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    5 प्‍वाइंट में समझें, चीन ने कोरोना को केवल वुहान के आसपास ही रोककर अपने दूसरे शहरों को कैसे बचाया

    सीएनबीसी के बीजिंग ब्‍यूरो की चीफ के मुताबिक, कोरोना वायरस फैलने के बीच हर दिन लोगों की मुश्किलें बढती जा रही थीं.
    सीएनबीसी के बीजिंग ब्‍यूरो की चीफ के मुताबिक, कोरोना वायरस फैलने के बीच हर दिन लोगों की मुश्किलें बढती जा रही थीं.

    कोरोना वायरस (Coronavirus) फैलने के शुरुआती दौर में चीन (China) संक्रमण की भयंकरता का सही अंदाजा नहीं लगा पाया. लेकिन, जैसे ही चीन को इसकी गंभीरता का अंदाजा लगा रोकथाम के सख्‍त से सख्‍त कदम उठाए गए. चीन ने इसे हुबेई प्रांत में ही रोक दिया. हालांकि, वह इसे पूरी दुनिया में फैलने से नहीं रोक पाया. आइए जानते हैं कि कैसे उसने संक्रमण को एक ही प्रांत में रोक कर रखा...

    • News18Hindi
    • Last Updated: March 27, 2020, 5:07 PM IST
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    चीन (China) से बाहर नहीं निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) दुनिया भर में 5,40,832 लोगों को संक्रमित (Infection) कर चुका है. इनमें से 24,293 लोगों की गंभीर संक्रमण के कारण मौत हो गई. अकेले चीन में 81,340 लोग संक्रमित हो गए. इनमें 3,292 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है. इस बीच चीन ने 74,588 लोगों को इलाज के जरिये ठीक करने में सफलता हासिल कर ली है. यहां सवाल ये भी है कि आखिर चीन ने दुनिया भर में फैल चुके इस वायरस को हुबई (Hubei) प्रांत में ही कैसे रोक लिया. आखिर कौन सा तरीका अपनाया गया कि चीन इसे दुनिया में फैलने से तो नहीं रोक पाया, लेकिन अपने देश में एक प्रांत से आगे नहीं फैलने दिया. दुनिया भर की सरकारें और वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब जानने के लिए चीन की ओर देख रहे हैं. आइए इस बारे में अब तक सामने आए चीन की ओर से किए गए प्रयासों पर एक नजर डालते हैं...

    इन कदमों के जरिये चीन ने हुबेई में ही थामे रखा संक्रमण
    कोरोना वायरस फैलने के शुरुआती दौर में चीन इसके असर का सही आकलन नहीं कर पाया. यहां तक कि उस डॉक्‍टर को भी जेल में डाल दिया गया, जिसने सबसे पहले इसके बारे में बताने की कोशिश की थी. बाद में अस्‍पतााल में डॉक्टर ली वेनलियांग की कोरोना वायरस के कारण ही मौत हो गई. हालात सुधरने के बाद अब चीन सरकार ने डॉक्टर ली वेनलियांग के परिवार से माफी भी मांगी है. इससे पहले जब चीन को संक्रमण की गंभीरता का अहसास हुआ तो वहां की कम्‍युनिस्‍ट सरकार ने रोकथाम के हरसंभव और सख्‍त से सख्‍त कदम उठाए. सबसे पहले चीन ने वुहान शहर को शेष देश से काट दिया यानी ना तो वुहान (Wuhan) के लोग शहर के बाहर कदम रख पए और न ही बाहर के लोग शहर में जा पाए. इसके बाद स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को बढ़ाने समेत तमाम उपाय किए.

    >> वायरस का दायरा वुहान शहर से बाहर बढ़ने के साथ-साथ चीन न सिर्फ इसकी भयंकरता को समझ गया बल्कि इसे काबू करने में भी जुट गया. इस वैश्विक महामारी (Pandemic) को काबू करने के लिए चीन ने हरस्‍तर पर काम किया. वुहान में लोगों के घरों से निकलने तक पर पाबंदी लगा दी गई. इसके बाद संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सैनेटाइजर का हर गली, हर सार्वजनिक जगह पर छिड़काव कराया गया. इसके बाद जब ये हुबेई के दूसरे शहरों में फैला तो पूरे प्रांत को ही देश से अलग कर दिया गया. साथ ही चीन सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर ऑनलाइन या ऑफलाइन चर्चा करने पर पाबंदी लगा दी. अफवाह (Rumors) फैलाने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्‍त कार्रवाई की. ऐसे दर्जनों लोगों को हिरासत (Detained) में ले लिया गया.
    वुहान में 23 जनवरी को लॉकडाउन कर दिया गया. इसके बाद वहां मेडिकल सुविधाओं में रातोंरात इजाफा किया गया. अब हालात सुधरने पर लोगों को यात्रा प्रतिबंधों से राहत दे दी गयी है.




    >> कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य कोड (Health Code) नाम की प्रणाली शुरू कर दी गई. इसमें लाल, पीले और हरे रंगों के कोड उपयोग किए गए. सभी लोगों को उनकी यात्रा रिकॉर्ड (Travel History) के मुताबिक रंगों के कोड दिए जाने लगे. फिर इसी के आधार पर इलाज किया गया. चीन की कई कंपनियों ने चेहरा पहचानने की प्रणाली (Facial Recognition) शुरू कर दी ताकि लोगों को बेवजह यहां-वहां हाथ न लगाने की जरूरत न हो और वे संक्रमण से बचें रहें. साथ ही इस प्रणाली की मदद से सार्वजनिक स्थल पर मास्‍क नहीं पहनने वालों की पहचान की गई. सोशल मीडिया की मदद से संक्रमित और बचाव उपायों का इस्‍तेमाल नहीं करने वाले लोगों की पहचान की गई. संक्रमित लोगों को इलाज के लिए और स्‍वस्‍थ लोगों को बचाव के उपाय अपनाने को प्रोत्‍साहित किया गया. कई शहरों में संक्रमितों की पहचान बताने वालों को इनाम भी दिया गया.

    >> हुबेई समेत सभी प्रांतों के प्रशासन ने हर खाली और अच्‍छी जगह पर अस्‍थायी अस्‍पातल बनाने शुरू कर दिए. इस दौरान जिम और स्‍टेडियम जैसी सार्वजनिक जगहों को अस्‍पतालों में तब्‍दील कर दिया गया. स्‍कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया. मॉल्‍स, सिनेमा हॉल्‍स समेत सभी भीड़ वाली जगहों पर पाबंदी लगा दी गई. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए चीन ने 549 नेशनल व स्‍टेट हाईवे के साथ ही काउंटी और टाउनशिप सड़कों को पूरी तरह बंद कर दिया. देश के 12,000 से ज्‍यादा हाईवे वायरस प्रभावित इलाकों से अलग-थलग कर दिए गए. प्रभावित इलाकों में 11,000 से ज्‍यादा केंद्र बनाए गए थे. इन केंद्रों पर वो लोग जांच करा सकते थे, जिन्‍हें कोरोना वायरस संक्रमण का संदेह हो.

    >> चीन के 28 प्रांतों ने अंतर-प्रांतीय सड़क यात्री परिवहन बंद कर दिया था. 200 से ज्‍यादा शहरों में सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) बंद कर दिया गया था. इसके अलावा रेल परिवहन (Railways) पर भी पाबंदियां लगा दी गई थीं. इनमें बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू और शेनजेन जैसे शहर भी शामिल थे. मालवाहक वाहनों और जहाजों पर गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों में परिवहन प्रतिबंध लगा दिए गए. किसी भी तरह का कच्चा माल प्रभावित क्षेत्रों में भेजने और वहां से उत्पाद बाहर लाने पर रोक लगा दी गई. महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए टोल सड़कों से गुजरने वाले सभी वाहनों को टोल टैक्‍स से छूट दी गई.

    >> मरीजों की बढ़ती संख्‍या को ध्‍यान में रखकर रातों-रात 1,000 बेड की क्षमता वाला हॉस्पिटल तैयार कर दिया. सिर्फ हुबेई प्रांत में ही एक दर्जन से ज्‍यादा अस्‍थायी कोरोना वायरस अस्‍पताल बना डाले. जैसे-जैसे वायरस पर काबू पाया गया इन अस्‍पतालों को बंद कर दिया गया. लोगों तक दवाइयां और खाना पहुंचाने के लिए रोबोट्स (Robots) का इस्‍तेमाल किये गये. चीन की सख्ती का फायदा महामारी से निपटने में कारगर साबित हुआ. हालात सुधरने पर भी हर घर से केवल एक ही व्यक्ति को बाहर निकलने की अनुमति दी गई. सभी स्‍कूल-कॉलज बंद रखकर ऑनलाइन क्‍लासेस चलाई गईं. घरों में भोजन और अस्पतालों में दवाई पहुंचाने के लिए केंद्रीकृत सुविधाएं शुरू की गईं. अब जब वहां हालात पूरी तरह से काबू में आ गए हैं तो हुबई समेत चीन के सभी प्रांतों में यात्रा पाबंदियां हटा दी गई हैं. लोग काम पर लौटने लगे हैं. बच्‍चों ने स्‍कूल जाना शुरू कर दिया है. मनोरंजन के साधनों और पर्यटन स्‍थलों को खोल दिया गया है. वहीं, 8 अप्रैल से वुहान में भी सभी तरह की पाबंदियां हटा दी जाएंगी.

    चीन से निकले संक्रमण के कारण भारत, इटली और अमेरिका समेत दर्जनों देशों में लॉकडाउन हो गया है. इसके लिए कुछ हद तक डब्‍ल्‍यूएचओ की ओर से आगाह करने में देरी भी जिम्‍मेदार है.


    खतरे को नजरअंदाज करने वाले देशों में अब फैल रही है बर्बादी, WHO ने भी की देरी
    इस बीच चीन दुनिया भर में इस वायरस को फैलने से नहीं रोक पाया. दरअसल, उसने जितनी सख्‍ती अपने देश में की उतनी बाहर जाने पर नहीं की. जनवरी में अलग-अलग समय पर सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग, ताइवान, इटली, स्‍पेन और भारत पहुंचे उन लोगों के जरिये कोरोना वायरस दुनिया में फैलता चला गया, जिनमें इस बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए थे. सार्स से सबक ले चुके कुछ देशों में ऐसी महामारी से निपटने की तैयारी पहले से ही थी. इस वजह से उन देशों ने संक्रमण के मामले सामने आते ही उन पर काबू पाना शुरू कर दिया. इनमें सिंगापुर, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने दुनिया के सामने मिसाल पेश की है. वहीं, अमेरिका, ईरान, यूरोपीय देशों समेत कोरोना वायरस के खतरे को नजरअंदाज करने वाले देश आज इस समस्‍या से जूझ रहे हैं. वहीं, ये भी माना जा रहा है कि चीन के अलावा विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने भी दुनिया को इसके खतरों को लेकर आगाह करने में देरी कर दी. डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे वैश्विक महामारी घोषित करने में काफी देरी कर दी. नतीजतन ये वायरस पूरी दुनिया में फैलता चला गया.

    चीन ने भारत को दिया है संक्रमण के आयतित मामलों पर रोक लगाने का सुझाव
    लॉकडाउन के फैसले के बाद भी चीन ने भारत को संक्रमण फैलने को लेकर आगाह किया है. चीन ने बताया है कि कैसे भारत कोरोना को काबू कर सकता है. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के एक्सपर्ट जेंग गुआंग के मुताबिक, भारत को कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आयति‍त मामले (Imported Cases) रोकने होंगे. आसान शब्‍दों में समझें तो बाहर से आए लोगों के जरिये फैल रहे संक्रमण को तुरंत रोकना होगा. कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल किया था कि अगर भारत में पहला मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह में पता चल गया था, तो सख्‍त फैसले लेने में इतनी देरी क्यों की गई. दरअसल, इस बीच भारत में विदेशों से आए लोगों के जरिये कोरोना वायरस फैल गया. सरकार लॉकडाउन करके उनके जरिये बनी चेन को फैलने से रोक सकती थी. गुआंग के मुताबिक, इस वायरस पर काबू करके भारत और चीन दुनिया को दिखा सकते हैं कि उन्होंने कैसे ये लड़ाई लड़ी.

    मदद की पेशकश, चीनी कंपनियां भारत में बना सकती हैं मेकशिफ्ट अस्‍पताल
    पिछले दिनों चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बात की और उन्हें कोरोना वायरस से लड़ने में हरसंभव मदद की पेशकश की. इससे पहले जब चीन में मुश्किल में था तो भारत ने उसकी मेडिकल उपकरण भेजकर काफी मदद की थी. अब चीन ने हर दिन भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा है कि भारत चीन से सबक ले सकता है. चीन में मेकशिफ्ट अस्‍पताल बनाने वाली कई कंपनियों ने भारत समेत सभी एशियाई देशों में अस्‍थायी अस्‍पताल बनाने में मदद की पेशकश की है. चायना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉर्प के एक एक्सपर्ट ने ग्लोबल टाइम्स को बताया 'चीन की कई कंपनियां भारत में कई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं. इन कंपनियों के पास पहले से ही अच्छा सप्लाई नेटवर्क है. भारत चाहे तो ये कंपनियां चीन के वुहान की तरह भारत में अस्थायी कोरोना अस्पताल बनाने का काम शुरू कर सकती हैं.'

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