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धर्म बनाम विज्ञान बहस : क्या वाकई जादूगर थे जीसस क्राइस्ट?

धर्म बनाम विज्ञान बहस : क्या वाकई जादूगर थे जीसस क्राइस्ट?

ईसा मसीह की यह तस्वीर Pixabay से साभार.

ईसा मसीह की यह तस्वीर Pixabay से साभार.

कुछ इतिहासकार (Historians) इस तरह की किताबें भी लिख चुके हैं कि जीसस (Jesus Christ) जादूगर थे. धर्म के इस पहलू पर विज्ञान के मंच से विशेषज्ञों ने किस तरह लॉजिक से इस बात को नकारा है कि ईसा मसीह जादू करते थे?

    कहीं जीसस क्राइस्ट (Jesus Christ) रोटी को कई गुना करते दिखते हैं, तो कहीं किसी बीमार को दुरुस्त करते और कहीं तो मृत व्यक्ति में प्राण फूंकते भी नज़र आते हैं... रोम (Rome) स्थित कब्रगाहों और ताबूतों की नक्काशी या दीवार पर उकेरे गए शिल्पों (Carvings) में जीसस इस तरह नक्श किए गए हैं जैसे वो जादूगर (Magician) हों. ऐसे कई शिल्पों में जीसस के हाथ में वो एक छड़ी (Magical Wand) भी दिखती है, जो अक्सर जादूगर के हाथ में 'जादू की छड़ी' जैसी दिखती रही. लंबे समय से सवाल रहा है कि क्या वाकई जीसस को प्राचीन ईसाई (Christianity) जादूगर मानते थे?

    ये सवाल खड़ा होने के बाद तर्कों का दौर शुरू हुआ तो कुछ विशेषज्ञों ने ऐसा शक जताया कि ये हो सकता है तो कुछ विशेषज्ञों ने लॉजिकल सबूत पेश करते हुए ये साबित करने की चेष्टा की कि जीसस कोई जादूगर नहीं थे. धर्म और विज्ञान के बीच की यह बहस काफी रोचक हो जाती है और इतिहास को समझने के लिए एक नज़र भी देती है. जानते हैं विशेषज्ञों के बीच बहस से क्या पता चलता है, जीसस जादूगर थे या नहीं?

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    ईसाइयत और जादू टोना
    यह तो है कि तीसरी से लेकर आठवीं शताब्दी तक ईसाई धर्म में जादू टोने के प्रयोगों के कई सबूत मिलते हैं. और ये नक्काशियां भी इसी समय के बीच की हैं, जिनमें कब्रिस्तान के आसपास जादू की छड़ी लिये जीसस दिखते हैं. इस बारे में धर्म विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि वो ईसाई धर्म की शुरूआत का समय था और उस वक्त यहूदियों के रोमन देवी देवताओं वाले सिद्धांतों का प्रभाव था.

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    प्राचीन शिल्पों में जीसस जादूगर की छड़ी जैसी चीज़ के साथ दिखते हैं. (यह प्रतीकात्मक तस्वीर Pixabay से साभार)


    इन यहूदी मान्यताओं के बारे में केंटुकी की एक धर्म संस्था के प्रमुख ली जैफरसन कहते हैं कि उस वक्त भी वो बाइबल में यकीन नहीं रखते थे, पादरी व्यवस्था नहीं मानते थे और उन्हें समझ नहीं थी कि जीसस वास्तविक तौर पर थे कौन. प्राचीन क्रिश्चियन आर्ट पर किताब लिखने वाले जैफरसन का साफ कहना है कि एक तो यह यहूदी मान्यता थी और रोमन साम्राज्य में तो जादू पर मनाही थी, लेकिन कुछ लोग कानून से छुपकर करते थे.

    क्या जीसस को बदनाम करने की कोशिश है?
    जैफरसन के हवाले से लाइव साइंस की रिपोर्ट कहती है कि जिन कुछ लोगों ने जीसस के जादूगर होने का प्रचार किया, वो जीसस और ईसाइयत को बदनाम करने की एक साज़िश जैसा था. हो सकता है कि यहूदियों या कई धर्मों को मानने वाले वो लोग मौत या प्राकृतिक आपदाओं से डरे हुए हों और किसी तरह के काबू की ख्वाहिश में कोई कल्पना रच बैठे हों.

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    जादू नहीं चमत्कार!
    जीसस के अनुयायियों ने उन्हें कभी जादूगर नहीं माना, लेकिन चमत्कारों की बात स्वीकारी गई. किसी मुर्दे को ज़िंदा कर देना जादू का काम नहीं है, बल्कि एक दैवीय चमत्कार है. जैफरसन के मुताबिक इस रूप में 'आप नहीं चाहेंगे कि कोई आपके अवतार या देवता को जादूगर कहकर पुकारे.' जीसस की इन दैवीय शक्तियों के कारण ईसाई और गैर ईसाई भी उन्हें रोमन भगवानों के बराबर का दर्जा देते रहे.

    हाथ में जादू की छड़ी क्यों?
    इस बारे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि प्राचीन कलाकृतियों में जीसस के हाथ में जो छड़ी दिखाई गई है, उसका जादू से लेना देना नहीं है क्योंकि एक जादूगर की छड़ी वाली छवि काफी नए समय की है. पहले जादूगर इस तरह की पोशाक या इस तरह की इमेज नहीं रखते थे. जादू में जादू की छड़ी का इस्तेमाल प्राचीन समय में नहीं होता था. कला विशेषज्ञों का दावा है कि प्राचीन काल की कलाकृतियों में ऐसे सबूत नहीं हैं कि जादूगर के हाथ में छड़ी दिखे.

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    तो फिर जीसस के हाथ में छड़ीनुमा क्या है? पुरानी नक्काशियों में दिख रही ये छड़ी हो सकता है कि 'राजदंड' हो. इसे विशेषज्ञों ने ईसा और मूसा के बीच शक्ति हस्तांतरण होने का प्रतीक भी माना है तो एक स्तर पर अथॉरिटी का प्रतीक भी. रिपोर्ट के मुताबिक दाढ़ी जिस तरह ज्ञान का प्रतीक समझी गई, उसी तरह इस छड़ी या राजदंड को प्रभाव या अधिकारी का प्रतीक.

    सार यह है कि ईसाई धर्म के समर्थक इन चित्रों में जीसस को जादूगर मानने से इनकार करने के तार्किक और ऐतिहासिक सबूत देते हैं और जो गैर ईसाई ऐसा दावा करते हैं, वो धार्मिक या प्रचलित मान्यताओं के हिसाब से व्याख्या करते हैं. दावा यही है कि जादू एक मानवीय सीमा की बात हो, किसी मुर्दे को ज़िंदा नहीं कर सकता, फसल नहीं उगा सकता. इसलिए चमत्कार को इसे परिभाषा में नहीं बांधना चाहिए.undefined

    Tags: Christ, History, Religion

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