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क्या है विशेषाधिकार हनन नोटिस? जो राफेल मामले पर राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने दी है

क्या है विशेषाधिकार हनन नोटिस? जो राफेल मामले पर राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने दी है

कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने संसद को गुमराह किया है, ये विशेषाधिकार का हनन है.

कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने संसद को गुमराह किया है, ये विशेषाधिकार का हनन है.

मानसून सत्र में कांग्रेस ने राफेल सौदे को लेकर बीजेपी के चार सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया था

    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने लोकसभा में विशेषाधिकार हनन की नोटिस दी है.  बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी ने राफेल के मुद्दे पर देश से झूठ बोला है. लोकसभा में ये प्रस्ताव बीजेपी के नेता अनुराग ठाकुर की ओर से आया है.

    इन दिनों संसद का शीत सत्र चल रहा है. हालांकि लोकसभा में राफेल को लेकर पहले विशेषाधिकार हनन नोटिस की तलवारें निकाली जा चुकी हैं. मानसून सत्र में राफेल डील पर बीजेपी के चार सांसदों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था. उसके बाद कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश करने की बात कही थी.

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    आइए, जानते हैं क्या है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव? ये कैसे लाया जा सकता है?

    क्या है विशेषाधिकार हनन?
    देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

    भारतीय संसद


    कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
    इस नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

    किसे मिले हैं विशेषाधिकार?
    भारत के लोकतंत्र में संसद के सदस्यों को जो विशेषाधिकार दिए गए हैं, उनका मूल उद्देश्य सत्ता को किसी भी रूप या तरीके से बेलगाम होने से रोकने का है. भारत ने जो संसदीय प्रणाली अपनाई है, उसमें बहुमत का शासन होता है. लेकिन, अल्पमत में रहने वाले दलों के सदस्यों को भी जनता ही चुनकर भेजती है. उनका मुख्य कार्य संसद के भीतर सरकार को जवाबदेह बनाए रखने का होता है.

    संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ ये विशेषाधिकार हनन नोटिस लाया जा सकता है


    आम जनता के प्रति होती है जवाबदेही
    सदन की जवाबदेही प्रत्यक्ष रूप से आम जनता के प्रति होती है, जिसकी चौकीदारी विरोधी दल के सदस्य करते हैं. यह चौकीदारी इस सीमा तक होती है कि चुने हुए किसी भी सदन के भीतर किसी भी सदस्य को अपनी बात खुलकर कहने का पूरा अधिकार रहता है. ये अधिकार इस हद तक रहता है कि उसकी किसी भी बात को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती.

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    क्यों मिला ये अधिकार?
    हमारे संविधान निर्माताओं ने यह प्रावधान इसीलिए किया, जिससे संसद के अंदर हर चुना हुआ सदस्य बिना सत्ता की धमक और रौब में आए जनता की तकलीफों का बयान बिना किसी खतरे या खौफ के कर सके. यह बेवजह नहीं है कि लोकसभा में इसके अध्यक्ष और राज्यसभा में इसके सभापति की सत्ता सर्वोच्च रखी गई है. प्रधानमंत्री तक को उनके प्रति जवाबदेह बनाया गया है. सदन के भीतर सभापति की नज़र में प्रधानमंत्री और संसद सदस्य के बीच अधिकारों का कोई भेद नहीं रहता है.

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    लड़ने-लड़ाने के लिए नहीं, हितों के संरक्षण के लिए हैं ये अधिकार
    हमारे संविधान निर्माताओं ने उन्हें विशेषाधिकार इस देश की आम जनता के हितों का संरक्षण करने के लिए दिए हैं, उन्हें आपस में लड़ाने के लिए नहीं. चाहे सत्तापक्ष के लोग हों या विपक्ष के, सभी की यह पहली जिम्मेदारी बनती है कि संसद से जो आवाज जाए वह आम जनता को सशक्त को बनाने और भारत की एकजुटता के लिए जाए. उन्हें धर्म या जाति के नाम पर तोड़ने के लिए नहीं.

    प्रेस को भी महत्वपूर्ण अधिकार
    लोकतंत्र में प्रेस की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान हासिल है. इसलिए संसद की कार्यवाही प्रकाशित करने के नियम बनाए गए. संसद की कार्यवाही से यदि कोई शब्द सभापति निकाल देते हैं, तो उसे प्रकाशित करने का अधिकार प्रेस को नहीं दिया गया.

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    Tags: Fighter jet, Fighter Plane, France, India Defence, Loksabha, Parliament, Rafale, Rahul gandhi

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