है. इस पूरे किस्से और इसमें भारत के एंगल को समझना ज़रूरी हो जाता है.

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सऊदी अरब प्रिंस के साथ भारतीय पीएम मोदी और तस्वीर के दूसरे हिस्से में पाकिस्तान पीएम इमरान खान.




क्या है अब्राहम एग्रीमेंट?
बीते 13 अगस्त को इज़राइल और यूएई दोनों शांति के लिए एक समझौते पर राज़ी हुए. अब अगर ये समझौता हो जाता है तो इज़राइल के साथ ज़ाहिर तौर पर शांतिपूर्ण संबंध बनाने वाले मिस्र और जॉर्डन के बाद यूएई तीसरा अरब देश होगा. यही नहीं यूएई ऐसा करने वाला पहला देश होगा, जो फारस की खाड़ी में स्थित है. इस समझौते के तहत इज़राइल ने वेस्ट बैंक के हिस्सों पर कब्ज़े का इरादा छोड़ा है और यह समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक लिहाज़ से बहुत अहम है.

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क्या है मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया?
इस समझौते पर मुस्लिम देशों की गुटबाज़ी साफ उभरकर आ गई है. एक तरफ, फलीस्तीनी नेताओं ने इस डील को फलीस्तीन के खिलाफ बताया है तो हमस ने कहा है कि अमेरिका की दलाली से हुई ये डील खारिज करने लायक है. दूसरी तरफ, इजिप्ट और जॉर्डन ने इस डील का स्वागत कर इसे शांति की दिशा में अहम बताया है. ज़ाहिर है कि इस डील का असर खाड़ी देशों के राजनीतिक रिश्तों पर अच्छा खासा पड़ने वाला है. और इससे भारत अछूता नहीं रह सकता.

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इस डील से भारत का क्या लेना देना?
मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत और इज़राइल के खयालात मेल खाते रहे हैं. भारत के संबंध न केवल इज़राइल बल्कि यूएई के साथ भी काफी बेहतर हुए हैं. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ाएद अल नाहयान ने भारत के विदेश मंत्री जयशंकर को डील के बारे में पूरी जानकारी दी और भारत ने इस डील का खुले दिल से स्वागत किया.

अब सवाल ये है कि मध्य पूर्व में अगर इज़रायल और यूएई साथ खड़े होते हैं, तो क्या पाकिस्तान दरकिनार हो जाएगा. टीआईआई की पत्रकार इंद्राणी बागची ने लिखा है कि चीन के पाले में खड़े होकर पा​क खुद को पहले ही अलग थलग कर चुका है, लेकिन वो अहम रहेगा क्योंकि मुस्लिम देशों के बीच सिर्फ वही परमाणु शक्ति है.


मध्य पूर्व के लिए भारत और पाक के समीकरण?
इज़रायल में मौजूद पत्रकार के हवाले से खबरें हैं कि सऊदी अरब और यूएई के लिए पाकिस्तान अहम साथी रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय में पाक की तुलना में भारत के साथ सऊदी और यूएई के रिश्ते नाटकीय ढंग से बेहतर हुए हैं. इसका एक उदाहरण यह है कि सऊदी व यूएई के प्रभुत्व वाली संस्था इस्लामी कोऑपरेशन (OIC) ने पिछले साल की मीटिंग में पाक के विरोध के बावजूद भारत को ऑब्ज़र्वर के तौर पर बुलाया था.

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सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कड़वाहट आई है.


यही नहीं बल्कि पाक लगातार यह मांग करता रहा है कि OIC कश्मीर मुद्दे पर एक बैठक करे और भारत के रुख के खिलाफ मुस्लिम देश उसके समर्थन में आएं, लेकिन पाक की इस मांग पर भी यह संस्था तवज्जो नहीं दे रही है. साथ ही, पाकिस्तान लगातार भारत पर 'इस्लामोफोबिया' फैलाने के आरोप भी लगा रहा है.

पाकिस्तान की कैसे हो रही है फजीहत?
स्थिति यह नज़र आ रही है कि सऊदी अरब और यूएई के वर्चस्व वाले मध्य पूर्व में पाकिस्तान फिलहाल होल्ड पर रखा हुआ देश है. भारत के साथ संबंध बेहतर होने के बीच मालदीव ने भी भारत पर पाकिस्तान के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है. एक रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक के बाद भी सऊदी अरब और यूएई भारत के साथ नज़दीकी संबंधों में दिलचस्पी रखे हुए हैं.

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पाक पर और दबाव
सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर हाल में काफी दबाव बना दिया है. न केवल पाक को तेल की सप्लाई बंद कर दी गई है बल्कि लोन में दी गई अरबों डॉलर की काफी बड़ी रकम की वसूली करने के लिए भी सऊदी अरब ने पाकिस्तान को समन भेजने शुरू कर दिए हैं. इस बारे में आपको न्यूज़18 ने बताया था कि कैसे पाकिस्तान इस डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ था.

पूरी तस्वीर ये है कि सऊदी अरब और यूएई के रिश्ते भारत के साथ काफी बेहतर बने हुए हैं और पाकिस्तान के साथ अहम रहे संबंधों में कड़वाहटें पैदा हुई हैं. ऐसे में यूएई और इज़रायल के साथ आने का स्वागत भारत करेगा ही क्योंकि दोनों ही देश उसके लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने के लिए अहम हैं.


इज़रायल और यूएई के साथ आने के कदम पर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सऊदी अरब भी साथ दे सकता है क्योंकि वो लंबे समय से राजनीतिक रूप से इज़रायल के साथ रहा है. पहले भारत और इज़रायल के बीच एक एयरलाइन के लिए सऊदी अरब ने अपना एयरस्पेस खोला था. ये भी माना जा रहा है कि सऊदी अरब, यूएई और इज़रायल का एक पाले में होने की बड़ी वजह है, तीनों की ईरान के साथ दुश्मनी.

उम्मीद ये भी की जा रही है कि यूएई शांति के जिस रास्ते पर चला है, और भी मुस्लिम देश उस पर आएंगे. अब गणित इस तरह है कि ईरान के खिलाफ ये तीन शक्तियां हैं, ईरान ने पिछले दिनों चीन के साथ एक बड़ी डील की है, पाकिस्तान चीन का पिट्ठू है... यानी तार एक दूसरे से जुड़कर समीकरण रच रहे हैं.
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