जानिए आजादी के दो दिन पहले देश में क्या हो रहा था?

15 August 2019 को देश आजादी (Independence day) की 73वीं सालगिरह मना रहा होगा. हालांकि इसके दो दिन पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं, जो भारतीय इतिहास में टर्निंग पॉइंट के तौर पर दर्ज हैं...

News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 9:46 AM IST
जानिए आजादी के दो दिन पहले देश में क्या हो रहा था?
भारत-पाकिस्तान में बंटवारे का दर्द
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Updated: August 13, 2019, 9:46 AM IST
दो दिन बाद देश आजादी (Independence day) की 73वीं सालगिरह मना रहा होगा. 15 August 1947 को देश आजाद हुआ था. हालांकि इसके दो दिन पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं, जो भारतीय इतिहास में टर्निंग पॉइंट के तौर पर दर्ज हैं.

200 वर्षों की गुलामी के बाद 13 अगस्त 1947 को ऐसा क्या हुआ था? आजादी मिलने के दो दिन पहले देश में कैसी घटनाएं हुईं थीं? 13 अगस्त 1947 को देश का माहौल कैसा था, कि हम इसे इतिहास का टर्निंग पॉइंट बता रहे हैं.

13 अगस्त 1947 को देश का बंटवारा हो चुका था. पूरे देश में अफरातफरी का माहौल था. एक तरफ आजादी मिलने की खुशी थी तो दूसरी तरफ बंटवारे का दर्द. हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग अपने सुरक्षित भविष्य की तलाश में बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे. लेकिन अपनी धरती, अपनी जमीन छोड़ने का दुख उनका कलेजा छलनी कर रहा था. लाखों लोग भारत से पाकिस्तान आ-जा रहे थे.

जब मुस्लिम महिलाओं ने नई दिल्ली से पाकिस्तान जाने के लिए ट्रेन पकड़ी

13 अगस्त को ही भारत मे रह रहीं मुस्लिम महिलाओं ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन पकड़ी. मुस्लिम महिलाओं की भीड़ ट्रेन में अपने जिंदगी को नए सिरे से संवारने का सपना लेकर पाकिस्तान की ओर रवाना हो गई. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दिल को चीर कर रख देने वाला नजारा था. बिछड़ने और मिलने का मिला जुला गम और खुशी के बीच एक अनिश्चितता का माहौल पसरा था.

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लाखों लोगों ने झेला विस्थापन का दर्द


पाकिस्तान से हिंदुओं को भारत भेजा जा रहा था. बंटवारे के बीच दंगे भड़क उठे थे. लोग एकदूसरे को मारने काटने में लगे थे. पाकिस्तान से जो ट्रेनें भारत आ रही थीं, उनकी बोगियों से लाशें निकल रही थीं. चारों ओर खून खराबा पसरा था. हिंदुस्तान में भी मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा था.
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दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन का दर्द

दो मुल्क के बंटवारे के महज 50 से 60 दिन के भीतर लाखों लोग का विस्थापन हुआ था. इतना बड़ा विस्थापन दुनिया में कहीं नहीं हुआ. बंटवारे की घोषणा होते ही बरसों से अपनी जमीन से जुड़े लोग अपने घर-मकान, जायदाद, दुकानें और संपत्ति छोड़कर हिंदुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने जाने लगे.

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बंटवारे के बाद दंगे भड़क उठे थे


विस्थापन के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 1.45 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे. 1951 में जब जनगणना हुई तो पता चला कि बंटवारे के बाद करीब 72 लाख 26 हजार मुसलमान हिंदुस्तान छोड़कर पाकिस्तान चले गए और करीब 72 लाख 49 हजार हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़कर हिंदुस्तान चले आए.

भारत में रियासतों के विलय को लेकर उलझी थी बात

13 अगस्त 1947 को आजादी के महज दो दिन पहले भी हिंदुस्तान ने ये फैसला लिया कि वो सोविय यूनियन के साथ दोस्ती और करीबी का रिश्ता रखेगा. इस रिश्ते ने आगे चलकर हिंदुस्तान को भरपूर मजबूती दी.

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करीब 1.45 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे


उस वक्त तक त्रिपुरा भारत का हिस्सा नहीं था. त्रिपुरा में लंबे वक्त से राजशाही थी. 13 अगस्त 1947 को ही त्रिपुरा की महारानी कंचनप्रवा देवी ने त्रिपुरा के भारत में विलय का फैसला लिया था. इसी दिन महारानी ने विलय के कागजात पर अपने दस्तखत किए थे. इसके साथ ही त्रिपुरा का भारत में विलय हुआ था.

भारत में रियासतों का विलय हो रहा था लेकिन भोपाल के नवाब अपनी बात पर अड़े थे. 13 अगस्त 1947 को भोपाल के नवाब हमिदुल्ला खान ने भोपाल के विलय से इनकार करते हुए भोपाल के आजाद रखने की मांग रखी थी. उधर हैदराबाद के निजाम भी इसी तरह की कोशिश में लगे थे. निजाम ने ट्रांसफर ऑफ पावर के मसले पर घोषणा की कि हैदराबाद एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर रहेगा.

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लोग अपना घरबार छोड़कर सुरक्षित ठिकाने के तलाश में सीमा पार कर गए


इस बीच मुस्लिम समुदाय के लिए ये खुशी का दिन था. 13 अगस्त के एक दिन बाद यानी 14 अगस्त पाकिस्तान की आजादी का दिन मुकर्रर हुआ था.

13 अगस्त 1947 को ही फेडरल कोर्ट के चीफ जस्टिस सर हरिलाल जेकिसुनदास कनिया भारत के चीफ जस्टिस बनाए गए थे.

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First published: August 13, 2019, 9:46 AM IST
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