रोज़ाना दो बार 100 दंड-बैठक लगाने वाले नए जापानी पीएम से मिलिए

रोज़ाना दो बार 100 दंड-बैठक लगाने वाले नए जापानी पीएम से मिलिए
योशीहिदे सुगा का जापानी पीएम बनना तय है.

शिंजो आबे (Shinzo Abe) के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बनने जा रहे योशीहिदे सुगा जापान प्रशासन का चेहरा रहे हैं और पहले के नेताओं की तरह किसी सियासी परिवार (Political Family) से नहीं आते. आबे के राइट हैंड रहे सुगा के बारे में तमाम फैक्ट्स.

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  • Last Updated: September 15, 2020, 7:32 AM IST
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खराब स्वास्थ्य के चलते जापान के प्रधानमंत्री (PM of Japan) शिंजो आबे के पिछले महीने इस्तीफा देने के बाद से ही माना जा रहा था कि पिछले करीब 8 सालों से उनके दाहिने हाथ के तौर पर पहचाने गए योशीहिदे सुगा नए पीएम हो सकते हैं. जापान की सत्तारूढ़ पार्टी ने आबे के बाद 534 में से 377 वोटों के साथ सुगा को नया नेता चुन लिया. आगामी बुधवार को 71 वर्षीय सुगा को प्रधानमंत्री पद (PMO) संभालना तय हो चुका है, तो दुनिया भर में दिलचस्पी है कि जापान के इस नये पीएम के बारे में जो कुछ जानने लायक है, उसे जाना जाए.

किसान परिवार से आते हैं सुगा
सुगा जापान के उस अभिजात्य वर्ग से नहीं हैं, जिसका लंबे समय तक वहां की सियासत में दबदबा रहा बल्कि वो एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती किसानी से जुड़े परिवार से आने वाले सुगा ने राजनीति में कदम होसेई यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन के बाद रखा था. लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ने और कुछ प्रशासनिक ज़िम्मेदारियां संभालने के बाद 2005 में कोइज़ुमी सरकार में उन्हें मंत्री पद मिला था.

आबे के साथ नज़दीकियां
कोइज़ुमी सरकार के समय से ही सुगा के संबंध शिंजो आबे के साथ बेहतर होते गए. 2012 में आबे के दोबारा पीएम बनने पर उन्हें मुख्य कैबिनेट सेक्रेट्री जैसा अहम पद मिला तो जापान की मुश्किल कही जाने वाली ब्यूरोक्रेसी को मैनेज करने की ज़िम्मेदारी भी सुगा निभाते रहे. कुल मिलाकर, नज़दीकियां बढ़ती गईं और सुगा को आबे का न केवल राइट हैंड बल्कि उत्तराधिकारी माना जा चुका था.



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प्रधानमंत्री बनने जा रहे योशीहिदे सुगा आबे की नीतियां जारी रख सकते हैं.


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फर्श से अर्श तक सफर
चूंकि सुगा किसी राजनीतिक विरासत वाले परिवार से नहीं आते हैं, इसलिए उनका प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना वाकई बड़ी उपलब्धि है. खुद सुगा भी कहते हैं कि उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरूआत शून्य से की थी और पूरा जीवन जापान व जापान के लोगों के लिए समर्पित किया. यहां से देखने वाली बात यह होगी कि सुगा किस तरह की नीतियों को बढ़ावा देते हैं क्योंकि माना तो यही जा रहा है कि वो आबे की नीतियों को आगे बढ़ाएंगे.

यानी जारी रहेगी 'आबेनॉमिक्स'?
सुगा खुद कह चुके हैं कि वो आबे की आर्थिक दृष्टि को जारी रखेंगे, जिसमें बेहद सहज नीतियों के साथ ही कोविड 19 के दौर में लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकारी खर्च और सुधार से जुड़े मुद्दों पर फोकस होगा. इसके अलावा सुगा जापान के युद्ध के बाद वाले शांतिवादी संविधान में संशोधन में भी दिलचस्पी रखते हैं ताकि सेल्फ डिफेंस फोर्स वैध हो सके, जो आबे का भी अहम एजेंडा रहा.

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पहली प्राथमिकता है कोविड!
हालांकि कहा जा रहा है कि सुगा सबसे पहले कोरोना वायरस महामारी से निपटने पर फोकस करेंगे और अगले छह महीनों के भीतर कारगर वैक्सीन के लिए पुश करना उनका लक्ष्य है. इसके बाद सुगा जापान में बढ़ती उम्र की बढ़ती आबादी और जन्म दर कम होने के मुद्दों के बारे में भी किसी तरह नीतिगत कदम उठा सकते हैं. बहरहाल, सुगा के पास चूंकि रणनीतिक रिश्तों को लेकर अनुभव कम रहा है इसलिए उत्तर कोरिया, चीन और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

सुगा को कहा जाता है अंकल रीवा
सुबह और रात को रोज़ 100 ​दंड बैठक लगाने वाले और पैनकेक के शौकीन सुगा के बारे में एक और रोचक तथ्य यह भी है कि उन्हें 'अंकल रीवा' क्यों कहा गया! अस्ल में, सुगा के सामने ज़िम्मेदारी थी कि सम्राट अकिहितो के हटने के बाद 2019 में नए शाही युग का नाम क्या रखा जाए तब नए सम्राट नरुहितो के लिए शाही युग का नामकरण 'रीवा' हुआ जिसका अर्थ 'सुंदर सदभाव' है. यह घोषणा करने के बाद से ही सुगा को 'अंकल रीवा' कहा जाने लगा.
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