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इंदिरा गांधी ने हत्‍या से पहले 31 अक्‍टूबर की सुबह राहुल गांधी से कही थी ये बात

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Updated: October 31, 2019, 9:39 PM IST
इंदिरा गांधी ने हत्‍या से पहले 31 अक्‍टूबर की सुबह राहुल गांधी से कही थी ये बात
इंदिरा गांधी को हत्‍या से काफी समय पहले ही बुलेटप्रूफ जैकेट पहने रहने और सिख सुरक्षाकर्मियों को हटाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्‍होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने 31 अक्‍टूबर 1984 की सुबह राहुल (Rahul Gandhi) और प्रियंका (Priyanka Gandhi) को स्‍कूल जाने से पहले गुडबाय किस (Goodbye Kiss) किया. फिर राहुल गांधी से कुछ देर बात की. इसके बाद ब्रिटेन (Britain) की प्रिंसेस एनी (Princess Anne) के डिनर के इंतजामों का जायजा लिया. फिर इंटरव्‍यू (Interview) देने के लिए 1 अकबर रोड के लिए निकलीं. इसी दौरान 1 सफदरजंग के विकेट गेट पर बेअंत सिंह (Beant Singh) और सतवंत सिंह (Satwant Singh) ने उन पर 36 गोलियां चला दीं.

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  • Last Updated: October 31, 2019, 9:39 PM IST
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राशिद किदवई

नई दिल्‍ली. 31 अक्‍टूबर 1984 की सुबह कांग्रेस (Congress) की मौजूदा अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने गोलियां चलने की आवाज सुनी. पहले तो उन्‍हें लगा कि नजदीक में कोई दिवाली के पटाखे (Crackers) चला रहा है. लेकिन तभी उन्‍हें अहसास हुआ कि ये आवाज पटाखों से अलग है. उन्‍होंने तुरंत बाहर की ओर दौड़ (Sprint) लगा दी. बाहर का मंजर देखकर उनकी चीख निकल गई. उन्‍होंने देखा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Former PM Indira Gandhi) बुरी तरह से जख्‍मी हालत में जमीन पर पड़ी हैं. इसके बाद एक सफेद एंबेसडर कार इंदिरा गांधी को लेकर महज 3 किलोमीटर दूर मौजूद एम्‍स (AIIMS) की ओर दौड़ पड़ी. गाउन पहने कार में बैठी सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी का सिर अपनी गोद में रख लिया.

प्रियंका को लगा, आज दादी ने ज्‍यादा देर तक गले लगाया
शायद एम्‍स पहुंचने से पहले ही इंदिरा गांधी अंतिम सांस ले चुकी थीं, लेकिन डॉक्‍टरों ने घंटों अपनी ओर से कोशिश की. उन्‍हें लगातार ब्‍लड चढ़ाया गया. लेकिन नियति के सामने किसी की नहीं चली और इंदिरा गांधी ने दुनिया को अलविदा कह दिया. शायद इंदिरा गांधी को अपना अंतिम समय नजदीक आने का अहसास पहले ही हो चुका था. घटना की सुबह इंदिरा गांधी ने राहुल (Rahul Gandhi) और प्रियंका (Priyanka Gandhi) को स्‍कूल जाने से पहले गुडबाय किस किया. प्रियंका गांधी को महसूस हुआ कि उनकी दादी ने आज उन्‍हें ज्‍यादा देर तक और ज्‍यादा जोर से गले लगाया था. इसके बाद उन्‍होंने महज 14 साल के राहुल गांधी से कहा कि वह उनके निधन पर रोएंगे नहीं. वह आगे बढ़कर सभी को संभालेंगे.

राहुल से कुछ दिन पहले कहा, जी चुकी हूं अपना जीवन
यह पहली बार नहीं था जब इंदिरा गांधी ने राहुल से मौत पर चर्चा की थी. इसके कुछ दिन पहले ही उन्‍होंने राहुल से अंतिम संस्‍कार के इंतजामों पर भी चर्चा की थी. इस दौरान उन्‍होंने राहुल से कहा था कि वह अपना जीवन जी चुकी हैं. अमूमन वह इस तरह की बातें अपने बेटे राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) या बहू सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से नहीं करती थीं. उन्‍होंने अक्‍टूबर 1984 में ही लिखा था कि अगर मेरी मौत हिंसक तरीके से होती है तो हिंसा हत्‍यारे के विचारों में होगी मेरी मौत में नहीं. किसी भी तरह की घृणा देशवासियों (Citizens) और देश (Country) के प्रति मेरे प्रेम को छुपा नहीं सकती है. कोई भी ताकत मुझे मेरे देश को आगे ले जाने से रोक नहीं सकती है.

हत्‍या से कुछ दिन पहले ही इंदिरा गांधी ने राहुल गांधी से अंतिम संस्‍कार के इंतजामों पर चर्चा की थी. इस दौरान उन्‍होंने राहुल से कहा था कि वह अपना जीवन जी चुकी हैं.

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बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने चलाईं 36 गोलियां
इंदिरा गांधी को उस सुबह की शुरुआत पीटर उस्तिनोव (Peter Ustinov) को इंटरव्‍यू देकर करनी थी. वह अपने कार्यालय 1 अकबर रोड पहुंचने के लिए सुबह 9.12 बजे सरकारी आवास 1 सफदरजंग रोड से निकल रही थीं. उस समय उन्‍होंने भगवा साड़ी पहनी थी. जब वह अपने सरकारी आवास के विकेट गेट (Wicket Gate) को पार कर रही थीं तो एक सुरक्षा गार्ड ने उन्‍हें सलाम ठोका. उन्‍होंने मुस्‍कराकर जवाब दिया. तभी उन्‍हें अहसास हुआ कि उसने उनकी ओर बंदूक तान दी है. उनका छाता पकड़े नारायन सिंह (Narain Singh) ने मदद के लिए आवाज लगाई. इससे पहले कि इंडो-तिब्‍बतियन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवान मदद को पहुंच पाते बेअंत सिंह (Beant Singh) और सतवंत सिंह (Satwant Singh) ने उन पर एक के बाद एक 36 गोलियां चला दीं.

कुछ दिन पहले ही की थी बेअंत सिंह की तारीफ
31 अक्‍टूबर की सुबह हुए उस हमले से काफी पहले ही इंदिरा गांधी को बुलेटप्रूफ जैकेट (Bulletproof Vest) पहनने और सिख सुरक्षाकर्मियों (Sikh Security Guards) को हटाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्‍होंने दोनों ही बातें मानने से साफ इनकार (Refused) कर दिया था. उनका मानना था कि घर पर भारी बुलेटप्रूफ जैकेट पहनना निरर्थक है. वहीं, सिख सुरक्षाकर्मियों को हटाने की बात पर कहा कि इस विचार में भेदभाव (Discrimination) झलक रहा है. हत्‍या से कुछ दिन पहले ही इंदिरा गांधी ने बेअंत सिंह की ओर इशारा करते हुए गर्व से कहा था कि जब मेरे इर्दगिर्द ऐसे सिख मौजूद हैं तो मुझे किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है.

'जून, 1984 के बाद मन में रहे डरावने विचार'
इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद कई लोगों ने इस बात पर आश्‍चर्य जताया था कि सिख सुरक्षाकर्मियों को हटाने या बनाए रखने का मामला उनके सामने रखा ही क्‍यों गया था. कोई भी वीवीआईपी (VVIP) कभी भी अपनी सुरक्षा इंतजामों (Security Arrangements) में शामिल नहीं होता है. हालांकि, इंदिरा गांधी को अपने परिवार को नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर बहुत डर था. उनके सचिव रहे पीसी अलेक्‍जेंडर (PC Alexander) का कहना है कि जून, 1984 के बाद उनके मन में हमेशा डरावने विचार (Dreadful Thought) ही चलते रहते थे. वह बार-बार कहती रहती थीं कि उनके बच्‍चों के अपहरण (Kidnap) की साजिश रची जा रही है. मैं उनके डर को दूर करने के लिए कुछ नहीं कह पाता था.

जून, 1984 के बाद उनके मन में हमेशा डरावने विचार ही चलते रहते थे. वह बार-बार कहती रहती थीं कि उनके बच्‍चों के अपहरण की साजिश रची जा रही है.


राहुल-प्रियंका की सुरक्षा के लिए नहीं था कोई गार्ड
जब अरुण नेहरू (Arun Nehru) एम्‍स पहुंचे तो उन्‍होंने देखा कि सोनिया गांधी अपने बच्‍चों राहुल और प्रियंका के जीवन को लेकर भयानक तरीके से डरी हुई हैं. सोनिया अरुण नेहरू को बता रही थीं कि कैसे बांग्‍लादेशी नेता (Bangladeshi Leader) मुजीब-उर-रहमान (Mujib-ur-Rahman) की तीन पीढि़यों (Three Generations) को खत्‍म कर दिया गया था. उनके परिवार में सिर्फ शेख हसीना (Seikh Hasina) ही बची थीं. जब अरुण नेहरू गांधी परिवार के सफदरजंग रोड आवास पर पहुंचे तो ये देखकर दंग रह गए कि राहुल और प्रियंका की सुरक्षा के लिए वहां एक भी गार्ड मौजूद नहीं था. कोई दोनों को स्‍कूल से घर छोड़ गया था. इसके बाद वह दोनों को अमिताभ बच्‍चन (Amitabh Bachchan) की मां तेजी बच्‍चन (Teji Bachchan) के गुलमोहर पार्क आवास पर छोड़ आए थे.

जांच आयोग को विशेष सहायक धवन पर था शक
इंदिरा गांधी की पार्थिव देह (Mortal Remains) जब तीन मूर्ति भवन में रखी थी तो बाहर खड़ी भीड़ 'खून का बदला खून' नारे लगा रही थी. इसके बाद महज तीन दिन के भीतर दिल्‍ली की सड़कों को 2,500 से ज्‍यादा लोगों के खून से रंग दिया गया. कुछ लोगों को पकड़कर जिंदा जला दिया गया. इसके बाद इंदिरा गांधी की हत्‍या की जांच शुरू हुई. रिटायर्ड जस्टिस ठक्‍कर (Rtrd. Justice Thakkar) की अध्‍यक्षता वाले जांच आयोग (Inquiry Commission) ने इंदिरा गांधी के करीबी आरके धवन (RK Dhawan) के संदेह के घेरे में आने के बाद केंद्र सरकार से गहराई से जांच कराने के लिए सही जांच एजेंसी को मामला सौंपने की सिफारिश की. धवन इंदिरा गांधी के तत्‍कालीन विशेष सहायक (Special Assistant) थे.

राजीव गांधी ने ठक्‍कर रिपोर्ट को आर्काइव से हटवाया
धवन इंदिरा गांधी के स्‍टाफ में 1962 में शामिल हुए और अंत तक रहे. पीएन हक्सर, पीएन धर व आरएन राव जैसे लोग उनके स्‍टाफ में आए और गए, लेकिन धवन लगातार उनके साथ बने रहे. राजीव गांधी और कांग्रेस ने जस्टिस ठक्‍कर की रिपोर्ट (Thakkar Report) को आर्काइव (Archive) से हटाने का फैसला किया. धवन को क्‍लीनचिट (Clean Chit) दे दी गई. धवन का 2019 में निधन हो गया. वह जीवन भर कहते रहे कि उन पर इंदिरा गांधी की हत्‍या की साजिश में शामिल होने के आरोप निराधार थे. साथ ही वह कहते थे कि उनकी शर्ट इंदिरा गांधी के खून से रंग गई थी.

बेअंत सिंह ने अपनी पिस्‍टल इंदिरा गांधी पर तानी और फायरिंग शुरू कर दी. वह जमीन पर गिर गईं. इसके बाद सतवंत सिंह ने स्‍टेनगन से फायरिंग शुरू कर दी.


'इंदिरा गांधी ने सुबह 8 बजे बुलाया हेयर ड्रेसर'
धवन ने कुछ साल पहले 31 अक्‍टूबर, 1984 की सुबह के पूरे घटनाक्रम के बारे में सिलसिलेवार तरीके से बताया था. उन्‍होंने बताया कि 30 अक्‍टूबर को ही इंदिरा गांधी भुवनेश्‍वर (Bhubaneswar) से लौटी थीं. लिहाजा मैंने उनसे 31 अक्‍टूबर की सुबह दरबार (Durbar) रद्द करने और आराम करने की सलाह दी, लेकिन उन्‍होंने पीटर उस्तिनोव (Peter Ustinov) को इंटरव्‍यू देने को कहा. दरअसल, उस्तिनोव उनकी ओडिशा (Orissa) यात्रा के दौरान फिल्‍म का एक हिस्‍सा रिकॉर्ड कर चुके थे. जब धवन सुबह 8 बजे उनके आवास पर पहुंचे तो उन्‍होंने एक अच्‍छे हेयरड्रेसर (Hairdresser) को बुलाने को कहा. उनके सहायक नाथूराम एक हेयरड्रेसर को बुला लाए. धवन के मुताबिक, कुछ चीजों को लेकर वह बहुत संजीदा थीं.

'प्रिंसेस एनी के डिनर के इंतजामों का लिया जायजा'
इंदिरा गांधी ने 31 अक्‍टूबर की शाम ब्रिटेन (Britain) की प्रिंसेस एनी (Princess Anne) के लिए अपने आवास पर डिनर (Dinner) की योजना बनाई थी. उन्‍होंने धवन को कुछ खास लोगों को गेस्‍ट लिस्‍ट (Guest List) में डालने को कहा था. धवन याद करते हुए कहते हैं कि मेरे पास उनके आखिरी आदेश वाला पेज आज तक सही सलामत रखा है. ठीक 9 बजे उन्‍होंने 1 सफदरजंग रोड के अपने आवास के विकेट गेट की ओर बढ़ना शुरू किया. ये गेट 1 सफदजंग रोड के उनके आवास और 1 अकबर रोड के उनके कार्यालय को जोड़ता था. सामान्‍य दिनों की तरह धवन उनसे कुछ कदम पीछे चल रहे थे. वह काफी तेज चलती (Brisk Walker) थीं. ऐसे में कभी-कभी उनके कदमों से कदम मिलाकर चलना थोड़ा मुश्किल हो जाता था.

वेटर को नया और खास कप-प्‍लेट सेट लाने को कहा
इसी दौरान उनके सामने से एक वेटर कप और प्‍लेटें लेकर गुजरा. उन्‍होंने वेटर को रोका और कप-प्‍लेटें दिखाने को कहा. साथ ही पूछा कि वह उन्‍हें कहां लेकर जा रहा है. वेटर ने बताया कि उस्तिनोव ने इंटरव्‍यू के दौरान टेबल पर ये सभी चीजें रखने को कहा है. उन्‍होंने वेटर को ये कप-प्‍लेटें वापस ले जाने और नया खास सेट लाकर रखने को कहा. इसके बाद जैसे ही वह विकेट गेट पर पहुंचीं उन्‍होंने सुरक्षाकर्मियों की ओर नमस्‍ते के अंदाज में हाथ जोड़े. तभी धवन ने देखा कि बेअंत सिंह ने अपनी पिस्‍टल इंदिरा गांधी पर तानी और फायरिंग शुरू कर दी. वह जमीन पर गिर गईं. इसके बाद सतवंत सिंह ने स्‍टेनगन से फायरिंग शुरू कर दी. उस समय वहां कोई एंबुलेंस नहीं थी. इसलिए सोनिया गांधी उन्‍हें एंबेसडर कार से ही एम्‍स ले गईं.

(लेखक ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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First published: October 31, 2019, 8:58 PM IST
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