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जानें कोविड-19 वैक्‍सीन के लिए इस भारतीय कंपनी पर क्‍यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें

News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 12:04 PM IST
जानें कोविड-19 वैक्‍सीन के लिए इस भारतीय कंपनी पर क्‍यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें
कोरेाना वायरस की वैक्‍सीन को लेकर पूरी दुनिया की निगाहें महाराष्‍ट्र में पुणे की सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया पर टिकी हैं.

कोरोना वायरस की वैक्‍सीन (Corona Vaccine) को लेकर माना जा रहा है कि इसे सबसे पहले तैयार करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) हो सकती है. पुणे की ये कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) की वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल सफल होने के बाद इसका उत्पादन शुरू कर देगी.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की जान जा चुकी है. वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था (Global Economy) भी सबसे खराब दौर से गुजर रही है. दुनिया की बड़ी आबादी घरों में बंद (Lockdown) रहने को मजबूर है. दुनियाभर की सरकारें इस वैश्विक महामारी (Pandemic) से निपटने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं. वहीं, दुनियाभर के वैज्ञानिक और शोधकर्ता कोविड-19 का कारगर इलाज (Treatment) ढूंढने में जुटे हैं.

सभी का कहना है कि सिर्फ वैक्‍सीन (Vaccine) ही इस वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में निर्णायक जीत दिला सकती है. वैक्‍सीन मिलने के बाद ही सामान्‍य जीवन पटरी पर लौट सकता है. इस बीच अच्‍छी खबर ये है कि ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल (Human Trial) अगले दौर में पहुंच गया है. अगर वैक्‍सीन के सभी ट्रायल सफल रहते हैं तो महाराष्‍ट्र में पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इसका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन शुरू कर देगी. ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें पुणे की इस कंपनी पर टिकी हैं.

ह्यूमन ट्रायल सफल होने पर शुरू कर दिया जाएगा उत्‍पादन
एसआईआई दुनिया की सबसे बड़ी वैक्‍सीन निर्माता है. कंपनी इस समय कई मोर्चों पर कोरोना वायरस से मुकाबले की तैयारियों में जुटी है. सीरम इस्‍टीट्यूट में इस समय एस्‍ट्राजेनेका का बड़े पैमाने पर उत्‍पादन हो रहा है. वहीं, कंपनी ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) की वैक्‍सीन पर काम कर रही है. एसआईआई ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ वैक्‍सीन उत्पादन के लिए करार किया है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल सफल होने के बाद इसका उत्पादन शुरू कर देगी. साथ ही खुद भी कोरोना वायरस की वैक्‍सीन बनाने की कोशिशों में जुटी है.



ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल सफल होने के बाद पुणे की सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया इसका उत्पादन शुरू कर देगी.




सरकार भी वैक्‍सीन बनाने के काम पर रख रही है पैनी नजर
कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट हेड उमेश शालीग्राम ने बताया कि एसआईआई प्राइवेट कंपनी है, लेकिन हर दिन आधी रात के ठीक पहले सरकार की ओर से मेसेज आता है. इसमें वैक्‍सीन बनाने के काम के अपडेट को लेकर पूछा जाता है. साथ ही पूछा जाता है कि हमें काम करने में कोई परेशानी तो पेश नहीं आ रही है. उन्‍होंने बताया कि अमूमन ये व्‍हाट्सऐप मेसेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साइंटिस्ट एडवाइजर के. विजयराघवन भेजते हैं. वह कहते हैं, 'इससे साफ हो जाताा है कि वैक्‍सीन बनाने को सरकार किस कदर अहमियत दे रही है.'

कंपनी को हर तरह की मंजूरी फास्‍ट-ट्रैक पर मिल रही है
शालीग्राम बताते हैं कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर बस के. राघवन को बताना होता है. इसके बाद किसी भी काम को पूरा होने में देरी नहीं होती है. हर तरह की मंजूरी फास्‍ट-ट्रैक अंदाज में मिल रही है. पहले जिस मंजूरी को मिलने में छह महीने तक का वक्त लगता था वो अब एक से दो दिन में मिल जा रही हैं. कई बार तो छुट्टी के दिन भी मंजूरी मिल रही है. दिन ही नहीं रात में भी मंजूरी दी जा रही है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सरकार वैक्‍सीन बनाने के काम में आने वाली हर रुकावट को दूर करने के लिए दिनरात काम कर रही है.

वैक्‍सीन के साथ कुछ मरीजों को दवा की भी होगी जरूरत
एसआईआई के चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव ऑफिसर (CEO) अदर पूनावाला ने रॉयटर्स को बताया कि दुनियाभर में बेची जाने वाली 60 से 70 फीसदी वैक्‍सीन भारत में ही बनाकर निर्यात की जाती हैं. भारत में अलग-अलग वैक्सीन की करीब 1.5 अरब डोज सालाना बनाई जाती हैं. उनका कहना है कि संक्रमण से लड़ने के लिए वैक्सीन के साथ ही दवाई की भी जरूरत होगी. दरअसल, कई बार वैक्सीन किसी मरीज पर पूरा काम नहीं करती है. ऐसे में उसे पूरे इलाज के लिए दवाई की जरूरत होती है.

अदर पूनावाला ने कहा कि दुनियाभर के वैज्ञानिक, दवाई निर्माता और वैक्‍सीन निर्माता इस समय एकदूसरे का हर तरीके से सहयोग कर रहे हैं ताकि जल्‍द कोरोना वायरस का इलाज लोगों तक पहुंचाया जा सके.


'दुनियाभर के वैज्ञानिक, वैक्‍सीन-दवा निर्माता कर रहे सहयोग'
पुणे में लॉकडाउन के बीच एसआईआई के 150 एकड़ में फैले परिसर में हलचल ज्‍यादा ही है. उमेश शालीग्राम और उनकी टीम दिनरात काम कर रही है. दर्जनों बसें सैकड़ों कर्मचारियों को उनके घरों से कंपनी लाने-ले जाने के काम में लगी हैं. बता दें कि अब तक दुनियाभर में 36 लाख से ज्‍यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. इनमें ढाई लाख से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

ऐसे में हर व्‍यक्ति जानना चाहता है कि कोरोना वैक्‍सीन कब तक बाजार में आ जाएगी? अभी तक संक्रमण का कोई कारगर इलाज भी नहीं ढूंढा जा सका है. अदर पूनावाला ने कहा कि दुनियाभर के वैज्ञानिक, दवाई निर्माता और वैक्‍सीन निर्माता इस समय एकदूसरे का हर तरीके से सहयोग कर रहे हैं ताकि जल्‍द से जल्‍द कोरोना वायरस का इलाज दुनियाभर में लोगों तक पहुंचाया जा सके. वह कहते हैं कि हम सब इस बीमारी से लड़ने के लिए वैक्‍सीन बनाने की होड़ कर रहे हैं, फिर भी सब एकदूसरे का साथ दे रहे हैं.

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First published: May 23, 2020, 11:48 AM IST
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