नया ट्विस्ट : क्या चीन और पाक की तरफ झुक रहा है बांग्लादेश?

नया ट्विस्ट : क्या चीन और पाक की तरफ झुक रहा है बांग्लादेश?
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना. फाइल फोटो

लद्दाख में सीमा (Ladakh Border) पर भारत और चीन (India-China Face-Off) आमने-सामने हैं, ऐसे में नेपाल के बाद एक और पड़ोसी बांग्लादेश देश के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है. भारत के सहयोग के बावजूद बांग्लादेश भारतीय राजनयिक को तवज्जो न देकर चीन और पाकिस्तान (China and Pakistan) के साथ संबंध बनाने में लगा है, तो आखिर इसके क्या अर्थ समझे जाने चाहिए?

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भारत और चीन के बीच सीमा (India-China LAC Tension) पर तनाव जारी होने के दरमियान एक तरफ अक्साई चिन में PLA और काराकोरम के पास भारत के T-90 टैंक्स तैनात करने की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ भारत के लिए चिंता ये है कि उसका पड़ोसी बांग्लादेश, चीन से दोस्ती (Bangladesh and China) गांठता और उसे दरकिनार करता नज़र आ रहा है. हालांकि भारत उसे रिझाने की कोशिश में जुटा है लेकिन बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान की तरफ झुकाव दक्षिण एशियाई सियासी समीकरणों (South Asian Politics) में काफी अहम दिख रहा है.

बीते मई महीने में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के बाद जून में चीन ने बांग्लादेश को व्यापारिक सौगात देते हुए उसके 97 फीसदी प्रोडक्टों को ड्यूटी फ्री कर दिया था. इसके बाद चिंता थी कि बांग्लादेश को चीन रिझा रहा है और अब बांग्लादेश वाकई चीन के एहसान को चुकाने के कदम उठा रहा है. भारत के लिए ये परेशानी क्यों है और कैसे भौगोलिक राजनीति को समझना ज़रूरी है?

भारत के साथ बांग्लादेश की बेरुखी
भारत आज सोमवार को ही बांग्लादेश को 10 ब्रॉडगेज डीज़ल इंजन सौंपने जा रहा है. इससे पहले कोविड 19 से लड़ने के लिए भारत उसकी अच्छी खासी मदद कर चुका है, लेकिन बांग्लादेश ने इसके लिए भारत को धन्यवाद पत्र तक नहीं भेजा. बांग्लादेशी अखबार 'भोरेर कागोज' ने लिखा कि बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त रीवा गांगुली दास पिछले चार महीनों से बांग्लोदशी पीएम से मुलाकात के लिए समय मांग रही हैं, लेकिन हसीना उनसे नहीं मिल रही हैं.
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जिनपिंग और हसीना की मुलाकात के बाद चीन और बांग्लादेश की नज़दीकियां बढ़ीं.


भारत के दुश्मनों से बांग्लादेश की नज़दीकी
इतना ही नहीं, बल्कि बांग्लादेशी अखबार के एडिटर श्यामल दत्त ने ये भी लिखा है कि सिलहट में एक एयरपोर्ट टर्मिनल निर्माण के लिए बांग्लादेश ने चीनी कंपनी बीजिंग अर्बन कंस्ट्रक्शन ग्रुप को कॉंट्रैक्ट दे दिया है. यह एयरपोर्ट भारत के उत्तर पूर्व क्षेत्र से बांग्लादेश के साथ सीमा के पास है इसलिए काफी संवेदनशील लोकेशन है.

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दूसरी तरफ, पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. जमात ए इस्लामी के नेता मोतिउर्रहमान निज़ामी को बांगलादेश की हसीना सरकार ने फांसी दी थी, इससे नाराज़ होकर पाकिस्तान ने 2018-19 में ढाका में किसी हाई कमिश्नर को नियुक्त नहीं किया था, लेकिन अब दोनों देश फिर करीब आ रहे हैं. बांग्लादेश 15 सालों में पहली बार पाकिस्तान से कृषि प्रोडक्ट आयात कर रहा है, तो इमरान खान की हसीना से 15 मिनट फोन पर बातचीत चर्चा का विषय बनी हुई है, न केवल भारत बल्कि पाक मीडिया में भी.

इमरान खान के फोन के मायने?
भोरेर कागोज की रिपोर्ट के मुताबिक खान ने हाल में हसीना के साथ फोन पर बातचीत की. क्या बातचीत हुई? यह एक रहस्य बन गया है. कैसे? देखिए. बांग्लादेश में पीएम के प्रेस सचिव ने कहा कि खान ने हसीना से कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई के बारे में चर्चा की और हसीना ने उन्हें विस्तार से इस बारे में उठाए गए सरकारी कदमों की जानकारी दी. साथ ही, बांग्लादेश में बाढ़ के बारे में भी हसीना ने बताया.

दूसरी तरफ, इस कॉल को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में कहा गया ​कि बांग्लादेश के साथ रिश्ते मज़बूत करने के साथ ही खान ने भारत अधिकृत कश्मीर का मामला उठाया और पाकिस्तान का रुख साफ किया. साथ ही, खान ने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान को मिलकर विकास के रास्ते खोलने चाहिए. खान ने हसीना को पाकिस्तान आने का न्योता भी दिया. दोनों देशों की रिपोर्टों में इतने फर्क के बाद द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश ने कश्मीर को भारत का अंदरूनी मामला माना.

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भारत और बांग्लादेश के संबंधों में नाज़ुक मोड़.


बांग्लादेश क्यों है भारत से खफा?
पिछले साल के आखिरी दिनों में भारत ने एनआरसी और नागरिकता संशोधन एक्ट संबंधी जो कदम उठाए, उनके खिलाफ बांग्लादेश में खासा विरोध देखा गया. कई तरह की​ रिपोर्ट्स से बांग्लादेशी नागरिकों और सरकार में एक डर और शक पैदा होता देखा गया. हालांकि औपचारिक तौर पर बांग्लादेश ने इसे भारत का अंदरूनी मामला बताया था लेकिन बांग्लादेश की राजनीति में यह मुद्दा काफी विवादित रहा.

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इसके कुछ ही समय बाद, कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने के कारण दोनों देशों के बीच संवादहीनता बढ़ी. इस बीच भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर फायरिंग की कुछ घटनाएं हुईं. उधर, इसी साल पाक के उच्चायुक्त ने भी ढाका में कार्यभार संभाला. कुल मिलाकर हालात ऐसे बने कि बांग्लादेश की भारत के खिलाफ नाराज़गी का नतीजा पाकिस्तान और चीन के पक्ष में जाता हुआ दिखने लगा.

अब दृश्य ऐसा है कि नेपाल पहले ही भारत के खिलाफ चालें चलने का खेल शुरू कर चुका है, चीन ने भूटान में डोकलाम क्षेत्र के आसपास अपने दावे मज़बूत कर दिए हैं, मदद के बावजूद बांग्लादेश भी भारत के खिलाफ जाकर पाकिस्तान और चीन में दोस्त ढूंढ़ रहा है, जबकि चीन के साथ सीमाओं पर तनाव बना हुआ है. ऐसे में भारत को फूंक फूंक कर कदम रखने की ज़रूरत पेश आ रही है.
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