क्या वाकई घातक है कीटो डाइट? कौन सी डाइट्स हैं जानलेवा?

हाई फैट, हाई प्रोटीन वाली कीटो डाइट के बारे में जानें.
हाई फैट, हाई प्रोटीन वाली कीटो डाइट के बारे में जानें.

जल्द से जल्द वज़न कम करने (Weight Loss) के लिए कई लोग डाइटिंग के नाम पर ऐसे सख्त नियमों या गलत तकनीकों (Wrong Dieting) का प्रयोग कर रहे हैं, जो खतरनाक या जानलेवा तक साबित हो सकता है. डाइटिंग के बारे में सही जानकारी.

  • News18India
  • Last Updated: October 6, 2020, 9:56 AM IST
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अबसे पहले ऐसी बात शायद नहीं सुनी गई थी या इतनी चर्चा में नहीं थी कि डाइटिंग मौत की वजह (Dangerous Dieting) बन सकती है. अभिनेत्री मिष्टी मुखर्जी की मौत (MIshti Mukherjee Death) किडनी फेलियर से हुई, लेकिन किडनी फेलियर (Kidney Failure) का कारण उनका कीटो डाइटिंग करना रहा. इस घटना के बाद से चर्चा यह है कि कीटो डाइ​ट क्या वाकई खतरनाक है? इसके साथ ही, आपको यह भी जानना चाहिए कि कौन सी डाइट्स हैं, जिन्हें खतरनाक माना जाता है और इस बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है?

क्या है कीटोजेनिक डाइट?
वज़न घटाने और डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के मकसद से इस डाइट का चलन बढ़ा है. संक्षिप्त रूप में इसे ही कीटो डाइट के नाम से जाना जाता है. इसमें हाई फैट, पर्याप्त प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट का सेवन किया जाता है. मूल रूप से यह डाइट मिरगी के रोगी बच्चों के इलाज में इस्तेमाल की जाती रही थी. इस डाइट से शरीर के फैट बर्न होते हैं, कार्बोहाइड्रेट नहीं. अब इस डाइट के शरीर के अंगों पर असर को भी जानिए.

कैसे होता है निगेटिव असर?
विशेषज्ञों की राय में, सामान्य तौर पर छह महीने से ज़्यादा कीटो डाइट पर रहने का सुझाव नहीं दिया जाता है. गुरुग्राम बेस्ड सीनियर डायटिशियन परमीत कौर की मानें तो कीटो डाइट का असर एक हफ्ते में दिखना शुरू हो जाता है क्योंकि शरीर पहले से मौजूद फैट्स को जलाकर एनर्जी पैदा करने लगता है. कौर के मुताबिक इस डाइट पर लंबे समय तक रहने से किडनी पर दबाव बढ़ता है.



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डाइटिंग का मतलब संतुलित पोषण है, किसी एक पदार्थ की कमी या अधिकता नहीं.


दूसरी तरफ, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर प्रदीप शाह के मुताबिक इस डाइट से किडनी पर खतरनाक प्रभाव तब पड़ता है, जब पहले से इस तरह का कोई रोग हो. वहीं, न्यूट्रिशनिस्ट रुचि शर्मा के मुताबिक कीटो डाइट में अक्सर लोग प्रोसेस्ड चीज़ और बटर जैसी चीज़ों का सेवन करते हैं, जिससे हाई कॉलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ता है और हाई प्रोटीन के कारण किडनी पर दबाव भी.

क्या और कोई नुकसान भी होता है?
जी हां, कौर के मुताबिक कीटो डाइट के कुछ केसों में लो ब्लड प्रेशर की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. ये आप जानते ही हैं कि ब्लड प्रेशर के रोग का सीधा संबंध दिल के रोगों से है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय में हुए एक हालिया अध्ययन में भी कहा गया कि कीटो डाइट के किडनी से लेकर हार्ट तक, कई तरह के नुकसान देखे जा चुके हैं.

क्या और कोई डाइट भी है खतरनाक?
सवाल ये है कि क्या और किसी तरह की डाइटिंग से भी शरीर के किसी अंग को बुरी तरह नुकसान पहुंचता है? इस बारे में विशेषज्ञ कुछ और डाइट्स को भी कठघरे में खड़ा कर चुके हैं. इनमें से एक है पैलियो डाइट, जिसे 'पाषाणकालीन' या स्टोन एज की डाइट भी कहा जाता है. यह बेहद सख्त नियमों वाली डाइट है.

डॉ. शाह कहते हैं कि ऐसी कोई भी डाइट, जिसमें आप शकर युक्त पैकेज्ड फूड, ड्रिंक्स या सॉफ्ट ड्रिंक्स लेते हैं या फिर फास्फोरस व सोडियम युक्त प्रीज़र्वेटिव वाले खाद्य पदार्थ, तो आप अपनी किडनी को जोखिम में डालते हैं. कुछ और डाइट्स के बारे में भी जानिए, जिनकी सलाह नहीं दी जाती है.

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1. ऐसी डाइट्स, जिनमें आप एक ही तरह की चीज़ का लगातार सेवन करते हैं, जैसे कैबेज या अंगूर डाइट. इस तरह की डाइट से शरीर में पोषण की कमी हो जाती है.
2. टेपवर्म डाइट को भी पेट और आंत के गंभीर रोगों का कारण पाया जा चुका है.
3. कॉटन बॉल्स को लेमनेड या संतरे के रस में भिगोकर लेने वाली डाइटिंग को जानलेवा तक बताया गया है.
4. सिगरेट डाइट, ड्रिंकिंग मैन डाइट और रेड बुल डाइट जैसी कई तरकीबें सेहत के लिए खराब मानी जा चुकी हैं.

तो क्या है ठीक डाइट?
विशेषज्ञ कीटो डाइट के विकल्प के तौर पर बताते हैं कि इस तरह की कठिन डाइटिंग से अच्छा है कि आप एक संतुलित आहार वाली डाइट लें, जिसमें कार्ब कम हो और प्रोटीन बहुत हाई न हो. भोजन का शरीर खासकर, हृदय के लिए सेहतमंद होना बेहद ज़रूरी है. इसलिए संतुलित डाइट में आप कई रंगों की सब्ज़ियां, ताज़े फल, साबुत अनाज और कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट चुन सकते हैं.

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डाइटिंग में भोजन के साथ नियमित तौर पर शारीरिक श्रम और व्यायाम करना बेहद महत्वपूर्ण है. वरना आप कुछ भी भोजन करें, अगर वह ठीक से पच नहीं पाएगा, तो पाचन तंत्र के अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा ही.
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