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सवाल-जवाबः अब बाहर निकलने, पार्क या ऑफिस जाने पर कोरोना संक्रमण का खतरा कितना

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 1:25 PM IST
सवाल-जवाबः अब बाहर निकलने, पार्क या ऑफिस जाने पर कोरोना संक्रमण का खतरा कितना
(सांकेतिक तस्वीर)

लाकडॉउन में ढील के बाद दुनिया धीरे-धीरे खुल रही है. ऐसे कहां जाना कितना सुरक्षित और जोखिम भरा है, पार्क में वॉक कर रहे हों और कोई बगैर मास्क के वहां से गुजर जाए तो क्या होगा. ऐसे तमाम सवालों के जवाब मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरिन ब्रोमेज ने अपने ब्लॉग में तलाशने की कोशिश की है. इसे दुनियाभर में 1.8 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं

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हमारे देश में लॉकडाउन में ढील के बाद आमतौर पर लोग ऑफिस, बाजार, पार्क और काम के लिए घर से निकलने लगे हैं. ऐसे में बहुत से सवाल भी लोगों के जेहन में उठ रहे हैं कि इन हालात में बाहर गए तो क्या कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाएंगे. इन्हीं सब बातों को लेकर मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के बॉयोलॉजी के प्रोफेसर एरिन ब्रोमेज ने एक ब्लॉग लिखा, जिसे अब तक 1.8 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं. तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस ब्लॉग को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है.

ये ब्लॉग तमाम इस तरह के सवालों के जवाब देने की कोशिश करता है. प्रोफेसर ब्रोमेज कंप्रेटिव इम्युनोलॉजिस्ट हैं. उनकी विशेषज्ञता इम्युनोलॉजी में है. वो रिसर्च के साथ पढ़ाने संबंधी काम से जुड़े हैं. उन्होंने हमारे मन में उठ रहे तमाम सवालों के जवाब ब्लॉग में बहुत अच्छी तरह दिए हैं. ये जवाब इस समय इसलिए ज्यादा जरूरी हो गए हैं, क्योंकि दुनिया धीरे-धीरे लॉकडाउन से बाहर आ रही है. आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. इसमें कोई शक नहीं कि इन हालात में कोरोना वायरस से संक्रमित होने या फैलने का खतरा भी बढ़ा है.

सवाल - हम सबसे ज्यादा संक्रमित कहां हो सकते हैं, क्या पार्क में बगैर मास्क के घूम रहा कोई शख्स संक्रमण फैला सकता है?
- डॉ. ब्रोमेज ब्लॉग में लिखते हैं कि ज़्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के ही किसी सदस्य के ज़रिए संक्रमित होते हैं. लेकिन पार्क में अगर कोई व्यक्ति बगैर मास्क के घूम रहा हो तो शायद उससे संक्रमण नहीं होगा. क्योंकि जब आप बाहर निकलते हो, तो खुले वातावरण में ऐसी क्षमता होती है, जिससे सांस छोड़ते समय वायरस तेज़ी से कमज़ोर पड़ सकते हैं.



किसी वायरस को आपको संक्रमित करने के लिए जितना वक़्त चाहिए, उतने वक़्त तक आप उसके संपर्क में खुले वातावरण में नहीं रहते, वायरस तेज़ी से निष्प्रभावी हो सकते हैं.



मतलब ये भी है कि अगर हम कम समय के लिए संक्रमित लोगों के संपर्क में आते हैं, मसलन, अगर कोई जॉगिंग करने वाला अनजाने में आपके नज़दीक से गुज़रता है तो इससे आपके अंदर संक्रमण पैदा होने लायक डोज आना मुश्किल है. क्योंकि उसके लिए संक्रमण के काफी डोज की जरूरत होती है, संक्रमण को टिकने के लिए कम से कम 1,000 सार्स-कोव2 वायरल पार्टिकल्स की ज़रूरत होती है.

सवाल - क्या खांसने वालों से दूर रहना चाहिए
- अगर उसमें कोरोना पॉजिटिव के लक्षण हैं, तो यकीनन उससे दूरी बनानी चाहिए. उनके खांसने और छींकने से निश्चित तौर पर बीमारी फैलती है, लेकिन इसकी दर अलग-अलग है. एक बार की खांसी से क़रीब 80 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से क़रीब 3,000 बूंदें निकलती हैं. ज़्यादातर बूंदें बड़ी और भारी होती हैं., जो जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं. लेकिन कुछ बूंदें हवा में बनी रहती हैं और दूसरे कमरे में भी घुस सकती हैं.

वहीं अगर आप किसी ऐसी लिफ़्ट में फंस गए हैं जिसमें कोई शख़्स खांसने की बजाय छींकता है तो दिक्कत दस गुना बढ़ जाएगी. एक छींक से क़रीब 30,000 बूंदें निकलती हैं. इनमें छोटी बूंदें काफ़ी दूर तक चली जाती हैं. इनकी स्पीड 320 किमी प्रति घंटे तक होती है. इसलिए आपके लिए बेहतर है मास्क हमेशा पहनें और सैनेटाइजर साथ रखें.

प्रतीकात्मक तस्वीर


सवाल- अगर कोई व्यक्ति संक्रमित है तो उसकी छींक या खांसी कितनी खतरनाक होती है?
- प्रोफेसर ब्रोमेज इस बारे में अपने ब्लॉग में लिखते हैं कि अगर कोई शख़्स संक्रमित है तो उसकी एक खांसी या छींक में 20 करोड़ वायरस पार्टिकल्स तक हो सकते हैं. ऐसे में अगर आप किसी व्यक्ति से आमने-सामने बैठकर बात कर रहे हैं और अगर वह व्यक्ति छींक या खांस देता है तो आपमें 1,000 वायरल पार्टिकल आराम से आ जाएंगे और आप संक्रमित हो जाएंगे.

सवाल - क्या जरूरी है कि संक्रमित लोगों के पूरे लक्षण नजर आएं?
- जो जानकारियां आई हैं, उसके अनुसार लोगों में लक्षण नज़र आने से क़रीब पांच दिन पहले से वे संक्रमित हो सकते हैं. कुछ में तो हो सकता है कि कभी भी ये लक्षण नज़र ही नहीं आएं.

सवाल - अगर आपके बगल से ऐसा शख्स निकला है, जिसने मास्क नहीं पहना है और सांस ले रहा है तो इसका क्या असर होगा?
- डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक़, "एक सांस से 50 से 5,000 बूंदें निकलती हैं. इनमें से ज़्यादातर बूंदों की रफ़्तार कम होती है और ये जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं. नाक से सांस लेने पर भी भी कम बूंदें रिलीज होती हैं. सबसे बड़ी ये होती है कि सांस ताक़त के साथ बाहर नहीं निकलती. ऐसे में निचले श्वसन तंत्र से वायरल पार्टिकल बाहर नहीं निकलते. आमतौर पर श्वसन तंत्र के निचले हिस्से में पाए जाने वाले टिश्यूज में ही कोरोना वायरस ज़्यादा पाए जाते हैं.

डॉ. ब्रोमेज एक स्टडी के बारे में बताते हैं जिसमें कहा गया है कि इंफ्लूएंजा से संक्रमित कोई शख्स एक मिनट की सांस में 3 से 20 वायरस आरएनए कॉपीज रिलीज करता है.

सवाल - बोलने, गाने और चिल्लाने पर कितने वायरस रिलीज होते हैं?
- डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, बोलने से रेस्पिरेटरी बूंदों का निकलना 10 गुना बढ़कर क़रीब 200 कॉपीज वायरस प्रति मिनट पर पहुंच जाता है. गाने और चिल्लाने दोनों से हवा में बूंदों की मात्रा काफ़ी बढ़ जाती है. ये बूंदें ऐसे इलाक़ों से भी आती हैं जहां टिश्यूज के संक्रमित होने के आसार अधिक होते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर


सवाल - किस तरह का माहौल ज्यादा जोखिम भरा होता है?
- निश्चित तौर पर ऐसे प्रोफ़ेशन जिनमें लोगों को सीधे तौर पर संक्रमितों के साथ काम करना पड़ता है उनके संक्रमित होने के अधिक आसार होते हैं.

सवाल - खुले में होने वाले इवेंट्स में इसका क्या असर पड़ता है?
- ब्रोमेज ब्लॉग में लिखते हैं कि ओपन प्लान ऑफिस में होने वाले इवेंट्स, स्पोर्ट्स और सोशल इवेंट्स जोख़िम भरे होते हैं. इन मौक़ों पर लोग वायरस से संपर्क में आने के ख़तरे में होते हैं. यहां तक कि कॉल सेंटर जैसी जगहों पर अगर लोग 50 फ़ीट की दूरी पर भी हों तो वायरस की एक कम डोज भी अगर लंबे वक्त तक बनी रहे तो यह संक्रमित करने के लिए पर्याप्त होती है.

सवाल- ऐसे में अब आफिस कैसे होने चाहिए?
- ऐसे ओपन प्लान ऑफिस जिनमें हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था न हो, वे बड़ी दिक्कत की वजह बन सकते हैं. खुले वातावरण में संक्रमण के काफ़ी कम मामले देखे गए हैं. हवा और जगह वायरल लोड को घटा देते हैं. सीमित हवा की आवाजाही और रीसाइकिल्ड एयर भी खासतौर पर दिक्कत पैदा करती है.
साथ ही धूप, गर्मी और आर्द्रता भी वायरस को ज़्यादा देर जिंदा नहीं रहने देते हैं. सामाजिक दूरी और आपसी मेलजोल की अवधि में कमी से भी जोख़िम कम होता है लेकिन, कुछ खुली जगहों पर मेलजोल काफ़ी जोख़िम भरा हो सकता है.

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अशोक कुमार गुप्ता ने जारी किए आदेश.
प्रतीकात्मक तस्वीर


सवाल - ऐसे माहौल में शॉपिंग करने में कितना जोखिम होता है?
- ये तब जोखिम भरा होता है जबकि आप एक सिंगल माहौल में अपेक्षाकृत कम वक्त गुजारते हैं. साथ ही हवा की सीमित आवाजाही और रिसाइकिल्ड हवा ख़ासतौर पर दिक्कत भरी हो सकती है. बंद जगहों में जाने से बचें, क्योंकि वहां हवा की आवाजाही कम होती है. ये विचार कीजिए कि वहां कितने लोग एक वक्त पर मौजूद होंगे और आप वहां कितना वक्त गुजारने वाले हैं.

सवाल - हवादार जगहें क्या ज्यादा सुरक्षित होती हैं?
सवाल - अगर आप एक अच्छी हवादार जगह पर कम लोगों के साथ बैठे हैं तो आपके लिए जोखिम कम है. अगर आप किसी ओपन फ्लोर प्लान ऑफिस में हैं तो आपको गंभीरता के साथ जोखिम पर गौर करना चाहिए. अगर आप एक ऐसी नौकरी में हैं जहां आपको लोगों से आमने-सामने बात करनी पड़ती है या और बुरी स्थिति में चिल्लाना पड़ता है तो जोखिम का आकलन करने की ज़रूरत है.

मिसाल के तौर पर, शॉपिंग मॉल में अगर आप कम भीड़ वाले स्टोर में और अच्छी हवादार जगह पर कम वक्त गुजारते हैं तो आपके संक्रमित होने के आसार कम हैं. खुली जगहों पर संक्रमण का जोखिम कम होता है क्योंकि संक्रामक बूंदें जल्दी ही खत्म हो जाती हैं.

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First published: May 22, 2020, 12:33 PM IST
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