क्या कोविड निगेटिव मां से जन्मा शिशु हो सकता है कोरोना पॉज़िटिव?

क्या कोविड निगेटिव मां से जन्मा शिशु हो सकता है कोरोना पॉज़िटिव?
मां से शिशुओं में कोरोना वायरस संक्रमण का विज्ञान जानें.

सुर्खियां हैं कि Covid 19 टेस्ट में निगेटिव पाई गई एक मां ने जिस शिशु को जन्म दिया, उसे टेस्ट में Coronavirus का शिकार पाया गया. Delhi के इस ताज़ा केस ने हलचल मचा दी है और सवाल खड़ा कर दिया है. क्या इससे पहले ऐसा कोई मामला सामने आया है? क्या इस बारे में कोई Research है? ये भी जानिए कि विशेषज्ञों की क्या राय है.

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Delhi के राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML Hospital) में 24 वर्षीय एक मां ने जिस शिशु को जन्म दिया, उसे जन्म के बाद हुए Test में Corona Positive पाया गया. अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या Covid Negative मां से जन्मा शिशु संक्रमित हो सकता है? इस सवाल की वजह यह है कि 8 जुलाई को जन्मे इस शिशु की मां को 7 जुलाई को हुए टेस्ट में Corona Negative पाया गया था.

इससे पहले 17 जून को Mexico में एक गर्भवती ने तीन जुड़वां शिशुओं को जन्म दिया था और तीनों ही शिशु जन्म के 1 दिन बाद हुए टेस्ट में Covid-19 पॉज़िटिव पाए गए थे. तब यह सवाल उठा था कि क्या किसी गर्भवती के गर्भ में ही शिशु को संक्रमण हो सकता है. इन दोनों पहलुओं पर वैज्ञानिक नज़रिये से जवाब समझना ज़रूरी है.

कैसे शिशुओं को चपेट में लेता है कोरोना?
नवजातों में कोरोना वायरस का पाया जाना वाकई दुर्लभ है लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. पहली वजह तो यही हो सकती है कि जन्म के तुरंत बाद शिशु किसी कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति के संपर्क में आए. रही, सवाल के रूप में दूसरी वजह कि क्या गर्भ में ही शिशु संक्रमित हो सकता है, तो इसका जवाब अब तक के शोधों में 'हां' मिल रहा है. जानिए क्या कहते हैं ये शोध.
कैसे मां से होता है शिशु को संक्रमण?


गर्भ में मां से शिशु को कोरोना वायरस संक्रमण गर्भनाल placenta के ज़रिये फैल सकता है. पिछले दिनों मेडिसिन के येल स्कूल में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट दी थी कि प्लैसेंटल संक्रमण का पहला केस पाया गया था. इस शोध में कहा गया कि संक्रमण होने पर भी मां या शिशु को कोई खास खतरा नहीं होता है अगर शिशु का जन्म समय से पहले होने के हालात न हों.

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पहले WHO और कुछ अन्य अध्ययनों में कहा गया था कि स्तनपान से संक्रमण का खतरा नहीं होता.


इटली की मिलान यूनिवर्सिटी में हुई एक और रिसर्च में पाया गया कि आईवी संक्रमण संभव है और महिलाओं की यौनि, नाभि नाल, गर्भनाल और ब्रेस्ट मिल्क में कोरोना वायरस का होना पाया गया. यह भी गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि स्तनपान से कोविड संक्रमण का खतरा न के बराबर होता है इसलिए महिलाएं नवजातों को स्तनपान जारी रख सकती हैं.

गर्भ में संक्रमण से क्या खतरे हैं?
अभी तक ऐसा कोई सबूत वैज्ञानिकों को नहीं मिला है कि गर्भधारण के ​समय शिशु को संक्रमण होने से गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है या शिशु के विकास में किसी तरह की असामान्य बाधा आ सकती है. ये भी कहा गया है कि इस तरह के संक्रमण से मामूली लक्षण दिखते हैं और गंभीर स्थितियां दुर्लभ हैं. इसके बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवतियां कम से कम लोगों के संपर्क में रहें, साफ सफाई का खयाल रखें और स्वास्थ्य व इम्युनिटी संबंधी हिदायतों का पालन करें.

ये तो हुई गर्भ के दौरान संक्रमण फैलने की बात, लेकिन क्या कोविड 19 निगेटिव मां से जन्मे शिशुओं को कोरोना वायरस चपेट में ले सकता है? यदि हां तो कैसे और नहीं तो कैसे?

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न्यूज़18 क्रिएटिव


पहले खबर के पूरे तथ्य जानें
दिल्ली में आरएमएल का जो केस सामने आया है, उसमें 8 जुलाई को शिशु को जन्म देने वाली गर्भवती 7 जुलाई को ज़रूर को​रोना निगेटिव पाई गई लेकिन उससे पहले करीब एक महीने तक दो टेस्ट में वह कोरोना पॉज़िटिव थी. दूसरी बात यह कि शिशु के जन्म के 6 घंटे बाद टेस्ट किया गया था, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई. इसमें दो बिंदु हैं कि गर्भधारण के दौरान किस समय में शिशु संक्रमित हो सकता है और जन्म के छह घंटे बाद टेस्ट होने और रिपोर्ट पॉज़िटिव होने के बीच क्या संबंध है.

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1. पहले सवाल के जवाब में मिलान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता क्लॉडियो फेनिज़िया की मानें तो गर्भाशय से शिशु में संक्रमण संभव है. इस शोध में जिन 31 गर्भवतियों पर शोध किया गया, वो सभी अपने गर्भधारण की तीसरी यानी अंतिम तिहाई में थीं यानी छह से नौ महीने तक की गर्भावस्था की महिलाओं पर शोध किए गए. इसका मतलब है कि छह या सात महीने के गर्भ में संक्रमण फैल सकता है.

2. जैसा कि विशेषज्ञ के हवाले से बताया जा चुका है कि जन्म के बाद अगर शिशु किसी कोरोना पॉज़िटिव के संपर्क में आए तो वह संक्रमित हो सकता है. हालांकि, ऐसे में उसके एसिम्प्टोमैटिक होने के ही आसार ज़्यादा हैं. यही दिल्ली के केस में हुआ कि शिशु के पॉज़िटिव पाए जाने के बावजूद उसमें लक्षण नहीं देखे गए.

मिलान और येल यूनिवर्सिटियों के विशेषज्ञों ने अब तक यही कहा है कि गर्भ या नवजात में होने वाले संक्रमणों को लेकर और गंभीर अध्ययन किए जाने की ज़रूरत बनी हुई है. साथ ही, हिदायत यही है कि गर्भवतियां सतर्कता पूरी बरतें.
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