जानिए उस इजरायली हेरॉन ड्रोन के बारे में, जो चीन की LAC पर रखेगा नजर

जानिए उस इजरायली हेरॉन ड्रोन के बारे में, जो चीन की LAC पर रखेगा नजर
निगारनी के लिहाज से हेरॉन विश्वस्तरीय ड्रोन है जो अब भारत-चीन सीमा पर निगरानी रखेगा. (फाइल फोटो)

भारत ने चीन सीमा (Indo-china Border) पर निगरानी के लिए हेरोन नाम का खास ड्रोन (Drone) तैनात किया है. इसकी निगरानी क्षमता बेहतरीन है.

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नई दिल्ली: इस समय पूरी दुनिया में सैन्य क्षमता (Military Capablity) का विकास तकनीकी क्षमता हो चुका है. अमेरिका, चीन सहित दुनिया के कई देश अपनी सेना में रोबोट के उपयोग की तैयारी रहे हैं. इस कड़ी में वे सारे उपकरण  शामिल हैं जिनके उपयोग के लिए इंसान की जरूरत न हो. इनमें प्रमुखता से शामिल हैं ड्रोन जिन्हें अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) भी कहा जाता है. ऐसा ही एक ड्रोन इजराइल का हेरॉन (Heron) है जो इन दिनों खासतौर पर चर्चा में हैं.

क्या है यह हेरॉन
इजराइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने निगरानी करने वाले करने वाले उपकरणों में खास ड्रोन तैयार किए हैं. इन खास एयरक्राफ्ट को आज के आधुनिक युद्ध स्थलों से खुफिया जानकारी हासिल करने में महारत है. हेरॉन या माकात्ज एक मीडियम एल्टीट्यूड का UAV है. इसे खास तौर पर निगरानी और सर्विलियंस ऑपरेशन्स के लिए बनाया गया है.इसे आईएआई ने पअनपे माल्टा विभाग में बनाया है.  इसे कनाजा की कंपनियों के सहयोग से बनाया गया है.

कैसे काम करता है यह
इस सदी के पहले दशक से ही इसकी दुनिया में काफी मांग रही. यह सिस्टम पूरी तरह से स्वचालित है और इसके उड़ान भरने और उतरने के दौरान विपरीत मौसमी हालातों में भी कोई परेशानी नहीं होती है. हेरॉन 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और यह इसे चलाने वालों को युद्ध के मैदान पर रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है. यह जीपीएस नेवीगेशन सिस्टम के जरिए  निगरानी का काम करता है.



Drones
यह ड्रोन स्वाचलित है और इसका विपरीत मौसम पर भी असर नहीं होता. (प्रतीकात्मक तस्वीर). (प्रतीकात्मक तस्वीर)


संपर्क टूटने पर खुद ही वापस आ जाता है
इसे पहले से भी प्रोग्राम किए जा सकता है जिसकी वजह से यह पूरी तरह से स्वचलित हो जाता है. इसके अलावा इस जमीन से भी नियंत्रित किया जा सका है. या फिर दोनों के संयोंजन से भी इसका संचालन किया जा सकता है. अपने बेस से संपर्क टूटने पर यह खुद ही बेस पर वापस आ सकता है. इस सिस्टम में स्वचलित लॉन्च और रिकवरी है और यह हर मौसम में काम करने में सक्षम होता है.

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और भी आधुनिक सिस्टम से लैस है यह
हेरॉन में बहुत से सेंसर्स हैं जिसमें थर्मोग्राफिक कैमरा शामिल है जो इंफ्रारेड और प्रकाश तरंगों का उपयोग कर हवा से जमीन पर निगरानी रखने के काम आता है. इसमें कोमइंनट (COMINT) और एलइंट (ELINT) इंटेलिजेंस सिस्टम के साथ बहुत से राडार सिस्टम भी का लगाए जा सकते हैं. पूरे सिस्टम का वजह 250 किलोग्राम तक हो सकता है.  इसके अलावा यह निशाना ढूंढने में भी सक्षम है.

इजराइली ड्रोन को तकनीकी रूप से काफी मददगार माना जाता है. तस्वीर- https://www.iai.co.il/p/heron-tp
इजराइली ड्रोन को तकनीकी रूप से काफी मददगार माना जाता है. तस्वीर- https://www.iai.co.il/p/heron-tp


पेलोड सेंसर भी शानदार
पेलोड सेसंर जमीन पर कंट्रोल स्टेशन से सीधे या फिर सैटेलाइट के जरिए संपर्क कर सकते हैं. नेविगेशन सिस्टम की तरह पेलोड को भी या तो पहले से प्रोग्राम किया जा सकता है या फिर रिमोट कंट्रोल किया जा सकता है या दोनों का मिला जुला इस्तेमाल किया जा सकता है. हेरॉन और उसके कई प्रकार के UAV का उपयोग तुर्की, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और भारत जैसे कर चुके हैं और कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने इसे अफगानिस्तान युद्ध में इस्तेमाल किया था.

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भारत चीन के खिलाफ करेगा इसका प्रयोग
हाल ही में भारत और चीन के बीच हुए सीमा विवाद के चलते उपजे तनाव के कारण भारत सरकार ने भारत चीन सीमा पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया और इसके लिए हेरॉन ड्रोन को उपयोग करना तय किया. भारत और चीन की बीच की सीमा हिमालय के पर्वतों पर पड़ती है, इसलिए इस तरह के इलाकों में युद्ध बहुत अलग तरह का हो जाता है. यहां के दुर्गम इलाकों में सीधे दूरबीन से नजर नहीं रखी जा सकती है. इसलिए हेरॉन जैसे ड्रोन काफी उपयोगी साबित होते हैं.
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