कितना खास है Space X का ड्रैगन क्रू और कितना अलग है यह दूसरे अंतरिक्ष यानों से

कितना खास है Space X का ड्रैगन क्रू और कितना अलग है यह दूसरे अंतरिक्ष यानों से
स्पेस एक्स का ड्रैगन क्रू कैप्सूल में दो नासा अंतरिक्ष यात्री ISS गए हैं.

हाल ही में स्पेस एक्स (Space X) के ड्रैगन क्रू कैप्सूल (Dragon Crew capsule) ने दो अंतरिक्ष यात्रियों को ISS में पहुंचाया है. इस कैप्सूल में कई बातें हैं जो उसे दूसरे यानों से बहुत अलग बनाती हैं.

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नई दिल्ली: अमेरिकी अंतरिक्ष के क्षेत्र में पहली बार एक निजी प्रक्षेपण से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया. 30 मई को एलन मस्क (Elon musk) की कंपनी स्पेस एक्स (Space X) का ड्रैगन क्रू कैपसूल (Dragon Crew capsule) दो नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर प्रक्षेपित हुआ. इसके अगले दिन यह कैप्सूल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के साथ जुड़ गया और दोनों यात्रियों के सकुशल स्पेस स्टेशन पहुंचने से यह ऐतिहासिक अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया.

क्या है यह ड्रैगन क्रू
स्पेस एक्स का यह खास कैप्सूल ड्रैगन क्रू एक खास तरह का कैप्सूल है जो स्पेस एक्स कंपनी ने डिजाइन किया है. इसे फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया है. इसमें एक बार में सात अंतरिक्ष यात्री भेजे जा सकते हैं. ड्रैगन-2 रीयूजेबल यानि कि बार-बार उपयोग में लाया जा सकने वाला अंतरिक्ष यान है. यह ड्रैगन 1 कार्गो स्पेसक्राफ्ट की अगली पीढ़ी का यान है. इसके दो प्रकार में एक क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के काम में आता है. इससे अंतरिक्ष यात्रियों को वापस धरती पर ही लाया जा सकता है.

और क्या नया है इस कैप्सूल में



इसे कैप्सूल की खासियत यह भी है कि इसमें अन्य किसी भी अंतरिक्ष यान के मुकाबले काफी जगह है. पहली बार ऐसे कैप्सूल का उपयोग हुआ है जिसमें सात अंतरिक्ष यात्री एक साथ जा सकते हैं. उसकी ऊंचाई भी अमेरिका के पिछले अपोलो कमांड मॉड्यूल से ज्यादा है. इस कैप्सूल में काफी कम नॉब्स और बटन है. इनकी जगह कैप्सूल में टच स्क्रीन को ज्यादा तरजीह दी गई है. इसमें तीन बड़े स्क्रीन लगाए हैं जो पूरी तरह से टच स्क्रीन से संचालित होते  हैं.



Rocket
9 साल से अमेरिका की धरती से कोईअंतरिक्ष यात्री ISS नहीं गया था


 

 

पहली बार होगी डॉकिंग
इस कैप्सूल की सबसे खास बात यह है कि इसे डॉक किया जा सकता है. यानि कि यह खुद को अपनेआप ही दूसरे अंतरिक्ष यान से जोड़ सकता है. इस मामले में यह इस लायक बनाया गया है कि यह खुद को स्वतः ही ISS से जोड़ सके जिससे कि अंतरिक्ष यात्री ISS  में आसानी से प्रवेश कर सकें. यह सुविधा अब तक केवल रूस के सुयोज और प्रोग्रेस यान में ही उपलब्ध थी.

तो इससे पहले क्या था तरीका
डॉकिंग के अलावा दो अंतरिक्ष यान बर्थिंग प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं. इसमें एक यान के वैज्ञानिकों को रोबोटिक आर्म का प्रयोग कर जुड़ने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. ऐसा तब ज्यादा उपयोगी होता है जब दूसरा यान बेकार हो या दोनों यानों में डॉकिंग संभव न हो. डॉकिंग के लिए दोनों यानों के जुड़ने वाले हिस्से में डिजाइन के स्तर पर समानताएं होनी जरूरी है.

Space
यह पहला अमेरिकी यान है जो ISS से डॉक हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटो)


खास बचाव व्यवस्था भी है इस कैप्सूल में
इस कैप्सूल में लॉन्च एस्केप सिस्टम (Launch escape system)  भी है जो इससे जुड़ा एक क्रू सेफ्टी सिस्टम हैं. इसमें कैप्सूस को प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) से अलग करने  की क्षमता होती है. ऐसा आपातकाल की स्थिति में बहुत उपयोगी होता है जब मिशन को स्थगित करने की नौबत आती है. ऐसा तब होता है जब प्रक्षेपण यान में विस्फोट होने की संभावना होती है. इसमें एक ऑटोमेटिक सिस्टम होता है जो रॉकेट के विफल होने की फौरन पहचान कर लेता है और क्रू कमांडर के एक्टिवेशन करने पर यह काम करना शुरू कर देता है.

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First published: June 1, 2020, 1:27 PM IST
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