क्या सिर्फ मास्क पहनने की आदत ने जापान को कोरोना से बचाया?

क्या सिर्फ मास्क पहनने की आदत ने जापान को कोरोना से बचाया?
टोक्यो के शिबुया स्टेशन के पास एक जापानी कुत्ते 'हाचिको' की प्रतिमा फेसमास्क लगाए हुए.

न लॉकडाउन (Lockdown), न आवाजाही पर विशेष रोकटोक, न बड़ी संख्या में टेस्ट... फिर भी दुनिया के 7 सबसे विकसित मुल्कों में शुमार जापान (Japan) में इन देशों के मुकाबले कोरोना संक्रमण (Corona Infection) बहुत कम रहा. क्यों? यह जानना काम की बात है कि क्या जापान ने कोई अनोखा काम किया या फिर अब तक जापान की खुशनसीबी रही.

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जापान में Covid-19 के ताज़ा आंकड़े देखे जाएं तो अब तक कुल कन्फर्म केस 16,804 हैं, जबकि 886 मौतें हुई हैं. ध्यान देने की बात यह भी है कि 14,406 लोग रिकवर हो चुके हैं यानी जापान में सक्रिय केसों की संख्या ढाई हज़ार से भी कम है. Corona Virus से बचाव के लिए मास्क (Face Mask) पहने जाने की आदत का जहां अमेरिका (USA) के नेता मज़ाक उड़ाते रहे, वहीं जापान में इस एक आदत ने जंग जीतने में बड़ी भूमिका निभाई. जानिए कि विशेषज्ञों ने महामारी (Pandemic) के खिलाफ जापान की लड़ाई को किस नज़र से देखा.

बीते सोमवार को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने देश से आपातकाल हटाया और आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां धीरे धीरे शुरू किए जाने की घोषणा की. हालांकि जापान में बलपूर्वक लॉकडाउन की स्थिति नहीं रही लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पूरे देश ने कड़ाई से पालन किया. जापान ने ​कैसे कोविड 19 के खिलाफ जंग लड़ी और कैसे उसे काबू में रखा, जानिए कि इस पर एक विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट क्या कहती है.

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जिन विशेषज्ञों ने जापान में संक्रमण को काबू में रखने में भूमिका निभाई, उन्होंने माना ​कि लोगों की मास्क पहनने की आदत बड़ी वजह रही.




जापानियों ने दिखाई सेहत के लिए सतर्कता



एक्सपर्ट पैनल के उपाध्यक्ष और महामारी विशेषज्ञ शिगेरू ओमी के मुताबिक लिखा गया है कि जापानियों ने वैश्विक महामारी को काबू रखने में सफलता इसलिए हासिल की क्योंकि लोगों ने सेहत के प्रति खासी सतर्कता दिखाई. यानी बचाव और सावधानियों का पूरा ध्यान रखा. हाथ धोने से लेकर लोक स्वच्छता तक हर निर्देश का पालन किया गया.

रोज़ मास्क पहनने का नियम
विशेषज्ञों के मुताबिक जापान में संक्रमण के अपेक्षाकृत कम फैलने के पीछे बड़ा कारण जापानियों का रोज़मर्रा के जीवन में मास्क लगातार पहने रखने की आदत रही. कहा गया है चूंकि जापान में कई लोगों को पराग से एलर्जी है इसलिए साल की शुरूआत से ही बसंत या बहार के मौसम तक लोग ऐसे भी मास्क पहनते हैं. साथ ही, इन्फ्लुएंज़ा से बचाव के लिए भी कुछ लोग रोज़मर्रा में मास्क पहनते रहे हैं.

कोविड की दूसरी लहर के लिए क्या उपाय है?
जापानी विशेषज्ञों के मुताबिक जापान में समय से क्लस्टर निगरानी की गई और हाई रिस्क की जगहों की पहचान कर वहां एहतियाती कदम उठाए गए. मास्क पहनने, हाथ धोने, शारीरिक दूरी बनाए रखने और तेज़ आवाज़ में न बोलने जैसी आदतें अपनाई गईं. अब दूसरा दौर संभव है लेकिन संक्रमण का खतरा कम करने के लिए क्लस्टरों को पहले से भी ज़्यादा तेज़ी से पहचानना होगा. साथ ही, पीसीआर टेस्टिंग के अलावा एंटिजन टेस्टिंग का इस्तेमाल करना होगा ताकि लक्षणों के गंभीर होने से पहले संक्रमण के केस सामने आ सकें.

जापान की वायरस नियंत्रण पॉलिसी कैसी रही?
विशेषज्ञों ने माना कि जापान का हेल्थकेयर सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर आ गया था, लेकिन जापान के नागरिकों की कोशिशों और बलिदानों से हालात काबू में आ सके. जापान ने कानूनी तौर पर कोई लॉकडाउन घोषित नहीं किया लेकिन उसने अपने नागरिकों से सख्त सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की. कई लोगों ने इसमें सहयोग किया और सामाजिक व​ आर्थिक नुकसान भी उठाया, लेकिन संक्रमण पर काबू पा लेने तक लोगों ने हार नहीं मानी.

कितनी है जापान में टेस्टिंग क्षमता?
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार जापान में हालांकि संक्रमण और संक्रमण से मौतों के आंकड़े कम रहे, लेकिन सच यह भी है कि दूसरे देशों की तुलना में जापान में टेस्ट की संख्या भी कम रही है. पीसीआर टेस्टिंग की क्षमता भी पर्याप्त नहीं बढ़ी. इस समय, विशेषज्ञ एक्यूरेसी को लेकर संतुष्ट नहीं हैं. इसके बावजूद जापानी लोगों की चिंताओं को देखते हुए जापान को ज़्यादा एंटिबॉडी टेस्ट करने ही होंगे.

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दूसरे देशों की तुलना में जापान में टेस्ट की संख्या कम रही. (फाइल फोटो)


जादू हुआ या जापान की किस्मत अच्छी?
विशेषज्ञों की ये तमाम बातें जानने के बाद अब आप बिंदुवार समझें कि जापान अब तक कोरोना के मामले में खुशकिस्मत रहा या वाकई जापान ने कोई कमाल किया...

1. अमेरिका की तरह जापान के पास सीडीसी जैसा कोई रोग नियंत्रण केंद्र नहीं है.
2. दुनिया के अन्य देशों की तरह जापान ने किसी हाईटेक ऐप का प्रयोग नहीं किया.
3. डब्ल्यूएचओ ने ज़्यादा टेस्टिंग पर ज़ोर दिया लेकिन जापान ने सिर्फ 0.2% आबादी का टेस्ट किया.
4. डब्ल्यूएचओ ने एक समय मास्क को अनुपयोगी बता दिया था, लेकिन जापान ने इसे प्राथमिकता पर रखा.
5. जापान में 2018 में इन्फ्लुएंज़ा व तपेदिक के लिए कई स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेंड किया गया था इसलिए 50 हज़ार से ज़्यादा ट्रेंड कर्मियों की फौज है. इस फौज ने कॉंटैक्ट ट्रेसिंग और निगरानी का विशेष काम किया.
6. सरकारी सक्रियता, जनजागरूकता और जीवनशैली के साथ ही सख्त नियम पालन अहम रहा.

आखिरकार कमज़ोर स्ट्रेन भी बड़ी वजह
जापान में कोरोना का इन्फेक्शन कम रहने की बड़ी वजह वायरस का कमज़ोर स्ट्रेन होना रहा. कुछ विशेषज्ञों का कहना रहा कि दुनिया के दूसरे देशों में वायरस का जो स्ट्रेन नज़र आया, उसकी तुलना में जापान में वायरस का स्ट्रेन काफी कमज़ोर दिखा. बहरहाल, अब संक्रमण के दूसरे दौर की चुनौती जापान के सामने है और यही उसकी असल परीक्षा होगी.

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