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पुरी के अलावा देश की बाकी शहरों में क्या है पानी की क्वालिटी का हाल

पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) का मुद्दा पुरी की नल से पेयजल योजना के बाद फिर उठा है. (फाइल फोटो)

पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) का मुद्दा पुरी की नल से पेयजल योजना के बाद फिर उठा है. (फाइल फोटो)

ओडिशा के पुरी शहर (Puri) को अब हमेशा से उच्च गुणवत्ता का पानी (Quality of Water) नल से ही पीने (Drink form Tap) को मिलेगा. लेकिन इस मामले में देश के शहर बहुत पीछे हैं.

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    हाल ही में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ‘नल से पेयजल’ ( Drink From Tap) अभियान का उद्घाटन किया. इसके बाद पुरी भारत का ऐसा पहला शहर बन गया है जहां 24 घंटे पीने का पानी (Drinking Water) उपलब्ध हो रहा है. भारत जैसे देश में नल में पीने योग्य पानी आना बहुत ही हैरान करने वाली लगती है. देश के बहुत से शहरों में सरकार या नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में तो बहुत ही बुरा हाल है. ऐसे में पुरी देश के लिए एक बड़ी मिसाल है. आइए जानते हैं कि देश के बाकी शहरों में क्या स्थिति है.

    इससे पहले हम बाकी शहरों की स्थिति जानें, यह जान लेना जरूरी है कि पुरी में केवल पानी की गुणवत्ता को ही सुनिश्चित नहीं किया गया है. शहर के पानी को IS 10500 गुणवत्ता मानकों के स्तर पर पहुंचाया है. लेकिन सरकार ने यह भी सुनिश्चितकिया है कि लोगों को यह पानी हर जगह स्वच्छ और विश्वसनीय रूप से मिल सके. इसके लिए शहर में जगह जगह नल लगाए गए हैं जिससे लोगों को पानी खरीदने की जरूरत नहीं पड़े. इसे 2.5 लाख की आबादी  के साथ हर साल 2 करोड़ यात्रियों को भी फायदा होगा.

    मानक ब्यूरो ने की थी जांच
    भारत के अन्य शहरों में स्थिति पूरी तरह उलट नहीं तो कुछ अलग जरूर है. दो साल पहले भारतीय मानक ब्यूरो ने देश के कई शहरों में जल आपूर्ति की गुणवत्ता की स्थिति की जांच की थी.  इन 15 शहरों में ब्यूरो ने 11 मानदंडों को लेकर अलग-अलग जांच की थी. इसकी रिपोर्ट आने पर कुछ विवाद की भी स्थिति बनी थी.

    मुंबई और दिल्ली का हाल एक दूसरे से उलट
    इस रिपोर्ट में मुंबई शहर का पानी सबसे साफ बताया गया था. इसके मुताबिक मुंबई का पानी सभी मानदंडों पर पूरी तरह से खरा उतरा था. वहीं दिल्ली के बारे में पाया गया था कि वहां के केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री के आवास पर सभी 11 मानदंड नाकाम रहे थे. इन 11 मानदंडों में भौतिक, रसायनिक, बैक्टीरियोलॉजिकल सहित ऐसी जांच शामिल थी जिससे पानी में जहरीले तत्वों की मौजूदगी का पता चलता है.

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    देश के शहरों में अभी सक्षम लोग बोतल का पानी (Bottle Water) खरीद कर अपनी प्यास बुझाते हैं. (credit: shutterstock/KieferPix)


    बाकी स्थानों पर थे ये शहर
    इस सूची में मुंबई शहर जहां शीर्ष पर था, वहीं दिल्ली का आखिरी स्थान था. दूसरे स्थान पर हैदराबाद और भुवनेश्वर रहे थे जिनके नमूने केवल एक मानदंड पर नाकाम रहे थे. रांची का तीसरा स्थान था. रायपुर 5 नमूनों की नाकामी से चौथे, अमरावती 6 के साथ पांचवे  और शिमला 9 के साथ छठे स्थान पर थे. इसके बाद के सभी शहरो में सभी मानदंड नाकाम रहे, लेकिन उनकी रैंकिंग नाकाम नमूनों की कुल संख्या के आधार पर बनी थी.

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    इन शहरों का बुरा हाल
    इस सूची में 7वें और 8वें स्थान पर चंडीगढ़, तिरुवनंतपुरम थे जबकि पटना, भोपाल, गुवाहाटी, बेंगुलुरू और गांधीनगर संयुक्त रूप से दसवें स्थान पर रहे. 11वें स्थान पर लखनऊ और जम्मू, 12वें पर जयपुर और देहरादून, 13वें पर चेन्नई, 14वें पर कोलकाता और अंत में दिल्ली का स्थान रहा.

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    देश के कई शहरों में पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) तो दूर पानी की कमी बहुत अधिक पाई जाती है. (File Photo)


    यह होता है सिस्टम
    जलआपूर्ति करने के लिए शहर के जल प्रदाय संस्था को पानी की गुणवत्ता के एक विशेष स्तर को सुनिश्चित करना होता है. इसके लिए शहर के कुछ इलाकों में जलशोधन संयंत्र लगाए जाते हैं और वहां से पानी की आपूर्ति पूरे शहर के विभिन्न हिस्सों में की जाती है. यह जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य सेवा विभाग की ही होती है वह पानी की यथोचित गुणवत्ता सुनिश्चित करे. शहर में पानी के वितरण की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की होती है.

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    एक बड़ी चुनौती यह है कि पानी की गुणवत्ता में अधिकांश मामलों में खराबी वितरण के दौरान आती है. पाइप पुराने होना, बीच फूटने से आस पास फैल गंदे पानी का पाइप में घुस कर साफ पानी को खराब करना. समय समय पर पानी के वितरण पाइपों का रखरखाव ठीक से ना होना इससे बहुत से शहरों में पानी के समुचित उपयोग में भी फर्क पड़ता है.

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