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क्या हैं चीन के कन्फ्यूशियस सेंटर? क्यों भारत अपना रहा है इन पर सख्त रवैया?

क्या हैं चीन के कन्फ्यूशियस सेंटर? क्यों भारत अपना रहा है इन पर सख्त रवैया?

कई देशों में सक्रिय हैं चीन के कन्फ्यूशियस सेंटर.

कई देशों में सक्रिय हैं चीन के कन्फ्यूशियस सेंटर.

पिछले 15 सालों से भी ज़्यादा समय से दुनिया में चीन के इस तरह के सेंटर चल रहे हैं, जो सांस्कृतिक रूप से अहमियत रखते हैं. भारत में कुछ यूनिवर्सिटियों को केंद्र सरकार ने एक पत्र भेजकर इन पर पूरी निगरानी शुरू कर दी है. सीमा पर भारत चीन तनाव (India China Border Tension) के बाद से चीनी भाषा को नई शिक्षा नीति से भी बाहर कर दिया गया है.

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    कुछ इंस्टिट्यूशनों को एक पत्र 29 जुलाई को मिला, जिसमें उनसे कन्फ्यूशियस सेंटरों (CI) और चीनी भाषा (Chinese Language) सिखाने वाले केंद्रों के बारे में तमाम जानकारियां मांगी गईं. खबरों में ये भी कहा गया कि शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) से जारी हुए इस पत्र के मुताबिक विदेशी संस्थाओं के सहयोग से जो इंस्टिट्यूट चल रहे हैं, उनकी पूरी समीक्षा की जाना है. केंद्र सरकार के इस कदम के बाद से चीन का CI प्रोग्राम चर्चा में आ गया है. क्या आपको पता है कि ये क्या है और भारत व दुनिया में इसकी क्या पहुंच है?

    क्या हैं कन्फ्यूशियस सेंटर?
    दुनिया के 162 देशों में 1172 कन्फ्यूशियस सेंटर या क्लासरूम संचालित होते हैं. चीनी भाषा को एक विदेशी भाषा के तौर पर सिखाए जाने के लिए चीन का राष्ट्रीय कार्यालय यानी हैनबैन ने केंद्र स्थापित करवाए हैं, जिनकी शुरूआत 2004 में सिओल से हुई थी. हैनबैन चीनी शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है और उसकी वेबसाइट पर उल्लेख है कि विदेशों में चीनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ये केंद्र अहम हैं.

    भारत में कितने CI हैं?
    देश में सात यूनिवर्सिटियों में कन्फ्यूशियस सेंटर चल रहे हैं. इनके अलावा, चीन के दखल के साथ इंटर स्कूल कोऑपरेशन स्तर पर 54 एमओयू भी हुए हैं, जिनका संबंध CI से नहीं है, लेकिन इन सबकी समीक्षा शुरू हो गई है. हैनबैन की वेबसाइट पर भारत की मुंबई यूनिवर्सिटी, वेल्लूर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में CI होने का उल्लेख है. इनके अलावा, कोलकाता, कोएंबटूर और गुड़गांव स्थित तीन और विश्वविद्यालयीन संस्थानों में तीन CC होने की बात भी कही गई है.

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    सीमा पर तनाव के बाद शिक्षा नीति से भारत ने चीनी भाषा को बाहर कर दिया है. प्रतीकात्मक तस्वीर.


    CI की समीक्षा का क्या मतलब है?
    बीते 6 अगस्त को विदेश मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कन्फ्यूशियस सेंटरों के लिए विदेश मंत्रालय की मंज़ूरी अनिवार्य है, यह पहले से तय था. दूसरी तरफ, 4 अगस्त को चीन के दूतावास ने कहा कि CI और CC पिछले 10 सालों से भारत में चल रहे हैं, इसलिए बेवजह इन पर राजनीति नहीं की जाना चाहिए.

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    भारत में कई अधिकारियों को चीनी भाषा यानी मैंडेरिन सिखाए जाने के लिए केंद्र सरकार पहले भी हैनबैन के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला चुकी है. ​बीते 15 जून को लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी में भारत और चीनी सेना के बीच ​हुई हिंसा के बाद से भारत ने चीन के साथ रवैया बदला है. द हिंदू ​की रिपोर्ट की मानें तो सीबीएसई स्कूलों के लिए मैंडेरिन की स्टडी की जो योजना थी, उसे भारत ने फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

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    हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि शिक्षा नीति में इस तरह के बदलाव किए जाने से सीमा पर चीन के स्टैंड पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही इससे भारत को चीन से निपटने में कोई मदद मिलेगी.

    दुनिया भर में कैसा है CI का फैलाव?
    इस साल जनवरी से अमेरिका, डेनमार्क, बेल्जियम, नीदरलैंड्स, फ्रांस और स्वीडन में कुछ CI बंद किए जाने की खबरें आ चुकी हैं. अमेरिका में चीनी फंडिंग से जारी यूनिवर्सिटियों को नेशनल डिफेंस के एक नियम के तहत ये सेंटर बंद करने पड़े हैं. ये भी कहा गया है कि कई देशों में चीन नए सिरे से इस कार्यक्रम ब्रांडिंग करने की रणनीति बना रहा है.

    कन्फ्यूशियस ब्रांड की जगह अब चीन की योजना है कि वो हैनबैन का नाम बदलकर भाषा शिक्षा और सहयोग केंद्र रखा जाए. हालांकि चीन के करीब 550 CI और 1000 से ज़्यादा CC दुनिया भर में अब भी सक्रिय हैं.

    Tags: China, Education, Education Policy, Education Policy 2020, India and china, India China Border Tension

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