क्या Kamala Harris का कोरियाई राष्ट्रपति से हाथ मिलाकर पोंछना Germophobia है?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की एक वीडियो वायरस हो रही है

अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की एक वीडियो वायरस हो रही है

जर्मोफोबिया (Germophobia) से पीड़ित व्यक्ति लोगों से हाथ मिलाने या किसी भी तरह के स्पर्श से बचता है. हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris) के दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से हाथ मिलाने के बाद पोंछने को कुछ लोग यही बीमारी बता रहे हैं.

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की एक वीडियो वायरस हो रही है. इसमें वे दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन से हाथ मिलाने के बाद अपने ट्राउजर में हाथ पोंछती (Kamala Harris wiped hands after handshake with South Korean president) नजर आती हैं. इसके बाद से हैरिस के इस कदम की खूब आलोचना हो रही है, बहुत से लोग हाथ पोंछने को नस्लभेद कह रहे हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हैरिस के इस एक्शन को जर्मोफोबिया (Germophobia) या कीटाणुओं से डर (fear of germs) बता रहे हैं, जो कोरोना काल में आम हो चुका है.

समझें, क्या है फोबिया 

लगभग सभी में किसी न किसी तरह का डर होता है, जिसकी वो पक्की वजह नहीं बता पाते. जैसे कुछ लोगों को पानी देखकर डर लगता है तो कुछ को कीड़े-मकोड़ों से घबराहट होती है. कई ऐसे भी लोग हैं, जो बंद जगह जैसे फ्लाइट, ट्रेन या बंद एसी कमरे में बेहाल हो जाते हैं. ये अलग-अलग तरह का फोबिया है. इसी तरह से एक फोबिया ऐसा भी है, जिसमें लोगों को जर्म्स का डर लगने लगता है. उन्हें लगता है कि कहीं भी छूने पर उनमें खतरनाक जर्म्स आ जाएंगे.

kamala harris wiped hands after handshake with south korean president
एक फोबिया ऐसा भी है, जिसमें लोगों को जर्म्स का डर लगने लगता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

इसे कहते हैं जर्मोफोबिया 

धूल-मिट्टी और गंदगी से दूरी तो आपको एक सेहतमंद जीवन देती है पर कुछ लोग सफाई के इस कदर आदी हो जाते हैं कि उनके मन में धूल और कीटाणुओं का फोबिया पैदा हो जाता है. इसे ही जर्मोफोबिया या माइसोफोबिया (Mysophobia) भी कहते हैं. इस दौरान थोड़ी सी धूल होने पर मरीज को घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, धड़कन बढ़ना, सीने में दर्द और कंपकंपी जैसी परेशानियां होने लगती हैं.

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हर बात से लगने लगता है डर 

यहां तक कि साफ-सुथरी जगह या खाना देखकर भी इससे ग्रस्त लोग जर्म्स, जैसे विषाणु, फंगस, बैक्टीरिया की कल्पना कर लेते हैं और खाने या छूने से कतराने लगते हैं. लोगों से हाथ मिलाने, छूने या गले मिलने से डरना भी इसी श्रेणी में आता है, जिसमें रोगी को लगता है कि हाथ मिलाने से उसमें कोई जर्म आ सकता है.

kamala harris wiped hands after handshake with south korean president
फिलहाल कोरोना के दौर में जर्मोफोबिया आम हो चुका है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कोरोना के दौर में जर्मोफोबिया आम 

विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत तमाम हेल्थ एक्सपर्ट मान चुके हैं कि कोरोना वायरस तब भी फैल सकता है, जब स्वस्थ और संक्रमित एक-दूसरे के संपर्क में आएं. इस वजह से साल 2020 की शुरुआत से ही लगातार हाथ मिलाने जैसी बातों को कम से कम करने की सलाह दी जा रही है. यहां तक कि लोग अभिवादन के लिए हाथ मिलाने की बजाए नमस्ते जैसा भारतीय तरीका या फिर कई दूसरे तरीके ईजाद कर चुके.

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जर्मोफोबिया कई वजहों से मिलकर बनता है

किसी दुखद घटना के बाद ट्रॉमा में गया व्यक्ति साफ-सफाई को लेकर परेशान रहने लगता है और फिर धीरे-धीरे ये आदत बढ़ती चली जाती है और व्यक्ति हर चीज में जर्म्स की कल्पना करने लगता है. ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) यानी बार-बार सफाई करने की आदत से ग्रस्त लोग भी जर्मोफोबिया के शिकार हो सकते हैं.

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जर्मोफोबिया का शिकार बार-बार हाथ धोता या घर को सैनेटाइज करता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

पीड़ित में खास लक्षण दिखते हैं

वो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचता है. लोगों से हाथ मिलाने या किसी भी तरह के स्पर्श से कतराता है. अपनी चीजें शेयर करना पसंद नहीं करता. बार-बार हाथ धोता या घर को सैनेटाइज करता है. अपना सारा समय सफाई में बिताने लगता है, यहां तक कि इसके लिए जरूरी काम भी छोड़ देता है.

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काउंसलिंग और दवाओं से इलाज मुमकिन 

इस बीमारी का कोई एक इलाज नहीं, बल्कि कई तरह के इलाज को मिलाकर इसके लक्षणों का उपचार होता है. जैसे कई बार दवाएं दी जाती हैं लेकिन साथ में विशेषज्ञ मरीज से बातचीत करते हुए उसकी काउंसलिंग भी करता है ताकि परेशानी की जड़ तक पहुंच उसे खत्म किया जा सके. कई बार इलाज के लिए एंटीडिप्रेशन दवाएं भी देनी पड़ती हैं.

एक्सपोजर थेरेपी  भी मदद करती है 

डर खत्म करने का एक तरीका ये भी है कि मरीज को उस चीज के संपर्क में लाया जाए, जिससे वो डरता है. इसे एक्सपोजर थेरेपी कहते हैं. इसमें मरीज को सीधे धूल या गंदगी में नहीं छोड़ दिया जाता, बल्कि उसे कहा जाता है कि वो इनसे डरकर किए जाने वाले कामों में थोड़ा अंतराल बढ़ाए. जैसे अगर व्यक्ति हर 15 मिनट में साबुन से हाथ धोता है तो उसे बढ़ाकर आधे घंटे और फिर एक घंटा कर दिया जाए. इससे धीरे-धीरे जबरन का डर चला जाता है.

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