हांगकांग में चीन के खिलाफ प्रदर्शनों में क्या भारतीय शामिल हैं?

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Updated: August 22, 2019, 9:27 PM IST
हांगकांग में चीन के खिलाफ प्रदर्शनों में क्या भारतीय शामिल हैं?
हांगकांग में चीन के खिलाफ प्रदर्शनों को तीन महीने हो रहे हैं.

चीन (China) के खिलाफ हांगकांग (Hong Kong) में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है. जानें कि आंदोलन करने वालों में हांगकांग का कौन सा समुदाय शामिल है और भारतीय समुदाय (Indians in Hong Kong) की क्या भूमिका है.

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चीन की नीतियों और प्रत्यर्पण संबंधी कानून को लेकर पिछले ढाई महीने से ज़्यादा वक्त से हांगकांग में विराट विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है. बीते बुधवार को फिर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताते हुए एक मेट्रो स्टेशन पर जमावड़ा लगाया और पुलिस के साथ झड़पें हुईं. हांगकांग में जारी इस तनाव के बीच आपको जानना चाहिए कि चीन के खिलाफ इस विद्रोह में आखिर किस समुदाय के लोग शामिल हैं और क्या इन प्रदर्शनकारियों में हांगकांग में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय भी हैं या नहीं.

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संयुक्त राष्ट्र के ताज़ा अनुमान के मुताबिक हांगकांग की कुल आबादी 21 अगस्त तक 75 लाख से कुछ ही सैकड़ा कम थी. इस आबादी में भारतीय कितने हैं? भारतीय समुदाय को लेकर भारत की उच्चस्तरीय कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में हांगकांग निवासी भारतीयों की संख्या 22 हज़ार मानी गई थी. हालांकि हांगकांग की आबादी के लिहाज़ से ये संख्या काफी कम है लेकिन भारतीय वहां के कारोबार में अहम माने जाते हैं. ऐसे में सवाल ये है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों में क्या भारतीय शामिल हो रहे हैं.

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आंदोलन से दूरी बनाए हैं भारतीय
चीन की राजनीतिक व्यवस्था के हिसाब से हांगकांग में भी कम्युनिज़्म है लेकिन राहत ये है कि हांगकांग को चीन एक किस्म की स्वायत्तता देता है यानी 'एक देश दो व्यवस्थाओं' जैसा हिसाब है. इस तरह की व्यवस्था के बीच भारतीयों ने हांगकांग के चीन विरोधी आंदोलन से दूरी बनाए रखी है. वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के कारो​बारियों का ये भी कहना है कि शहर में अफरातफरी होने के बावजूद भारतीयों के बिज़नेस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है.

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रिपोर्ट है कि भारतीय समुदाय में चीनी नीतियों को लेकर डर नहीं है इसलिए वो प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हैं.


क्यों शामिल नहीं हैं भारतीय?
हांगकांग में इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स के राजू सबनानी के हवाले से फोर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारतीय समुदाय में चीनी नीतियों को लेकर डर नहीं है. 'हम भारतीय यहां राजनीतिक मामलों को लेकर तटस्थ रहे हैं और सिर्फ अपना कारोबार करते हैं.' वहीं, सिंधी एसोसिएशन ऑफ हांगकांग के प्रमुख नोतन तोलानी के हवाले से लिखा गया है कि ये विरोध प्रदर्शन सालों की हताशा के नतीजे हैं. इस हताशा को समझाते हुए तोलानी ने बताया :

हांगकांग की कुल आबादी 75 लाख के करीब है लेकिन आंकड़े कहते हैं कि हर महीने यहां 40 लाख मेहमान आते हैं, जिसके कारण संसाधनों की किल्लत होती है. अस्पतालों में भीड़ है, सड़कों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मुश्किल होती है. सरकार के खिलाफ एक गुस्सा काफी समय से पनप रहा था, जिसे प्रत्यर्पण संबंधी कानून ने भड़का दिया.


प्रदर्शन करने वाले कौन लोग हैं?
हांगकांग की तीन यूनिवर्सिटियों लिंगनैन, हैंगसेंग और हांगकांग बाप्टिस्ट यूनिवर्सिटी ने मिलकर एक स्टडी तैयार की, जिसके मुताबिक़ पाया गया कि इस साल 9 जून से 12 अगस्त के बीच हुए 12 बड़े प्रदर्शनों में शामिल लोग ज़्यादातर युवा थे. 20 से 29 साल की उम्र वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या सबसे ज़्यादा थी. आर्थिक वर्गीकरण के हिसाब से चीनी विरोध में हांगकांग के मध्यम और निम्न वर्ग के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. ये भी कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों के साथ किए सर्वे के अनुसार प्रदर्शनों में शामिल लोग उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले दिखे.

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गौरतलब है कि ब्रिटेन कॉलोनी खत्म होने के बाद चीन को सौंपे गए हांगकांग में 'एक देश दो सिस्टम' का सिद्धांत 2047 में खत्म होगा और उसके बाद हांगकांग चीन को पूरी तरह से हैंडओवर हो जाएगा. ऐसे में प्रदर्शनकारियों में एक तनाव देखा जा रहा है और अपनी आज़ादी व संपूर्ण व्यवस्था के लिए आंदोलन कर रहे ज़्यादातर लोग मान रहे हैं कि संघर्ष का सही समय यही है.

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First published: August 22, 2019, 9:27 PM IST
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