राम जन्मभूमि पूजन से पहले 10 प्वाइंट में समझें राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

राम जन्मभूमि पूजन से पहले 10 प्वाइंट में समझें राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया था राम जन्मभूमि को लेकर फैसला

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 9:06 PM IST
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अयोध्या में 05 अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन है. ये एक बड़ा आयोजन होगा. इसके बाद भव्य राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा. लंबे समय से इस मामले में अदालत में केस चला फिर पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुना दिया.

आइए अब हम 10 प्वाइंट्स में जानते हैं उस फैसले के बारे में, जिससे हमें इस पूरे मामले को समझने में मदद मिल सकती है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया. ये मंदिर-मस्जिद विवाद 134 साल पुराना था. 40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को इस दशकों पुराने मामले में पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अपना फ़ैसला दिया.
राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं. ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है. विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए. इसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा. 3 महीने के भीतर ट्रस्ट का गठन कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई जाए.
उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा. मस्जिद में इबादत में व्यवधान के बावजूद साक्ष्य यह बताते हैं कि प्रार्थना पूरी तरह से कभी बंद नहीं हुई. मुस्लिमों ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया, जो यह दर्शाता हो कि वे 1857 से पहले मस्जिद पर पूरा अधिकार रखते थे
"मीर बकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई. धर्मशास्त्र में प्रवेश करना अदालत के लिए उचित नहीं होगा. बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था.
16वीं शताब्दी का तीन गुंबदों वाला ढांचा हिंदू कारसेवकों ने ढहाया था, जो वहां राम मंदिर बनाना चाहते थे. यह ऐसी गलती थी, जिसे सुधारा जाना चाहिए था.
अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए. अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए. हिंदू इस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं. मुस्लिम भी विवादित जगह के बारे में यही कहते हैं. प्राचीन यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है. ऐतिहासिक उद्धहरणों से संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है.
मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था. ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है. पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार दे देना एएसआई का अपमान होगा. हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई.
सीता रसोई, राम चबूतरा और भंडार गृह की मौजूदगी इस स्थान की धार्मिक वास्तविकता के सबूत हैं. हालांकि, आस्था और विश्वास के आधार पर मालिकाना हक तय नहीं किया जा सकता है.
विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी. यह सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू 1857 से पहले भी यहां पूजा करते थे, जब यह ब्रिटिश शासित अवध प्रांत था. रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था.
संविधान पीठ ने जन्मभूमि के प्रबंधन का अधिकार मांगने की निर्मोही अखाड़ा की याचिका खारिज कर दी. हालांकि, कोर्ट ने केंद्र से कहा कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को किसी तरह का प्रतिनिधित्व दिया जाए.
1946 के फैजाबाद कोर्ट के आदेश को चुनौती देती शिया वक्फ बोर्ड की विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया. शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे पर था. इसी को खारिज किया गया.
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