जानें कोरोना के दौर में भारत और अमेरिका के एयर ट्रेवल में क्या अंतर है?

जानें कोरोना के दौर में भारत और अमेरिका के एयर ट्रेवल में क्या अंतर है?
भारत में सभी यात्रियों को सफर करने से पहले आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने का सुझाव दिया गया है.

हवाईअड्डों (Airports) पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं. वहीं, उड़ानों में सैकड़ों क्लस्टर होते हैं. इसलिए लोगों को हवाई यात्रा करने की अनुमति देते समय कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने को रोकने की कोशिशों के तहत दिशानिर्देशों (Guidelines) में बदलाव कर दिया गया है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) ने लोगों के रहन-सहन, व्‍यवहार, मिलने-जुलने के तरीके से लेकर खानपान, यात्रा के तरीकों तक सबकुछ बदलकर रख दिया है. वैश्विक महामारी (Pandemic) के कारण हवाई यात्रा में भी बदलाव कर दिया गया है. हवाईअड्डों (Airports) पर हजारों की संख्‍या में लोग पहुंचते हैं. वहीं, उड़ानों (Flights) में भी सैकड़ों कलस्‍टर होते हैं. ऐसे में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए हवाई यात्रा दिशानिर्देशों (Guidelines) में बदलाव कर दिए गए हैं. माना जा रहा है कि कोविड-19 के एक से दूसरे देश पहुंचने में हवाई यात्रा ने खलनायक की भूमिका निभाई है. चीन के वुहान (Wuhan) में फैलना शुरू हुआ कोरोना वायरस हवाई यात्रा कर अलग-अलग देश पहुंचे लोगों के साथ महज तीन महीने के भीतर पूरी दुनिया में फैलता चला गया.

भारत में 25 मार्च को लगा दी थी रोक, अमेरिका में उड़ान जारी
विशेषज्ञ भारत के मुंबई (Mumbai) और अमेरिका के न्‍यूयॉर्क (New York) इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उदाहरण दे रहे हैं. इन दोनों शहरों के हवाईअड्डे काफी व्‍यस्‍त रहते हैं. इसलिए इन दोनों शहरों में हालात सबसे ज्‍यादा खराब हैं. हालांकि, कुछ देशों ने वायरस फैलने के शुरुआती दौर में ही हवाई सेवा (Air Services) बंद कर दी थी, जबकि कुछ ने जोखिम उठाकर इसे जारी रखा. भारत ने हवाई यात्राओं पर 25 मार्च को रोक लगाई. इसके बाद 25 मई को आंशिक तौर पर घरेलू उड़ानों को फिर शुरू कर दिया है. वहीं, अमेरिका में कभी भी पूरी तरह उड़ानों पर पाबंदी नहीं लगाई गई. सरकार ने एविएशन सेक्‍टर पर ही नियम बनाने और उन्‍हें लागू कराने का जिम्‍मा छोड़ दिया. सरकार की ओर से सिर्फ एडवाइजरी जारी कर खानापूर्ति कर दी गई.

भारत में हवाई यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई नियम बनाए गए हैं. वहीं, अमेरिका में एडवाइजरी जारी कर खानापूर्ति कर दी गई है.




भारत में क्‍वारंटीन का फैसला राज्‍यों पर, अमेरिका में यात्री पर


भारत में जहां अभी तक अंतरराष्‍ट्रीय उड़ानों (International Flights) को अनुमति नहीं दी गई है. वहीं, अमेरिका ने ईरान (Iran), चीन (China), यूरोपीय शेंजेन एरिया, ब्रिटेन (Britain), आयरलैंड और ब्राजील के यात्रियों पर पाबंदी लगा दी है. भारत सरकार (Indian Government) ने घरेलू उड़ानों (Domestic Flights) के जरिये एयरपोर्ट्स पहुंचने वाले यात्रियों को क्‍वारंटीन करने या नहीं करने का फैसला पूरी तरह से राज्‍य सरकारों (States) पर छोड़ दिया है. द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके उलट अमेरिका में अंतरराष्‍ट्रीय यात्रियों को छोड़कर किसी यात्री के लिए कोई नियम नहीं बनाया है. लोगों से उम्‍मीद की जा रही है कि वे हवाई यात्रा पूरी करने के बाद खुद ही अपने घरों में 14 दिन के लिए क्‍वारंटीन होकर अपने स्‍वास्‍थ्‍य पर नजर रखेंगे.

भारत में सोशल डिस्‍टेंसिंग अनिवार्य, दी जा रहीं सेफ्टी किट
भारत में केंद्र सरकार ने सभी यात्रियों के लिए थर्मल स्‍क्रीनिंग अनिवार्य की हुई है. इसके अलावा बैग्‍स की संख्‍या सीमित कर दी है. मैनुअल चैक-इन पर रोक लगाते हुए सिर्फ वेब चेक-इन की अनुमति दी हुई है. वहीं, कोरोना वायरस को एक से दूसरे व्‍यक्ति में फैलने से रोकने के लिए फेस मास्‍क और सोशल डिस्‍टेंसिंग को अनिवार्य कर दिया है. इसके अलावा हवाई यात्रियों के लिए आरोग्‍य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है ताकि कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग में आसानी हो. भारत में सोशल डिस्‍टेंसिंग के लिए एयरपोर्ट के वेटिंग एरिया में कुछ सीटों को ब्‍लॉक कर दिया गया है. खाने-पीने की चीजों, न्‍यूजपेपर और मैग्‍जीन पर रोक लगा दी गई है. हालांकि, यात्रियों को ड्राई फूड लेकर चलने की अनुमति दे दी गई है. हर यात्री को फेस मास्‍क, फेस शील्‍ड और हैंड सैनेटाइजर वाली सेफ्टी किट दी जा रही है. यात्रियों को उड़ान के दौरान इनका इस्‍तेमाल करना अनिवार्य है.

Air travel
भारत में सिर्फ घरेलू उड़ाने शुरू की गई हैं. इनमें भी काफी एहतियात बरती जा रही हैं. इसके उलट अमेरिका में हवाई यात्रियों के लिए कोई भी अनिवार्य नियम नहीं है.(Photo-pixabay)


अमेरिका में कुछ भी अनिवार्य नहीं, दिए गए हैं सिर्फ सुझाव
अमेरिका में यात्रियों को अपने बोर्डिंग पास खुद ही स्‍कैन करने हैं. अब इस काम के लिए कोई अधिकारी नहीं होगा. अमेरिका में ट्रांसपोर्ट सिक्‍योरिटी एडमिनिस्‍ट्रेशन अधिकारियों के लिए फेस मास्‍क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. साथ ही उनसे यात्रियों को भी इसके लिए प्रोत्‍साहित करने को कहा गया है. अमेरिका के सेंटर्स ऑफ डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (CDC) ने हवाई यात्रियों को 6 फीट की दूरी बनाए रखने का सुझाव दिया है. सार्वजनिक स्‍थानों पर फेस मास्‍क पहनने, खांसी और छींक आने पर मुड़ी हुई कोहनी से मुंह ढकने की सलाह भी दी गई है. वहीं, टीएसए से कहा गया है कि वे यात्रियों को पारदर्शी प्‍लास्टिक बैग्‍स में खाने का सामान लाने को कहें. इसके अलावा यात्रियों को मोबाइल फोन्‍स, चाभियां, बेल्‍ट और वॉलेट्स कैरी बैग्‍स में लाने को कहा गया है ताकि उन्‍हें कम से कम बार छुआ जाए. उड़ान के दौरान सोशल डिस्‍टेंसिंग को लेकर कोई दिशानिर्देश नहीं हैं.

भारत में लैंडिंग के बाद भी नियम लागू, यूएस में सिर्फ सलाह
भारत में हवाई जहाज लैंड करने के बाद लोगों को क्रम से उतरने को कहा गया है. भीड़ जमा होने से बचाने के लिए सामान को अरायवल कैरॉसल पर रखा जाता है. सिर्फ अधिकृत टैक्सियों को ही यात्रियों को ले जाने की अनुमति दी गई है. इसके उलट अमेरिका में यात्रा खत्‍म होने के बाद किसी तरह के नियम लागू नहीं किए गए हैं. सीडीसी ने हवाई अड्डों, बस अड्डों, ट्रेन स्‍टेशंस और बस स्‍टॉप्‍स पर एक जैसे दिशानिर्देश जारी किए हैं. वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, हवाई यात्रा के दौरान संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है क्‍योंकि हवाईअड्डों से लेकर प्‍लेन और फिर टैक्सियों तक में ह‍वा की गुणवत्‍ता नियंत्रित की जाती है. इन सभी जगहों पर उपलब्‍ध हवा में डस्‍ट पार्टिकल्‍स, बैक्‍टीरिया, फंगी और वायरस आसानी से जिंदा रह सकते हैं.

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First published: May 28, 2020, 8:47 PM IST
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