क्या है इजरायल की नई स्पेशल फोर्स, जिसे माना जा रहा है इंडियन एयर फोर्स का ब्लू प्रिंट

क्या है इजरायल की नई स्पेशल फोर्स, जिसे माना जा रहा है इंडियन एयर फोर्स का ब्लू प्रिंट
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इज़रायल की वायु सेना (Israel's Air Force) की जितनी ताकतें हैं, उन सबको एक विंग में यानी एक कमांड में लाने के कदम को क्रांतिकारी Idea माना जा रहा है. क्या इज़रायल का यह कदम Indian Air Force के कायाकल्प के लिए कारगर साबित हो सकता है? ये भी जानिए कि इस बारे में Aviation Experts का क्या मानना है.

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इज़रायली वायु सेना की तमाम Special Forces को एक कमांड में शामिल करने वाली 7वीं एरियल स्पेशल फोर्स विंग (7th Aerial Special Force Wing) बनाई गई है. इज़रायल की सुरक्षा की इस रणनीति (Defense Strategy) के बारे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऐसे कदम से भारत को भी प्रेरणा लेना होगी और इसी आइडिया के आधार पर भारतीय वायुसेना (IAF) की भविष्य की रणनीतियां तैयार हो सकती हैं.

क्यों बनाया गया यह स्क्वाड्रन?
आर्मी की प्रेस रिलीज़ के हवाले से खबरों में कहा गया है कि 7वीं एरियल स्पेशल फोर्स विंग बनाने का मकसद कई मोर्चों पर उभरकर आ रहे खतरों का जवाब देना और ऑपरेशनल ज़रूरतों को पूरा करना है. इस विंग से यूनिटों के ऑपरेशनल प्रभाव को बढ़ाया जाएगा. इज़रायल की वायुसेना की विशेष गतिविधियों, रूटीन और इमरजेंसी ऑपरेशनों के लिए यह विंग हमेशा अपने ढंग से बड़ी ताकत के रूप में सहयोग देगी.

कैसा है इस दस्ते का गठन?
इस विंग में सर्च ऑपरेशन के साथ राहत कार्य करने वाली यूनिट 669 के साथ ही, शालडाग कमांडो यूनिट और दुश्मनों के खेमों में एयरफील्ड बनाने वाले दस्तों को शामिल किया गया है. फ्रंटल लैंडिंग यूनिट इसके अलावा विंग के लिए इंटेलिजेंस यूनिट और स्पेशल फोर्स स्कूल के तौर पर भी जुड़ेगी. इसे इज़रायल वायुसेना के इतिहास में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है.



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भारत और इज़रायल के संबंध दोस्ताना रहे हैं, खासकर रक्षा क्षेत्र में.


क्यों पड़ी इस तरह के दस्ते की ज़रूरत?
इज़रायल की वायुसेना को अस्ल में, नियमित रूप से मिलिट्री ऑपरेशनों को अंजाम देना होता है क्योंकि उग्रवादी संगठन कहे जाने वाले हमास के ठिकानों को गाज़ा पट्टी पर निशाना बनाना होता है. दूसरी तरफ, इज़रायली वायुसेना को सीरिया में ईरानी गतिविधियों के खिलाफ भी एयरस्ट्राइक करना होती है.

कुल मिलाकर, संघर्षशील इलाकों में मुब्तिला इज़रायल की चिंता हमेशा यही रहती है कि ईरानी सेना अपना दबदबा बढ़ा न ले और उग्रवादी ताकतें इज़रायल के खिलाफ अपना सिर उठाने की जुर्रत न करें. इन्हीं तमाम कारणों से वायु सेना को और मज़बूती से सक्रिय और असरदार करने के लिए नई विंग बनाई गई है.

कैसे भारत के लिए काम का है आइडिया
7वीं एरियल स्पेशल फोर्स विंग ने एविएशन विशेषज्ञों के ​बीच काफी चर्चा हासिल की है और माना जा रहा है कि भारत के लिए यह कॉंसेप्ट वायु सेना के भविष्य के स्क्वाड्रनों के लिए ब्लूप्रिंट का काम कर सकता है. अस्ल में, इज़रायल की इस विंग की अहमियत इसलिए है कि यह दो तरफा संघर्षों में एक साथ कुशलता से सक्रिय रह सकती है.

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चूंकि भारत के सामने दो विपरीत दिशाओं में सीमाओं पर चुनौतियों की स्थिति रहती है. चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सीमाओं पर भारत को लगातार सतर्क रहना होता है. साथ ही जब भारतीय वायुसेना अपने 28 स्क्वाड्रनों को बढ़ाकर 40 करने पर विचार कर रही है, तो विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इज़रायल की नई विंग का आइडिया दो मोर्चों पर संघर्ष के लिए कारगर हो सकता है.

ये भी गौरतलब है कि भारत और इज़रायल के बीच खासे रक्षा समझौते और सहयोग रहे हैं. मसलन, हालिया खबरों के मुताबिक भारत ने पिछले साल इज़रायल से जो एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलें (Spike ATGM) खरीदी थीं, भारतीय आर्मी इन्हें और खरीदने की भी योजना बना रही है.
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