जानिए क्या होते हैं पापुलर वोट, जिसमें बाइडन हैं ट्रम्प से बहुत आगे

अंतिम फैसले से पहले ही बाइडेन (Jo biden) ट्रम्प (Donald Trump) से पॉपुलर वोटों में भी आगे हैं. (फाइल फोटो)
अंतिम फैसले से पहले ही बाइडेन (Jo biden) ट्रम्प (Donald Trump) से पॉपुलर वोटों में भी आगे हैं. (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Election) इलेक्टोरल वोटों (Electoral Votes) के आधार पर होता है जिसमें मतदातों के द्वारा दिए गए वोट, जो पॉपुलर वोट (Popular Votes) कहे जाते हैं, की सीधी भूमिका नहीं होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 5:19 PM IST
  • Share this:
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Election) नतीजों में रोमांच वोटिंग के दो दिन बाद भी कायम है. यूं तो जो बाइडेन (Joe Biden) जीत के करीब हैं. लेकिन इसे पूरी मतगणना से पहले अंतिम नहीं माना जा सकता है. इस चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं. इनके नतीजे अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया का भविष्य प्रभावित करेंगे. इन चुनावों में इलेक्टोरल (Electoral votes) और पॉपुलर वोट (Popular Votes) की भी बातें हो रही हैं. आइए जानते हैं कि क्या है दोनों में अंतर.

क्या होते हैं पॉपुलर वोट
अमेरिकी चुनाव में यूं तो हर अमेरिकी नागरिक वोट डालता है, लेकिन ये वोट सीधे तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव तय नहीं करते है. यहीं से इस चुनाव की जटिलता शुरू हो जाती है.अमेरिका के 50 राज्यों में से  हर राज्य के चुनाव में नागरिकों वोटों के आधार पर भी राष्ट्रपति के उम्मीदवारों के प्रभावों का आंकलन किया जाता है. ये सभी मत पॉपुलर वोट कहे जाते हैं जो वास्तव में राष्ट्रपति के लिए उन इलेक्टोरल वोटों के लिए होते हैं जो राष्ट्रपति को चुनते हैं.

सीधे नहीं होता है राष्ट्रपति का चुनाव
मतदातों वोटों की सीधे तौर पर भारत और ब्रिटेन जैसे देशों में काफी अहमियत होती है. जहां संसदीय शासन प्रणाली है. लेकिन अमेरिका में अध्यक्षीय शासन प्रणाली है जहां राष्ट्रपति का चुनाव एक समूह चुनता है जिसे इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में मतदाता दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति को नहीं इस इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य चुनते हैं.



Joe Biden, Donald trump, us presidential Election Popular Vote,
बाइडेन (Joe Biden) बुधवार तक ट्रम्प (Donald Trump) से 30 लाख से भी ज्यादा पॉपुलर वोटों से आगे थे.


क्या होता है इलेक्टोरल कॉलेज
इलेक्टोरल कॉलेज में 538 सदस्य होते हैं. दो में से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए आधे से एक ज्यादा यानि 270 इलेक्टोरल वोट हासिल करने होते हैं, तभी वह राष्ट्रपति बन सकता है. हर राज्य को उतने ही इलेक्टोरल  वोट मिलते हैं जितने की उस राज्य से निचले सदन की या हाउस या सीनेट की मिलकर सीटें होती हैं. हर राज्य में दो सीनेट और राज्य के कॉन्ग्रेस के लिए जिलों (भारत के लोकसभा सीट के इलाके के समकक्ष) की संख्या के बराबर इलोक्टोरल वोट्स होते हैं. हर इलेक्टोरल वोट का फैसला इस इलाके के पॉपुलर वोट्स से होता है.

अगर जो बाइडेन राष्ट्रपति बने तो कैसे होंगे व्हाइट हाउस में उनके पहले 100 दिन

पॉपुलर और इलेक्टोरल वोट में भी हो सकता है अंतर
बिलकुल साल 2016 को ही लें. उस चुनाव में पॉपुलर मतों के आधार पर डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटल ने डोनाल्ड ट्रम्प से 30 लाख ज्यादा पॉपुलर वोट हासिल किए थे. जबकि ट्रम्प के पास 77इलेक्टोरल वोट अधिक थे. इस लिहाज से तब ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बन सके थे. यह केवल अमेरिकी चुनाव में ही नहीं होता. भारत में ऐसा हो सकता है कि किसी एक पार्टी ने कुल मतों बाजी मारी हो, लेकिन लोकसभा में जरूरी बहुमत से दूर रह गई हो. ऐसा कई राज्यों में भी देखने को मिला है.

US Election Result, trump win florida, big shock for joe biden, US Election Results,
ट्रम्प (Donald Trump) साल 2016 में भी पॉपुलर वोटों (Popular Votes) में काफी पीछे रह गए थे.


क्यों आता है यह अंतर
ऐसा तब होता है जब हारने वाले उम्मीदार के समर्थक जब अपने क्षेत्र में जीतें तो वे बहुत ही ज्यादा अंतर से जीतें उसी के साथ जीतने वाले उम्मीदवार के समर्थक अपने क्षेत्र में कम अंतर से जीते हैं ऐसे में कुल मतदाता मतों की गणना में हारने वाला राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार विजेता से पॉपुलर वोट में आगे हो जाता है.

अमेरिकी चुनाव में कितना खर्च होता है पैसा और कहां से आता है ये

इस तरह पॉपलुर वोट के आंकलन का राष्ट्रपति के चुनाव से नतीजे पर कोई असर नहीं होता है. हां जिन लोगों को इस प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं होती है, वे जरूर इस बात से हैरान होते हैं कि जब पॉपुलर वोट ज्यादा मिले हैं तब भी वह उम्मीदावार हार क्यों रहा है?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज