क्या है किमची, जिसे लेकर चीन और दक्षिण कोरिया मारामारी पर उतर आए हैं?

कॉपी करने में माहिर चीन अब खाने के व्यंजन भी चुराने और उसे अपना बताने लगा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

दक्षिण कोरिया (South Korea) का कहना है कि चीन (China) ने उनकी पारंपरिक डिश किमची (Kimchi) को अपना बताना शुरू कर दिया है और जल्द ही पूरी तरह से उसे छीन लेगा.

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    कॉपी करने में माहिर चीन अब खाने के व्यंजन भी चुराने और उसे अपना बताने लगा है. कम से कम दक्षिण कोरिया तो उसपर यही आरोप लगा रहा है. पत्तागोभी से बना ये अचारनुमा व्यंजन दोनों देशों के बीच तनाव की वजह बन गया है. यहां तक कि इसका असर दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर पड़ता दिख रहा है.

    यहां से शुरू हुई लड़ाई
    पिछले हफ्ते, स्विट्जरलैंड में खाने के मानक तय करने वाली संस्था इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (ISO) ने चीन की एक डिश पाओ चाई के बारे में बात करते हुए उसे बनाने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और उसे स्टोर करने के बारे में नए सुझाव दिए. ये चीन के सिचुआन प्रांत की डिश है, जिसमें सब्जियों में खमीर उठाकर उसे खाया जाता है. ये काफी लंबा चलने वाली डिश है. साथ ही ISO ने दक्षिण कोरिया की डिश किमची का भी जिक्र किया और कहा कि ये नियम किमची पर लागू नहीं होते हैं. यानी कोरियाई लोग उसे अपनी तरह से बना सकते हैं.

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    चीनी मीडिया ने दिखाई उल्टी खबर
    इधर ISO के सुझावों को चीन की मीडिया ने उलटफेर करते हुए अलग ही तरीके से पेश करना शुरू कर दिया. वहां के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने सीधे-सीधे ऐसा दावा कर दिया कि पढ़ने वालों को किमची चीन का व्यंजन लगने लगे. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है. उसके कहा कि चीन की किमची इंडस्ट्री के बारे में ISO ने कहा है कि वो बिल्कुल ठीक तरह से चल रही है और इसमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं.

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    किमची पत्तागोभी से बनी डिश है- सांकेतिक फोटो (pxhere)


    दक्षिण कोरिया के लोग गुस्से में 
    चीन के इस बेसिरपैर के दावे के बाद से दक्षिण कोरिया भड़का हुआ है. वहां सोशल मीडिया यूजर से लेकर मीडिया भी लगातार पलटवार कर रहा है. कोरिया को डर है कि चीन इस तरह की खबरें देकर उसकी पारंपरिक डिश को अपना साबित कर देगा. यहां तक कि दक्षिण कोरिया की एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री तक इस लड़ाई में शामिल हो गई. उसने एक आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि चीन के पाओ चाई और दक्षिण कोरिया की किमची में फर्क है और खरीदने वालों को इसे लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए.

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    कृषि मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र (UN) का हवाला देते हुए साफ किया कि किमची के मानक साल 2001 में ही लागू हो चुके हैं और ये आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया की ही चीज है.

    किमची क्या है
    तो समझते हैं कि आखिर किमची क्या है जिसपर दक्षिण कोरिया चीन पर चोरी का आरोप लगा रहा है. किमची, जिसे कई बार गिमची भी कहते हैं कोरियाई डिश ही है. ये दक्षिण और उत्तर कोरिया दोनों ही देशों में खूब पसंद की जाती है और इसे दक्षिण कोरिया की नेशनल डिश माना जाता है. किमची को बनाने की प्रक्रिया को किमजेंग कहते हैं. इसे खुद यूनेस्को ने साल 2013 में सांस्कृतिक विरासत माना था.

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    किमची क्या है जिसपर दक्षिण कोरिया चीन पर चोरी का आरोप लगा रहा है- सांकेतिक फोटो (pikist)


    कोरिया की है डिश
    वैसे तो किमची डिश दोनों ही कोरियाई देशों के रोजाना के खाने का हिस्सा है लेकिन उत्तर कोरिया इसे लेकर खास उत्साहित नहीं रहा. वहीं दक्षिण कोरिया ने इसका खूब चाव से देश के अलावा विदेशों में भी प्रमोशन किया. विदेशी लोगों को इसकी ओर आकर्षित करने के लिए वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ किचमी जैसी संस्थाएं बनीं. यहां किमची के पोषण तत्वों के बारे में भी बताया जाता है.

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    सिओल में किमची की बहुतेरी किस्में 
    और तो और दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल में एक संग्रहालय है, जिसका नाम ही Kimchikan है. यहां देश के 1500 साल पुराने फूड कल्चर के बारे में बताया जाता है. साथ की किमची की लगभग 180 किस्में यहां हैं.

    विदेशी भी हुए आकर्षित
    पत्तागोभी के अचार की तरह तैयार हुई किमची धीरे-धीरे विदेशों में भी काफी पसंद की जाने लगी. हालत यहां तक हुई कि दक्षिण कोरिया मांग और सप्लाई का फर्क पूरा नहीं कर पा रहा था. ऐसे में उसने चीन की मदद ली. चीन में बनी किमची सस्ती होती है. दक्षिण कोरिया इसे लेकर बेचने लगा. यहां तक कि खुद अपने देश में लोग कम कीमत के कारण चीनी किमची खरीदने लगे.

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    सिओल में एक संग्रहालय है, जिसका नाम ही Kimchikan है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    चीन ने चला दांव 
    इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) के मुताबिक दोनों देशों के बीच किमची का व्यापार साल 2003 में शुरू हुआ. साल 2017 तक हालत ये हो गई कि दुनियाभर के कोरियन रेस्त्रां में परोसी जाने वाली 90 प्रतिशत किमची चीन से आयातित दिखने लगी. इस बीच चीन ने अपना दांव चला. उसने अपने यहां तो दक्षिण कोरियाई किमची पर रोक लगा ही दिया. साथ ही साथ उसके विदेशी बाजारों पर कब्जा करने लगा.

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    जापान ने भी किमची पर किया था दावा
    जापान में किमची का मार्केट पूरी तरह से चीनी उत्पाद से ढंक रखा है, जबकि पहले ये पूरी तरह से दक्षिण कोरिया के पास था. यहां एक और भी पेंच है. किमची डिश इतनी मजेदार होती है कि जापान ने भी इसे अपना बनाने की ठान ली. साल 1996 में जापान तक ने किचमी को अटलांटा ओलंपिक के दौरान अपनी डिश बताते हुए पेश किया. तब इसका नाम उन्होंने किमुची रख दिया. इस तरह से दक्षिण कोरिया की मूल डिश होने के बाद भी चीन और जापान के चलते किमची युद्ध शुरू हो गया.

    हालांकि जापानी किमुची उतनी मजेदार नहीं होती थी क्योंकि वे खमीर लाने की प्रक्रिया पूरी किए बिना इसे फटाफट तैयार करते थे. तब गुस्साए दक्षिण कोरिया ने कोडेक्स के तहत किमची के लिए सही नियम बनाने की अपील की. इससे जापान की किमुची तो मार्केट से हट गई लेकिन चीन ने तब भी बाजार पर कब्जा किए रखा.

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