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जानें क्या है चीन का मार्स मिशन तियानवेन-1, कितने दिन में पहुंचेगा लाल ग्रह

चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन की ओर से मंगल मिशन के रखे गए नाम 'तियानवेन' का मतलब 'स्वर्गीय प्रश्न' या 'स्वर्ग से प्रश्न' है.

चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन की ओर से मंगल मिशन के रखे गए नाम 'तियानवेन' का मतलब 'स्वर्गीय प्रश्न' या 'स्वर्ग से प्रश्न' है.

चीन (China) का मिशन मार्स तियानवेन-1 (Tianwen-1) मंगल तक पहुंचने में करीब 7 महीने लेगा, जबकि लैंडिंग में 7 मिनट लगेंगे. चीन ने मंगल अभियान (Mission Mars) के लिए शक्तिशाली लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट विकसित किया है.

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    वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) के बीच चीन ने पिछले महीने के आखिरी सप्‍ताह में अपने अगले अंतरिक्ष अभियान की घोषणा कर दी. उसने 24 अप्रैल को अपने अंतरिक्ष दिवस के मौके पर बताया कि वह अगले मंगल अभियान का नाम 'तियानवेन-1' रख रहा है. अंतरिक्ष अभियान 'तियानवेन-1' को 2020 के अंत तक मंगल के लिए प्रक्षेपित करने की योजना है. चीन (China) ने 1970 में इसी दिन अपना पहला उपग्रह दोंग फांग होंग-1 प्रक्षेपित किया था.

    चीन से पहले भारत, अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ मिशन मंगल (Mission Mars) को पूरा कर चुके हैं. चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) की ओर से मंगल मिशन के रखे गए नाम 'तियानवेन' का मतलब 'स्वर्गीय प्रश्‍न' या 'स्वर्ग से प्रश्‍न' है. यह चीन के कवि कुयुआन की लिखी कविता है. कुयुआन ने अपनी कविता 'तियानवेन' में आकाश, सितारों, प्राकृतिक घटनाओं, मिथकों और वास्तविक दुनिया को लेकर सवाल पूछे हैं. कवि ने कविता में पारंपरिक मान्‍यताओं और सत्य को पाने की भावना को लेकर अपनी आशंकाएं भी जताई हैं.

    मार्स तक पहुंचने में 7 महीने और लैंडिंग में 5 मिनट लगेंगे
    मंगल के खोजी कार्यक्रम के प्रमुख झांग रोंगकियाओ ने बताया था कि अंतरिक्ष से होते हुए मिशन को मंगल तक पहुंचने में करीब 7 महीने, जबकि लैंडिंग में 7 मिनट लगेंगे. इस अभियान के लिए चीन ने शक्तिशाली लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट विकसित किया है. वहीं, चीन की अगले पांच साल में अंतरिक्ष में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं. वह दुनिया का सबसे बड़ा स्पेस टेलीस्कोप, सबसे वजनदार रॉकेट और 2022 तक स्पेश स्टेशन (Space Station) लॉन्च करने की तैयारी भी कर रहा है.

    चीन ने मंगल अभियान के लिए शक्तिशाली लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट विकसित किया है. चीन की अगले पांच साल में अंतरिक्ष में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं.


    अगर ये सब सफल रहे तो चीन दुनिया का अगला स्पेस सुपर पावर बन जाएगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है कि चीन युद्ध के समय इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल दुश्मन देशों के सेटेलाइट ध्वस्त करने में कर सकता है. माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने भविष्य के साइबर युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है. बता दें कि हाल के वर्षों में चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने वाली एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरा है.

    अब तियानवेन सीरीज में होंगे चीन के सभी मंगल मिशन
    चीन ने 2011 में रूसी अंतरिक्षयान से मंगल पर यिंगहुओ-1 भेजने की कोशिश की थी, लेकिन वह असफल हो गया था. प्रक्षेपण के कुछ समय बाद ही यान रास्ता भटक गया था. अब चीन की अपनी मानवयुक्त अंतरिक्ष यान, चंद्रमा और गहरी अंतरिक्ष की खोज, पेइताउ उपग्रह नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन, संचार प्रसारण व अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोग की व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी हैं.

    सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने मिशन मंगल का नाम रखे जाने के दौरान बताया था कि सीएनएसए ने कहा कि अब चीन के सभी मंगल मिशन को तियानवेन श्रृंखला के नाम से जाना जाएगा, जो सच का पता लगाने, विज्ञान संबंधी खोज करने और प्रकृति व ब्रह्मांड से जुड़ी खोज करेंगे. बता दें कि भारत (India) 2014 में मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के साथ ही पहला ऐसा एशियाई देश बन गया था, जिसने मंगल मिशन में सफलता हासिल कर ली थी.

    चीन 50 साल में 300 से ज्‍यादा सेटेलाइट प्रक्षेपित कर चुका है. चीन ने 2018 में दूसरे देशों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा रॉकेट लॉन्च किए थे. उ


    दोबारा इस्‍तेमाल के लिए वजनदार रॉकेट बना रहा चीन
    साइबर युद्ध के लिहाज से तैयारियों की बात करें तो चीन 50 साल में 300 से ज्‍यादा सेटेलाइट प्रक्षेपित कर चुका है. चीन ने 2018 में दूसरे देशों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा रॉकेट लॉन्च किए थे. उसके कुल 39 रॉकेट लॉन्च में एक असफल रहा था. वहीं, 2016 में कुल 22 रॉकेट लॉन्च किए गए थे. अमरीका ने 2018 में 34 और रूस ने 20 रॉकेट लॉन्च किए थे. अमरीका ने 2016 में अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर 36 बिलियन डॉलर खर्च किए थे. वहीं, चीन ने महज 5 अरब डॉलर खर्च किए थे.

    चीन ज्‍यादा से ज्‍यादा सेटेलाइट लॉन्च करने के लिए वजनदार रॉकेट बना रहा है, जिसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा. अमरीका की कई निजी कंपनियां कम कीमत के रॉकेट बना रही हैं. रूस और अमेरिका के बाद 2007 में चीन तीसरा ऐसा देश बना जो अंतरिक्ष में किसी भी सेटेलाइट को ध्वस्त कर सकता है. चीन ने जमीन से एक मध्यम रेंज के मिसाइल का प्रयोग कर वेदर सेटेलाइट को ध्वस्त किया था. यह सैटेलाइट 1999 में लॉन्च किया गया था.

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