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क्या है सबआर्बिटल उड़ान, जिसमें कामयाब होकर लौट आई ब्रैनसन की स्पेसशिप?

सबआर्बिटल उड़ान वो स्थिति है, जिसमें अंतरिक्ष यान काफी तेजी से ऊपर जाता है सांकेतिक फोटो (pixabay)

सबआर्बिटल उड़ान वो स्थिति है, जिसमें अंतरिक्ष यान काफी तेजी से ऊपर जाता है सांकेतिक फोटो (pixabay)

रिचर्ड ब्रैनसन (Richard Branson) के स्पेस ट्रैवल के साथ ही अंतरिक्ष पर्यटन (space tourism) की शुरुआत हो चुकी है. माना जा रहा है कि बहुत से अरबपति हैं, जो कुछ मिनटों की सबआर्बिटल उड़ान (suborbital flight) के लिए करोड़ों रुपए देने को तैयार हैं.

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    खरबपति और वर्जिन गैलेक्टिक के मालिक रिचर्ड ब्रैनसन हाल ही में दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेस ट्रैवल (Richard Branson space travel) करके लौट आए. इसके साथ ही अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा रही है. ब्रैनसन ने बाकी साथियों के साथ अंतरिक्ष की सब-ऑर्बिटल यानी उपकक्षीय उड़ान (suborbital flight) भरी. यहां बहुत तेजी से पहुंचकर वे कुछ मिनटों के लिए स्पेस में रहे, जिस दौरान बिल्कुल भारहीन रहे.

    क्या है सबऑर्बिटल के मायने
    आसान भाषा में समझें तो ये वो स्थिति है, जिसमें अंतरिक्ष यान काफी तेजी से ऊपर जाता है और स्पेस की सीमा को छूता है. इस दौरान अंतरिक्ष यात्री भारहीन हो जाते हैं. इसके बाद यान की गति में वो तेजी भी नहीं रहती और न ही इसकी कोई जरूरत होती है.



    इस तरह समझें नियम को 
    अगर कोई अंतरिक्ष यान 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की गति से चलता है तो वो जमीन पर नहीं गिरता, बल्कि पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करने लगता है. वो स्पेस की कक्षा में चक्कर काटता है. यही वो नियम है, जिससे चांद और दूसरे उपग्रह काम करते हैं. वहीं अंतरिक्ष की ओर भेजी गई किसी भी चीज में अगर वहां रहने लायक क्षैतिक गति नहीं होती, जैसे कि इस रॉकेट के मामले में माना जाए, तो वो वापस धरती पर लौट आता है और सबऑर्बिटल परिधि में चक्कर काटता रहता है.

    suborbital flight space travel
    सबआर्बिटल उड़ान के दौरान अंतरिक्ष यात्री भारहीन हो जाते हैं -सांकेतिक फोटो (pixabay)


    सबऑर्बिटल फ्लाइट क्यों मायने रखती है
    अंतरिक्ष यान भले ही अंतरिक्ष यान कक्षा में नहीं पहुंचा लेकिन प्राइवेट स्पेस फ्लाइट में स्पेस तक जाना एक बड़ी उपलब्धि है. रिचर्ड का यान लगभग 4 मिनट तक भारहीनता की स्थिति में रहा और वापस लौट सका. ये अपने-आप में बहुत रोमांचक अनुभव है. माना जा रहा है कि इस स्थिति तक पहुंचने के लिए दुनिया में बहुत से अरबपति तैयार बैठे हैं. वे अंतरिक्ष की सैर करना चाहते हैं.

    इसे बेसबॉल के उदाहरण से भी समझा जा सकता है
    जैसे हम किसी बेसबॉल को तेजी से ऊपर फेंके तो पहले बॉल अपनी मैक्सिमम ऊंचाई तक पहुंचती है, जिसके बाद धीमे से नीचे गिरती है. अगर आप सुपरपावर हों तो बेसबॉल को बहुत तेजी से, मान लो 97 किलोमीटर की गति से ऊपर उछाल सकें तो वो स्पेस पहुंच जाएगी. लेकिन जैसे ही वो अपनी अधिकतम ऊंचाई पर पहुंचेगी, इसमें शून्य वर्टिकल वेग आ जाएगा.

    suborbital flight space travel
    माना जा रहा है कि कई अरबपति अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए तैयार हैं- सांकेतिक फोटो (pikist)


    इस अनुभव के लिए हुई यात्रा 
    यही वो पॉइंट है, जहां से वो धरती पर गिरने लगेगी. गिरने से पहले बॉल भारहीन होगी. यही अनुभव स्पेस ट्रैवल कर लौटे अंतरिक्ष यात्रियों ने किया. वे स्पेस में तो पहुंचे लेकिन कक्षा में प्रवेश नहीं किया. यही कारण है कि उनकी उड़ान को सबऑर्बिटल कहा गया.

    ब्रैनसन लोगों को अंतरिक्ष यात्री बनने का मौका देना चाहते हैं
    माना जा रहा है कि अगर सब मुताबिक रहा तो अगले ही साल से स्पेस पर्यटन की शुरुआत हो जाएगी. इसमें एक टिकट की कीमत लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपए हो सकती है. इतनी कीमत के बाद भी फिलहाल लगभग 600 लोग स्पेस ट्रैवल के लिए कतार में हैं. वैसे बता दें कि वर्जिन गैलेक्टिक के तहत हुई इस यात्रा के बाद अब अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस भी अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं. ब्रैनसन के बाद जब बेजोस ब्लू ऑरिजिन के न्यू शेपर्ड यान से उड़ान भरेंगे तो वे भी सब-ऑर्बिटल उड़ान ही लेंगे.

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