अमेरिकी शह, QUAD का साथ... क्या समुद्र में चीन के खिलाफ खड़ा होगा भारत?

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चीन को नाराज़ न करने की लंबे समय से भारत की नीति बदलने की ज़रूरत बनी रही है. अब हालात बदले हैं और सवाल ​है कि क्या भारत अपनी भूमिका और नीति में बदलाव करेगा? इस सवाल के जवाब के साथ ही भौगोलिक स्थिति, QUAD देशों की मौजूदा रणनीति और उस पर आधारित विश्व राजनीति को समझना ज़रूरी है.

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पिछले काफी समय से चीन की नाराज़गी मोल न लेने के लिए भारत ने चीनी नीति (China Policy of India) के तहत विरोधी रवैया नहीं अपनाया. एक तरफ भारत ने दलाई लामा (Dalai Lama) की तिब्बत सरकार (Tibet Government) को देश में शरण भी दी तो दूसरी तरफ, 'एक चीन' नीति (One China Policy) पर हामी भरने से भी पीछे नहीं रहा. हांगकांग की बात हो या ताईवान या मकाउ की, भारत ने चीन के खिलाफ मुंह खोलने से परहेज़ ही किया.

भले ही भारत का रवैया सहयोगी रहा हो, लेकिन चीन ने इसे भारत की कमज़ोरी ही समझा और कश्मीर (Jammu & Kashmir) से अरुणाचल तक उसने भारत के हिस्से हथियाने की रणनीति को ही हवा दी. लंबे समय से भारत की चीन नीति की समीक्षा की मांग और ज़रूरत बनी हुई है. शी जिनपिंग (Xi Jinping) की हमलावर विस्तारवादी नीतियों के और QUAD की हालिया स्थितियों और शह के चलते भी भारत के नज़रिये में बदलाव के लिए समय मुफीद माना जा रहा है.

भारत ने दिए चीन के खिलाफ इशारे?
बीते शुक्रवार को ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण चीनी समुद्र अंतर्राष्ट्रीय आवागमन और व्यापार के लिए साझा जगह है. यहां अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के पालन के साथ ही, शांति और स्थिरता का माहौल ज़रूरी है. भारत के इस बयान को कई अर्थों में समझा जा रहा है, जिसका पहला और सीधा संकेत यही है कि अब तक इस क्षेत्र में तकरीबन उदासीन रहा भारत अहम बदलाव की तरफ है.
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कई पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद में उलझा है चीन.


लेकिन सवाल है कि ऐसा क्यों? इसलिए कि QUAD समूह के अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत, चारों ही देश एक तरह से चीन के खिलाफ नज़र आ रहे हैं. इसकी वजह यही है कि लद्दाख में चीन ड्रैगन फुफकार रहा है, तो सेंकाकू द्वीपों को लेकर जापान के साथ चीन भिड़ गया है. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के साथ ट्रेड वॉर में उलझा चीन, ​दक्षिण चीनी समुद्र में अमेरिकी नौसेना के खिलाफ न्यूक मिसाइलों की बात कर रहा है.

अब QUAD के चारों देश एक सुर में चीन के खिलाफ सामने आ रहे हैं, तो भारत के पुराने रवैये के बदलने को लेकर सवाल और संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं.

क्यों तटस्थ रहा भारत?
भौगोलिक रणनीतियों में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर शीत युद्ध के दौरान और उसके बाद भारत ने तटस्थता की ही नीति अपनाए रखी. भारत अस्ल में, अपनी सीमाओं पर तनाव की स्थिति से बचना चाहता रहा और सबका सहयोग लेकर आगे बढ़ने की सोच रखता रहा. इस नीति के चलते चीन के खिलाफ भारत को अमेरिका का सहयोग भी मिला.

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अस्ल में 1962 के युद्ध में जब रूस ने अपने 'कम्युनिस्ट भाई' के खिलाफ भारत का साथ देने से मना किया था, तब भी भारत को अमेरिका की तरफ ही देखना पड़ा था. कुल मिलाकर, इतिहास गवाह है कि चीन के खिलाफ थोड़ा बहुत ही सही, अमेरिका ही भारत का साथ देने वाला साबित हुआ है. दूसरी तरफ, भारत ने 1962 के बाद से चीन के ​साथ युद्ध को हमेशा टालने की ही कोशिश की.

चीन के सीमा विवाद और अमेरिका!
सिर्फ भारत के साथ ही नहीं बल्कि अपने तमाम पड़ोसियों के साथ चीन सीमा विवादों में घिरा हुआ है. 1962 के बाद से भारत के बड़ा भूभाग हथिया चुका चीन कई तरह के दावे करता रहा है और LAC को भारत की तरफ और सरकाने के मंसूबे रखता रहा. ये भी गौरतलब है कि चीन ने भारतीय सीमाओं पर शांति के लिए तभी हामी भरी थी, तब अमेरिकी फौजों ने भारत के पक्ष में प्रशांत महासागर में हरकत तक शुरू कर दी थी.

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दूसरी तरफ, दक्षिण चीनी समुद्र में अमेरिका ने नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ाना शुरू किया है. करीब दो हफ्ते पहले ही अमेरिकी ने साउथ चाइना सी में सैन्य अभ्यास किया. ये वो इलाका है, जहां चीन अपनी संप्रभुता के नियंत्रण का दावा करता है. वहीं, अमेरिका ने समुद्री परिवहन की आज़ादी के नाम पर गतिविधियां कीं.

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क्या बदलेगा SCS में भारत का रोल?
दक्षिण चीनी समुद्र में भारत ने इस समुद्री इलाके में चीन की दादागिरी और सीमाएं हथियाने की नीतियों पर कोई मज़बूत स्टैंड कभी नहीं लिया. लेकिन अब हालात अलग हैं. चीन यहां न केवल आर्टिफिशियल द्वीप तैयार कर सेनाएं तैनात कर चुका है बल्कि वियतनाम, मलेशिया और फिलीपीन्स के बेड़ों पर नाजायज़ हमले भी कर चुका है. यहां अमेरिका के अलावा चीन को जवाब देने की ताकत किसी और में नहीं है.

इन हालात में, अमेरिका और कुछ ASEAN देश चाहते हैं कि दक्षिण चीनी समुद्र में भारत अपनी भूमिका और मौजूदगी बढ़ाए. कम से कम चीन के खिलाफ भारत को अमेरिका की शह भी हासिल है. ऐसे में अहम सवाल है कि क्या भारत आक्रामक चीन के खिलाफ अपनी नीतियां बदलेगा? लद्दाख में चीनी दबदबे का मुंहतोड़ जवाब क्या समुद्र में दिया जाएगा? और क्या भारत QUAD के साथी देशों के सुर में सुर मिलाकर चीन के खिलाफ ताकत नज़र आएगा?
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